खतरनाक हथियारों से लैस इंडियन एयरफोर्स के खूंखार गरुड़ कमांडो दुश्मन को खत्म करके ही सांस लेते हैं, जानिए कैसे तैयार किया जाता है इन्हें।
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गरुड़ कमांडो
जम्मू और कश्मीर में आतंक के खिलाफ सेना का एक्शन अब और सख्त व मजबूत होगा। क्योंकि घाटी में सेना अब एयरफोर्स कमांडो के साथ अपने ज्वाइंट एक्शन को और तेज करेगी ताकि सेना को निशाना बनाने और घाटी में अशांति फैलाने का मंसूबा पाले आतंकियों को लगातार कड़ा सबक सिखाया जा सके। इसके लिए सेना अपनी माकूल तैयारियों में जुटी हुई है।
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गरुड़ कमांडो
सूत्रों के अनुसार, एयरफोर्स की स्पेशल गरुड़ कमांडो फोर्स के कई सदस्य इस समय घाटी में सेना के साथ आतंक विरोधी ऑपरेशन के संचालन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन कमांडों की ट्रेनिंग सेना की संपत्तियों जैसे सेना की महत्वपूर्ण यूनिटों एवं बेस कैंप, एयरबेस, एयरक्राफ्ट्स, एम्युनेशन होल्डिंग एरिया की सुरक्षा और एयरबार्न ऑपरेशंस, एयरफील्ड सीजर व काउंटर टेरिज्म पर केंद्रित है।
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गरुड़ कमांडो
इसलिए जरूरी है ज्वाइंट ऑपरेशन
केंद्र सरकार हर कीमत पर घाटी में शांति स्थापित करना और आतंक का खात्मा चाहती है। जिसके लिए घाटी में सेना, बीएसएफ व अन्य स्पेशल फोर्सेस को पहले से ही फ्री हैंड दिया जा चुका है। लेकिन उसके बावजूद आतंकी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। आतंकी न केवल बार-बार सीजफायर का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सीमा से सटे गांवों, जवानों, सैन्य यूनिटों, बेस कैंपों और सेना के अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं।
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गरुड़ कमांडो
आए दिन आतंकी सैन्य यूनिटों व जवानों पर हमला बोल रहे हैं। 30 मार्च को तो शोपियां जिले में आतंकियों ने मुगल रोड पर स्थित सेना द्वारा बनाई गई सीजनल हट्स (मौसम के अनुरूप लगाए गए तंबुओं) में आग लगा दी। इरादा था तंबुओं में रह रहे जवानों को जिंदा जलाना, मगर आतंकी कामयाब नहीं हो पाए। इसी के मद्देनजर घाटी में आर्मी के जवानों संग एयरफोर्स के गरुड़ कमांडों फोर्स के ज्वाइंट ऑपरेशन को बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
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गरुड़ कमांडो
आतंकियों की खैर नहीं, खूंखार हैं कमांडो
आर्मी के पैरा स्पेशल कमांडो व नेवी के मार्कोस (मरीन) कमांडो फोर्स की तरह वर्ष 2004 में तैयार की गई एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो भी काफी खूंखार और अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं। कुछ महीने पूर्व ही सेना ने घाटी में अपने एंटी टेरिज्म ऑपरेशंस में गरुड़ कमांडो फोर्स को शामिल किया है। अक्तूबर 2017 में उत्तरी कश्मीर में बांदीपुरा के हाजिन इलाके में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशंस में दो गरुड़ कमांडो कॉरपोरल नीलेश कुमार व सार्जेंट मिलिंद किशोर शहीद भी हो चुके हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि कश्मीर में गरुड़ कमांडो को आतंकी मुठभेड़ में अपनी जान गंवानी पड़ी हो।
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गरुड़ कमांडो
इसलिए जरूरत हुई गरुड कमांडो की
भारतीय वायु सेना के लिए स्पेशल फोर्स की जरूरत तब महसूस की गई, जब 2001 में आतंकियों ने जम्मू और कश्मीर में 2 एयर बेसों पर हमला किया। गरुड़ कमांडोज की ट्रेनिंग नेवी के मार्कोस और आर्मी के पैरा कमांडोज की तर्ज पर ही होती है। इन्हें एयरबॉर्न ऑपरेशंस, एयरफील्ड सीजर और काउंटर टेररेजम का जिम्मा उठाने के लिए ट्रेन किया जाता है। गरुण कमांडो जम्मू और कश्मीर में काउंटर इन्सर्जन्सी ऑपरेशंस में भी ऑपरेट कर चुके हैं। शांति के समय उनकी एक मुख्य जिम्मेदारी होती है वायुसेना की एयरफील्ड्स की सुरक्षा करना।
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गरुड़ कमांडो
आर्मी और नेवी से अलग, गरुड़ कमांडो वॉलनटिअर नहीं होते। उन्हें सीधे स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग के लिए भर्ती किया जाता है। और एक बार गार्ड फोर्स जॉइन करने के बाद कमांडो अपने पूरे करियर के लिए यूनिट के साथ रहते हैं। इस वजह से यूनिट के पास लंबे समय के लिए बेस्ट सोल्जर रहते हैं। गरुड़ कमांडो बनना आसान काम नहीं है। सभी रिक्रूट्स का बेसिक ट्रेनिंग कोर्स 52 हफ्तों का (इंडियन स्पेशल फोर्सेज में सबसे लंबा) होता है। शुरुआती 3 महीनों के प्रॉबेशन पीरियड में अट्रिशन रेट काफी ज्यादा होता है और इसी दौरान अगले दौर की ट्रेनिंग के लिए बेस्ट जवानों की छंटनी हो जाती है।
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गरुड़ कमांडो
अगले फेज की ट्रेनिंग स्पेशल फ्रंटियर फोर्स, इंडियन आर्मी और नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स के साथ दी जाती है। जो इस फेज में सफल होते हैं, वे अगले दौर की ट्रेनिंग में जाते हैं। इतनी सख्त ट्रेनिंग में सफल रहने वाले जवानों को फिर आगरा के पैराशूट ट्रेनिंग स्कूल भेजा जाता है। मार्कोस और पैरा कमांडोज की तरह गरुण कमांडो भी सीने पर पैरा बैज लगाते हैं। गरुड़ कमांडोज को मिजोरम में काउंटर इन्सर्जन्सी ऐंड जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्लूएस) में भी ट्रेनिंग दी जाती है। भारतीय सेना का यह संस्थान अपारंपरिक युद्ध में विशेषज्ञता प्रदान करने वाला प्रशिक्षण संस्थान है।
इस संस्थान में न केवल गरुड़ कमांडो, बल्कि दुनियाभर की सेनाओं के सिपाही काउंटर-इन्सर्जन्सी ऑपरेशंस की ट्रेनिंग लेने आते हैं। ट्रेनिंग के अंतिम दौर में गरुड़ कमांडोज को भारतीय सेना के पैरा कमांडोज की सक्रिय रूप से तैनात यूनिट्स के साथ फर्स्ट हैंड ऑपरेशनल एक्सपीरियंस के लिए अटैच किया जाता है। गरुड़ कमांडोज दुनिया के कुछ सबसे खतरनाक हथियारों से लैस होते हैं, जिनमें साइड आर्म्स के तौर पर Tavor टीएआर -21 असॉल्ट राइफल, ग्लॉक 17 और 19 पिस्टल, क्लोज क्वॉर्टर बैटल के लिए हेक्लर ऐंड कॉच MP5 सब मशीनगन, AKM असॉल्ट राइफल, एक तरह की एके-47 और शक्तिशाली कोल्ट एम-4 कार्बाइन शामिल हैं।