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इतिहासः 188 साल पहले बालाकोट में सिखों ने की थी पहली सर्जिकल स्ट्राइक, मारे गए थे 300 मुजाहिदीन

Thu, 28 Feb 2019 04:06 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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महाराजा रंजीत सिंह
इतिहास इस बात का साक्षी है कि 188 साल पहले सिखों ने महाराज रंजीत सिंह के नेतृत्व में बालाकोट में पहली सर्जिकल स्ट्राइक की थी और 300 जेहादियों को मार गिराया था। फिर से बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक कर 300 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
188 साल पहले भी कश्मीर पर कब्जे की मंशा से सैयद अहमद बरेलवी के नेतृत्व में मुजाहिद एकत्र हुए थे। उस समय भी सभी मुजाहिद मारे गये थे। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 1831 में बालाकोट में महाराजा रणजीत सिंह के सिख लड़ाकों ने सैय्यद अहमद बरेलवी समेत 300 से ज्यादा मुजाहिदीन मार गिराए थे। सिखों के इस हमले में शाह इस्माइल शहीद भी मारा गया था, जो इस्लामी विद्वान था और अपने समय के बड़े इस्लामी विद्वान शाह वली उल्लाह का पोता था।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
सैय्यद अहमद बरेलवी मौजूदा उत्तरप्रदेश के रायबरेली कस्बे का रहने वाला था। उसका जन्म 1786 में हुआ था और वह कट्टर धार्मिक प्रवृत्ति का था। उसका मुख्य मकसद इस्लामी राज्य की स्थापना करना था। अपने मकसद को पूरा करने के लिए उसने काफिर राजाओं के खिलाफ जिहाद शुरू करने का फैसला किया था। इतिहास के पन्नों के मुताबिक, मुगल साम्राज्य दिल्ली में सिमटा हुआ था। उस समय उत्तर में ईस्ट इंडिया कंपनी, पूर्व में महाराजा रणजीत सिंह और पश्चिम-दक्षिण में मराठे ताकतवर थे।

 

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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
सैय्यद अहमद ने पाकिस्तान के नॉर्थ-वेस्टर्न फ़्रंटियर प्रोविंस से जिहाद शुरू करने का फैसला किया। उसकी योजना सिखों को हराने के बाद अंग्रेजों से मोर्चा लेने की थी। यह इलाका मुस्लिम देश अफगानिस्तान से लगा हुआ था और सैय्यद अहमद को उम्मीद थी कि उसे वहां पर मुजाहिदों की सेना तैयार करने में आसानी होगी। सैय्यद अहमद पक्का इरादा करके सिंध, क्वेटा और कंधार होते हुए पेशावर पहुंचा, जहां उसके साथ दिल्ली वाले शाह वली उल्लाह का पोता शाह इस्माइल भी था। पेशावर में उसने स्थानीय पठानों व खानों के साथ लड़ाका गठबंधन बनाया।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
1831 में सैय्यद अपने जत्थे के साथ बालाकोट पहुंचा। सैय्यद अहमद ने बालाकोट में सिखों पर हमला करके उनको हराने की रणनीति बनाई। उसने अपनी योजना की जानकारी टोंक के नवाब को लिखे एक पत्र में भी दी। यह पत्र 25 अप्रैल, 1831 को लिखा गया। पत्र में उसने लिखा कि मैं पाखली के पहाड़ों में हूं। यहां के लोगों ने हमारा गर्मजोशी से स्वागत किया, रहने की जगह दी और जिहाद में शामिल होने का आश्वासन भी दिया। फिलहाल मैं बालाकोट कस्बे में डेरा जमाए हुए हूं। यह कस्बा कुनहर (नदी) दर्रे पर है। काफिरों की सेना यहां से बहुत दूर नहीं है।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
पत्र में लिखा गया कि अगर हम जीते तो कश्मीर समेत झेलम के आसपास के क्षेत्र पर हम कब्जा कर लेंगे। आज पाकिस्तान जिहादियों को भारत के खिलाफ शह दे रहा है, वैसे ही 160 साल पहले अंग्रेजों ने सैय्यद अहमद शाह को महाराजा रणजीत सिंह के खिलाफ शह दी थी। अंग्रेजों का मानना था कि वहाबी शाह और उसके साथी सिख राज को कमजोर करके उन्हें फायदा पहुंचाएगा। उसे इस इलाके में ‘जिहादी’ गतिविधियां चलाने की पूरी छूट दी गई थी। उस समय कश्मीर और फ़्रंटियर प्रोविंस की कमान महाराजा रणजीत सिंह के नुमाइंदे गवर्नर के तौर पर काम कर रहे हरि सिंह के हाथ में थी।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
हरि सिंह बहुत चतुर और क्रूर प्रशासक था। उसकी सेनाएं शेर सिंह के नेतृत्व में मुजफ्फराबाद में इंतजार कर रही थीं। सैनिकों की कुछ टुकड़ियां बालाकोट के पास नदी के इस तरफ मिट्टीकोट नाम की पहाड़ी के ऊपर पहुंच चुकी थीं। वहां से बालाकोट साफ दिखता था। सैय्यद अहमद इंतजार कर रहा था कि सिख सेना वहां से उतर कर हमला करने आएगी। उसने पहाड़ी के नीचे धान के खेतों में पानी भरवा दिया था, ताकि सिख सैनिक बालाकोट आते समय इन दलदली खेतों में फंस जाएं और उस समय मुजाहिद उनको गाजर-मूली की तरह काट देंगे। लेकिन सिख भी कम होशियार न थे।
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सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक
वे इंतजार में थे कि जब मुजाहिद उनकी तरफ बढ़ेंगे, तब ही वे हमला करेंगे। चिराग अली खेतों की तरफ भागने लगा और बालाकोट में सिखों की सर्जिकल स्ट्राइक में चिराग अली पहला मरने वाला मुजाहिद था। सैय्यद अहमद ने अपने लड़ाकों को हमला करने का आदेश दिया। मुजाहिद धान के खेतों में आगे बढ़े, लेकिन वे दलदल में फंसते गये और सिख सैनिक उनको ढेर करते गये। सैय्यद अहमद व शाह इस्माइल समेत सभी मुजाहिद मार दिए गए। सैयद अहमद शाह और उसके साथियों की कब्रें आज भी बालाकोट में मौजूद हैं। इन्हें बहुत पवित्र भी माना जाता है। बालाकोट की एतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही शायद जैश ने अपने आतंकवादियों के प्रशिक्षण के लिए यहां अपना प्रशिक्षण केंद्र खोला था।

 
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