आज देश के उस परमवीर का जन्मदिन है, जिसके नाम से ही दुश्मन कांप जाया करता था। इनका चंडीगढ़ से बेहद खास कनेक्शन रहा, जानिए इस जांबाज से जुड़ी खास बातें...
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
बात हो रही है परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा की। मूलरूप से हिमाचल प्रदेश (पालमपुर) के रहने वाले कैप्टन बत्रा ने 1992 से 1994 तक चंडीगढ़ स्थित डीएवी कॉलेज के स्टूडेंट रहे। उन्होंने इस कॉलेज में एनसीसी ज्वाइन की। इसके बाद आर्मी ऑफिसर बनने का सफर शुरू हुआ। एनसीसी में शानदार प्रदर्शन के आधार पर विक्रम बत्रा को एनसीसी के बेस्ट कैडेट से नवाजा गया था।
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कारगिल शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
डीएवी कॉलेज में एनसीसी ऑफिसर बताते हैं कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब विक्रम ने एनसीसी के आर्मी विंग में कैडेट के रूप में ज्वाइन किया था। विक्रम बत्रा एनसीसी के मेहनती कैडेट थे। वह काफी होनहार और आक्रमक थे। हर क्लास में उपस्थित रहते थे और अपनी टीम को लीड करते थे। एक आर्मी ऑफिसर बनने की जो क्वालिटी होनी चाहिए वह सब उनमें थी।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
डीएवी कॉलेज में एनसीसी ऑफिसर बताते हैं कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब विक्रम ने एनसीसी के आर्मी विंग में कैडेट के रूप में ज्वाइन किया था। विक्रम बत्रा एनसीसी के मेहनती कैडेट थे। वह काफी होनहार और आक्रमक थे। हर क्लास में उपस्थित रहते थे और अपनी टीम को लीड करते थे। एक आर्मी ऑफिसर बनने की जो क्वालिटी होनी चाहिए वह सब उनमें थी।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
चंडीगढ़ का डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 हो या फिर पंजाब यूनिवर्सिटी का एमए अंग्रेजी विभाग या फिर सेक्टर-17 का एक सैलून। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा यहां हीरो हैं। हों भी क्यों न, एक जीत के बाद वह चिल्लाते थे...ये दिल मांगे मोर। परमवीर चक्र शहीद कैप्टन के पिता गिरधारी लाल बत्रा बताते हैं कि विक्रम की बात एकदम अलग थी। उनका चयन आर्मी से पहले मर्चेंट नेवी में हो गया था। उनका हांगकांग में हेडक्वार्टर था।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
शहीद कैप्टन के पिता बताते हैं कि नेवी में काफी अच्छी तनख्वाह थी, लेकिन बेटे ने उस नौकरी को ठुकरा दिया, अपनी मां से बोले, मम्मी मुझको देश के लिए कुछ करना है। शहीद के पिता ने बताया कि विक्रम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद से प्रभावित थे और उन्होंने देश सेवा के लिए आर्मी में कमीशन लिया। उनके दूसरे बेटे विशाल बत्रा चंडीगढ़ में ही जॉब करते हैं।
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परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा
डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 के रविंदर चौधरी ने कहा कि विक्रम उनके यूथ क्लब में बैडमिंटन खेलने आते थे। उस दौरान उनका अंदाज ही अलग लगता था। विक्रम बत्रा के पिता कहते हैं कि ऐसा लगता है कि पाकिस्तान को कश्मीर का ट्यूमर हो चुका है। इसकी सर्जरी जरूरी है। हमारे जवान रोजाना मरते हैं। अब जरूरी है कि इसका ऑपरेशन कर दिया जाए। जैसा ऑपरेशन भारत ने पहले किया था, उसी तरह का दोबारा किया जाना चाहिए।
गिरधारी लाल बत्रा ने कहा कि कैप्टन विक्रम डीएवी कॉलेज में चार साल पढ़े, उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, सीडीएस की तैयारी भी यहीं की और एमए अंग्रेजी में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ से शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के दोस्त अब भी उन्हें फोन करते हैं। बता दें कि हिमाचल प्रदेश पालमपुर के घुग्गर गांव के रहने वाले विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हुआ था। 7 जुलाई 1999 को भारत मां का सच्चा सपूत देश पर शहीद हो गया।