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हथियारों के लिए लाइसेंस बनवाने के नियमों में बदलाव, शायद ही किसी ने बताएं हों

Mon, 15 Jan 2018 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हथियार
हथियार रखने और लाइसेंस बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब बंदूक के साथ अन्य हथियार रखने के लिए लाइसेंस लेना होगा, देखिए नए नियम।
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हथियार
भारत सरकार ने हथियारों के लाइसेंस पर यूआईएन नंबर लगाना जरूरी कर दिया है। इसके लिए 31 जनवरी तारीख तय की गई है। अगर इस तारीख तक नंबर नहीं लगवाया तो लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। पंजाब में फतेहगढ़ साहिब के अतिरिक्त उपायुक्त जे.के. जैन ने भारत सरकार की हिदायतों के अनुसार निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि लाईसेंस धारक द्वारा निश्चित समय अंदर सूचना मुहैया नहीं करवाई जाती तो उनके हथियार लाईसेंस का यू.आई.एन. जरनेट नहीं होगा और हथियार लाइसेंस रद्द माना जाएगा।
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हथियार
गृह मंत्रालय के निर्देश पर जुलाई 2016 से हथियार रखने और लाइसेंस बनवाने के नियम बदल गए थे। इसके तहत बंदूक के साथ अन्य हथियार रखने के लिए लाइसेंस लेना होगा। आर्म्स लाइसेंस को लेकर अब अधिकारी फाइल को नहीं रोक सकेंगे। नए एक्ट में अधिकारियों को तय समय में फाइल पर कार्यवाही करनी होगी। आर्म्स लाइसेंस में फीस भी कई गुणा बढ़ा दी गई है। साथ ही तलवार, भाला, बल्लम रखने के लिए भी लाइसेंस लेना होगा।

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हथियार
केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद हरियाणा में आर्म्स एक्ट 2016 को 15 जुलाई से लागू कर दिया था। नए एक्ट के अनुसार अब आपको अपने घर में तलवार रखनी हो तो उसके लिए लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा संगीन, भाला, बल्लम, कटार रखने के लिए भी लाइसेंस लेना पडे़गा, जिसमें लाइसेंस के समय 500 रुपये की फीस अदा करनी होगी। इस लाइसेंस को हर साल रिन्यू कराना होगा।
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हथियार
इसके लिए 100 रुपये नवीनीकरण फीस देनी पड़ेगी। नए आर्म्स एक्ट के अनुसार 17 तरह की सेवाओं के लिए समय सीमा तय कर दी गई है। अधिकारियों को तय समय में यह काम करना होगा। ऐसा न होने पर अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। आम्स लाइसेंस के लिए तय सेवाओं में दो दिन से लेकर अधिकतम 60 दिन तक का समय दिया गया है। आर्म्स एक्ट के अनुसार किसी भी काम के लिए दो महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा।
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हथियार
नए एक्ट के अनुसार अगर आपको अपने लाइसेंस के साथ यात्रा करनी हो तो उसके लिए 500 रुपये फीस अदा करनी होगी। एक लाइसेंस पर तीन हथियार ले सकते हैं। हर एक हथियार के लिए 500 रुपये फीस देने होगी। लाइसेंस के पते में बदलाव के लिए 500 रुपये फीस देनी होगी। गन के लिए तय 120 रुपये, राइफल के लिए 180 रुपये, रिवॉल्वर के 300 रुपये की फीस को बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है।
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हथियार
एनओसी के लिए 500 रुपये फीस तय की गई है। लाइसेंस बुक के लिए 100 रुपये शुल्क देना होगा। लाइसेंस को दूसरे के नाम ट्रांसफर करने के लिए एक हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है। लाइसेंस लेने के लिए आवेदन पत्र को शस्त्र अनुभाग में जमा किया जाता है। प्रशासन की ओर से संबंधित तहसील और पुलिस से रिपोर्ट तलब की जाती है। पहले पत्रावली सीओ के पास जाती है और उसके बाद डीसीआरबी।

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pistol
यहां से सभी थानों से आवेदक के आपराधिक रिकार्ड के बारे में जानकारी ली जाती है। आवेदक का चरित्र वेरीफिकेशन भी पुलिस व खुफिया विभाग से कराया जाता है। आवेदक को मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। स्वस्थ होने पर ही यह लाइसेंस दिया जा सकता है। यदि आवेदक का कोई अंग भंग है या फिर दृष्टि दोष है तो लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।

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आर्मी की पिस्टलों सहित गैंगस्टर गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
संबंधित तहसील की फाइल पर आवेदक  के फार्म पर हल्का लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट ली जाती है। एसपी और एसडीएम आवेदक की पत्रावली संपूर्ण होने के बाद आवेदक की फाइल को अलग-अलग कर जिलाधिकारी को भेजते हैं। संपूर्ण पत्रावली पूरी होने के बाद जिलाधिकारी अपने विवेकानुसार शस्त्र लाइसेंस जारी कर देते हैं।
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आर्मी की पिस्टलों सहित गैंगस्टर गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
आवेदक फीस जमा करने के बाद शस्त्र लाइसेंस खरीदकर उसको अपने जारी किए लाइसेंस पर शस्त्र की इंट्री कराता है। शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण हर तीन साल बाद कराया जाता है। नवीनीकरण के लिए आवेदक को फीस जमा करनी होती है और फिर संबंधित थाना और एसडीएम की रिपोर्ट तलब की जाती है। रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाता है।
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