शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा
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शहादत को दो दशक बीत गए पर अब भी उनके दोस्त उनका जिक्र सुनते ही यह जुमले दोहराते हैं ‘या तो मैं लहराते तिरंगे के पीछे आऊंगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊंगा, पर मैं आऊंगा जरूर’, ‘ये दिल मांगे मोर’। गिरधारी लाल बत्रा ने बतााया था कि विक्रम की बात एकदम अलग थी। आर्मी से पहले मर्चेंट नेवी में नौकरी मिली पर ठुकरा दी। मां से बोला, मम्मी मुझको देश के लिए कुछ करना है। विक्रम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद से प्रभावित थे। यह थी हमारे हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की शहादत की गाथा।