11 साल में पहली बार जेल से बाहर आई पाकिस्तानी लड़की हिना को भारत देश से ऐसा तोहफा मिला, देखकर उसकी आंखें छलक पड़ीं। आप भी गर्व महसूस करेंगे, जानिए।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
अमृतसर जेल से रिहाई के वक्त हिना को सोने का लॉकेट दिया गया, जिसमें एक तरफ भारत तो दूसरी तरफ पाकिस्तान का झंडा अंकित है। लॉकेट व अन्य उपहार लेते समय हिना के आंखों में आंसू थे, वहीं उसे पाक लौटने की खुशी भी थी। हिना ने पहली बार बाहर की दुनिया देखी थी। वह अपनी मां और मौसी के साथ पहली बार अपने वतन लौट रही थी। बेकसूर होने के बावजूद कई साल जेल में गुजारने वाली इस बच्ची की रिहाई उसके जन्मदिन के चार दिन पहले हुई है।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
आठ मई 2006 को ड्रग तस्करी में हिना की अम्मी फातिमा बेगम, खाला (मौसी) मुमताज व नानी रशीदा बेगम को सीमा शुल्क विभाग ने अटारी रेलवे स्टेशन पर उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे तीनों समझौता एक्सप्रेस से यहां पहुंचे थे। उनसे भारतीय जाली करंसी और हेरोइन बरामद हुई थी। इसी आधार पर तीनों को दस-दस साल की सजा हुई। फातिमा उस समय गर्भवती थी और उसने 2006 में ही जेल में हिना को जन्म दिया था। नानी रशीदा बेगम साल 2015 में जेल में ही अल्लाह को प्यारी हो गई थी।
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बॉर्डर पर पाकिस्तानी लड़की हिना
जेल प्रशासन के मुताबिक हिना का जन्म जेल में हुआ तो वह जेल की बेटी बन गई। उर्दू उसे नहीं आती। वह जेल के स्कूल में पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी पढ़ती थी। वह अन्य बच्चों के साथ देशभक्ति के गीत गाती और वंदेमातरम और भारत माता की जय के नारे लगाती थी। जेल में पैदा होने के कारण प्रत्येक जन्माष्टमी में वह कान्हा बना करती थी। ईद पर जेल के तरफ से उसे सौगात दी जाती। जेल में हिना ही अकेली ऐसी थी जो कहीं भी आ-जा सकती थी।
जब हिना चार-पांच साल की थी, तब वह जेल में कैद महिला कैदियों के गोद में खेला करती थी। वह जेल के स्टाफ से लेकर कैदियों तक की चहेती थी। हिना के लिए भी यह जेल ही उसकी दुनिया थी। वहीं जेल से आजाद होकर खुले आसमां के नीचे आई 11 वर्षीय हिना ने कहा कि न मैं पाकिस्तानी हूं और न हिंदुस्तानी, मैं तो इंसान हूं। मैं नहीं जानती की जेल के बाहर लोग कैसी जिंदगी लोग जीते हैं। हालांकि खुश हूं कि हम रिहा हो गए हैं।