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शहीद जवान मंदीप सिंह के पत्नी के लिए आखिरी शब्द, पढ़कर आंखें भर आएंगी

Sat, 25 Nov 2017 09:15 AM IST
आर रघुवंशी/अमर उजाला, बटाला(पंजाब)
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शहीद मंदीप सिंह
देश पर कुर्बान होने से पहले शहीद मंदीप सिंह का पत्नी के नाम आखिरी पैगाम, जिसे पढ़कर सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा और बहादुर बेटे को सलाम करेंगे।
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शहीद मंदीप सिंह
मैं तुमसे किसी विषय पर जरूरी बात करना चाहता हूं लेकिन अभी मैं बहुत व्यस्त हूं। जैसे ही समय मिलेगा मैं तुमसे बात करूंगा। यह वादा देश के लिए जान देने से चार दिन पहले शहीद मंदीप सिंह ने अपनी पत्नी राजविंदर कौर से किया था। उन्होंने पत्नी से कहा था कि वह घर में उनके माता-पिता और दोनों बच्चों का ध्यान रखें। उनकी चिंता मत करे। उनके पिता प्रेम सिंह जो दिल के मरीज हैं उनका खास ध्यान रखें।
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शहीद मंदीप सिंह
राजविंदर कौर ने कहा कि उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। उनके पति ने देश के लिए शहादत का जाम पिया है। परिवार में उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। मंदीप अपनी ड्यूटी को सबसे प्रथम मानते थे। जब उन्हें घर आने के लिए कहा तो मंदीप ने कहा था कि अभी उनकी सख्त ड्यूटी चल रही है। बर्फ पड़ रही है और दो-दो बार छुट्टी नहीं मिल सकती।

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शहीद मंदीप सिंह
पापा मेरे लिए बहुत सारी चीजें लेकर आएंगे
जब शहीद मंदीप सिंह के चार साल के बेटे अमृत सिंह से उसके पापा के बारे में पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि उसके पापा उसके लिए पैंट, कमीज, जैकेट, चॉकलेट और टाफियां लेकर आएंगे। यह सब लाने का उसके पापा ने वादा किया था। लेकिन बच्चों को कौन समझाए कि उनके पापा उनसे बहुत दूर चले गए हैं और कभी लौटकर नहीं आएंगे।
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शहीद मंदीप सिंह
9 सिख लाई रेजिमेंट के जवान मंदीप सिंह उतरी कश्मीर के कुपवाड़ा में बुधवार को आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। पंजाब में बटाला के गांव चाहल खुर्द के उनका अंतिम संस्कार वीरवार की देर शाम उसके पैतृक गांव में हुआ। शहीद के बेटे और पिता ने चिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले पार्थिव शरीर के वहां पहुंचते ही पूरा गांव शौक में डूब गया।
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शहीद मंदीप सिंह
अंतिम संस्कार से पहले सैन्य सम्मान के साथ सेना के जवानों ने शहीद जवान मंदीप सिंह को श्रद्धांजलि दी। 9 सिख लाई रेजिमेंट के जवानों ने हथियारों को उलटा कर शहीद को सलामी देकर श्रद्धांजलि दी। वीरवार सुबह गांव चाहल खुर्द में शहीद के पार्थिव शरीर के पहुंचते ही कोलाहल मच गया। मंदीप की शहादत के बारे में परिजनों को बुधवार शाम को खबर मिली थी।
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शहीद मंदीप सिंह
बता दें कि शहीद मंदीप सिंह के दो भाई हैं और एक बहन। सबसे बड़ा भाई राजिंदर सिंह भी फौज में सूबेदार है। छोटा भाई सोनू खेतीबाड़ी का काम करता है। इसके अलावा एक बहन सुखजिंदर कौर है। मंदीप सिंह परिवार में ही सबसे छोटा था। मंदीप के दो बच्चे हैं। एक चार साल का है, जिसका नाम अमृत सिंह और छोटा दो साल का, जिसका नाम गुरकीरत सिंह है।

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शहीद मंदीप सिंह
शहीद के पिता प्रेम सिंह औैर मां भजन कौर ने बताया कि वह दोनों मंदीप के परिवार के साथ ही रहते हैं। मंदीप दसवीं पास करने के बाद ही 19 साल की आयु में ही 2004 में सेना में भर्ती हो गया था। 32 वर्षीय मंदीप हाकी खिलाड़ी भी था। सेना में भी उसने कई मेडल जीते थे। वह हर काम आगे होकर करता था। अब जब वह शहीद हुआ तो आतंकियों से लोहा लेने में भी वह सबसे आगे था।

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शहीद मंदीप सिंह
...ताकि रोज-रोज हमारे जवानों को शहीद न होना पड़े
शहीद मनदीप सिंह की बुआ के बेटे गुरिंदर सिंह ने बताया कि तीन महीने पहले वह एक महीने की छुट्टी पर घर आया था। तब उसने किसी भी मुश्किल के बारे में कोई जिक्र नहीं किया। गुरिंदर सिंह का कहना था कि सरकार को चाहिए कि इन आतंकवाद के खात्मे के लिए ऐसा कदम उठाए ताकि रोज-रोज हमारे जवानों को शहीद न होना पड़े।
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शहीद मंदीप सिंह
बता दें कि शहीद के अंतिम संस्कार में श्री हरगोबिंदपुर के विधायक बलविंदर सिंह लाड़ी भी पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। लाडी ने कहा कि इस मौके पर सूबा सरकार की नीति के अनुसार 5 लाख रुपये शहीद की पत्नी को वित्तीय मदद, 5 लाख के प्लाट के लिए राशि, 2 लाख रुपये शहीद के माता-पिता को देने और शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

 
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