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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें, अब नहीं बचेंगे दुश्मन!

Wed, 07 Jun 2017 11:42 PM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें
अब वायुसेना के एयरक्राफ्ट और सेना की मिसाइलों का निशाना ज्यादा सटीक रहेगा। मिसाइल और एयरक्राफ्ट्स की पाथ सेंसर तकनीक को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने अपग्रेड किया है।
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें
पाथ सेंसर के लिए पहले इनमें मैकेनिकल जायरो (दिक् सूचक) का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब डीआरडीओ ने इस काम के लिए फाइबर ऑप्टिक जायरो टेक्नीक ईजाद की है। मिसाइल ‘आकाश’ के लिए डीआरडीओ ने इस नई तकनीक को डिलीवर कर दिया है।
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें
पहले ‘आकाश’ में इंस्टाल होगी टेक्निक
प्रदीप ने बताया कि फाइबर ऑप्टिक जायरो टेक्निक धीरे-धीरे सभी मिसाइलों व एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल होगी। फिलहाल डीआरडीओ ने इस तकनीक को सेना व वायुसेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइल ‘आकाश’ के लिए डिलीवर कर दिया है। इस तकनीक को आकाश मिसाइल में इंस्टॉल किया जा रहा है।

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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें
मिसाइल को टारगेट सेे भटकने नहीं देगी तकनीक
जायरो व एसलरोमीटर ये दो तरह के सेंसर मौजूद हैं, जो मिसाइलों व एयरक्राफ्ट्स के पाथ सेंसर के लिए इस्तेमाल होते हैं। चंडीगढ़ आए डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट प्रदीप कुमार ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि यह सेंसर मिसाइलों और एयरक्राफ्ट के इंटरनल नेविगेशन को कंट्रोल करता है।
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें - फोटो : अमर उजाला
उनके अनुसार अभी तक इस काम के लिए मैकेनिकल जायरो इस्तेमाल होता था, लेकिन पहली बार डीआरडीओ ने इसे अपग्रेड कर जायरो की फाइबर ऑप्टिक टेक्निक ईजाद की है। ये तकनीक मिसाइल को अपने टारगेट से भटकने नहीं देगी। उसके पाथ को पूरी तरह से कंट्रोल करके रखेगी।
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें - फोटो : विवेक निगम
20 साल तक मरम्मत की जरूरत नहीं
अभी तक इस्तेमाल होने वाली मैकेनिक जायरो तकनीक की अपेक्षाकृत नई ईजाद की गई फाइबर ऑप्टिक जायरो टेक्निक इंस्टॉल होने केबाद 20 साल तक इस पॉथ सेंसर को मरम्मत की जरूरत नहीं रहेगी।
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सेना ने अपग्रेड किए एयरक्राफ्ट और मिसाइलें - फोटो : फाइल फोटो
सीनियर साइंटिस्ट ने बताया कि मैकेनिकल जायरो की विश्वसनीयता अपेक्षाकृत कम है, लेकिन मरम्मत ज्यादा है। मगर फाइबर ऑप्टिक जायरो न केवल सस्ती तकनीक है, बल्कि इसकी एक्यूरेसी भी ज्यादा है, जिससे मिसाइल का टारगेट तक पहुंचने में भटकाव नहीं होगा।
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