चीन के बॉर्डर पर शहीद हुए सेना के जवान पंचतत्व में विलीन हो गए। इस दौरान उनकी मां, पिता, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था देखिए।
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राजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
भारत-चीन सीमा पर ग्लेशियर में ड्यूटी पर तैनात सिख लाइट 16 रेजिमेंट के हवलदार राजिंदर सिंह (35) का पार्थिव शरीर वीरवार को उनके पैतृक गांव पंजाब में बटाला कि विंझवां लाया गया। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। दोनों भाई रविंदर सिंह और भूपिंदर सिंह ताबूत को कंधों पर उठाकर श्मशानघाट ले गए।
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राजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
वहां पर 16 सिख रेजिमेंट की विशेष टुकड़ी ने शहीद राजिंदर सिंह को आसमान में फायर करके सलामी दी। इसके बाद प्रशासनिक औैर सेना के अधिकारियों ने शहीद राजिंदर सिंह को सैल्यूट किया। पूरे सरकारी सम्मान से शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
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राजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
राजिंदर सिंह अपने पीछे पत्नी हरजिंदर कौर, 11 साल की बेटी गुरलीन कौर और बेटे जसरोज सिंह (8) को छोड़ गए हैं। उनकी हालात को देखकर हरेक की आंखें नम हो गईं। पिता राज कुमार और माता तारा रानी की आंखों में आंसू तो थे, लेकिन बेटे की शहादत पर गर्व भी महसूस कर रहे थे। जब बेटे की वर्दी पिता को सौंपी गई तो माहौल भावात्मक हो गया।
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राजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
‘शहीद की पत्नी को दी जाए सरकारी नौकरी’
रविंदर सिंह और भूपिंदर सिंह ने बताया कि उनके भाई के जाने के बाद अब कमाने वाला कोई नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि शहीद की पत्नी हरजिंदर कौर को आर्थिक सहायता के अलावा सरकारी नौकरी दी जाए। इस दौरान फतेहगढ़ चूड़ियां के नायब तहसीलदार लक्ष्मण सिंह पहुंचे। उन्होंने कहा कि सिविल प्रशासन सरकारी के नियमों के अनुसार शहीद परिवार की हर तरह से मदद करने के लिए वचनबद्ध है।
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राजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार
बता दें कि बीते बुधवार को भारत-चीन सीमा पर ग्लेशियर में ड्यूटी पर तैनात राजिंदर सिंह आक्सीजन की कमी होने से शहीद हो गए थे। राजिंदर सिंह पिछले 17 साल से देश की सेवा कर रहे थे और पिछले 6 महीनों से भारत-चीन सीमा पर ग्लेशियर में तैनात थे। भाई रविंदर सिंह, भूपिंदर सिंह और पिता राजकुमार ने सरकार से गांव विंझवां के सरकारी मिडल स्कूल का नाम शहीद राजिंदर सिंह के नाम पर रखने की मांग की है।
नहीं पहुंचा कोई नेता, परिवार ने जताया रोष
शहीद के अंतिम संस्कार के मौके पर प्रशासनिक अधिकारी तो पहुंच गए, मगर कोई नेता नहीं पहुंचा। शहीद राजिंदर सिंह की बुआ के बेटे सुलखन सिंह ने बताया कि हमारे सेना के जवान बार्डर पर अपनी जान की बाजी लगा देते हैं, ताकि देश में शांति बनी रहे। वहीं आज उनके भाई के संस्कार के समय कोई राजनीतिक नेता नहीं पहुंचा।