दुनिया का सबसे घातक लड़ाकू विमान 'अपाचे' एक खूंखार शिकारी है, जो दुश्मन को तबाह करके ही सांस लेता है। जानिए इसकी दो ऐसी खूबियां, शायद ही किसी को पता हों।
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
- फोटो : अमर उजाला
‘फ्लाइंग टैंक’ नाम से मशहूर दुनिया के सबसे घातक हेलीकॉप्टर ‘अपाचे एएच-64 ई’ ने इंडियन एयरफोर्स की ताकत को और बढ़ा दिया है। यूएस की बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित इस हेलीकॉप्टर की स्कॉवड्रन ‘ग्लेडिएटर’ को पंजाब स्थित अति संवेदनशील एयरफोर्स स्टेशन पठानकोट में तैनात किया गया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम के तहत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर को औपचारिक रूप से लॉन्च करते हुए एयरफोर्स के बेड़े में शामिल कराया।
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वायुसेना में शामिल हुआ अपाचे हेलीकॉप्टर
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एयरफोर्स और आर्मी दोनों को कवर करेगा
युद्ध के मैदान में अपाचे हेलीकॉप्टर न केवल एयरफोर्स की ताकत होगा, बल्कि युद्ध में ही आर्मी स्ट्राइक कोर के हमले को एविएशन कवर देते हुए उसे और खतरनाक बनाएगा। एक के पीछे एक यानी दो पायलट के साथ अपाचे दुश्मन के दांत खट्टे करने में सक्षम है। एक पायलट हेलीकाप्टर ऑपरेट करेगा, जबकि उसके पीछे बैठा को-पॉयलट टारगेट को लोकेट करता हुआ सिस्टम यानी वैपन एंड इंक्यूपमेंट्स को कंट्रोल करते उसे ऑपरेट करेगा।
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दिन हो या रात, बारिश हो या जंगल, दुश्मन को नहीं छोड़ेगा
अपाचे उष्ण-कटीबंधीय क्षेत्रों और मरूस्थलीय इलाकों में भी अपनी ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता रखता है। इसका टारगेट एक्वीजिशन और डेजिग्नेशन सिस्टम आधुनिक है। इसमें पॉयलट नाइट विजन सेंसर, थर्मल इमेजिंग, डाटा लिकिंग व फायर कंट्रोल राडार (360 डिग्री) सिस्टम भी मौजूद है, जिससे यह अंधेरे में भी दुश्मन पर वार कर सकता है। यह बेहद कम ऊंचाई से हवाई और जमीनी हमले में सक्षम है।
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280 की रफ्तार से 21 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है
अपाचे 21 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। 280 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भर सकता है। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल छोड़ने की क्षमता है। अपाचे 30 मिलीमीटर की दो गन से लैस है। इनमें एक बार में 1,200 गोलियां भरी जाती हैं। अपाचे में 16 एंटी टैंक एजीएम-114 हेलफायर और स्ट्रिंगर मिसाइल लगी होती है। हेलफायर मिसाइल किसी भी आर्मर्ड व्हीकल जैसे टैंक, तोप, बीएमपी वाहनों को पल भर में उड़ा सकती है।
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दुश्मनों का राडार भी पकड़ नहीं सकता
अपाचे स्ट्रिंगर मिसाइल हवा से आने वाले किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम है। इसमें हाइड्रा-70 अनगाइडेड मिसाइल भी लगा है, जो जमीन पर किसी भी निशाने को तबाह कर सकता है। इस हेलीकॉप्टर को दुश्मनों का रडार भी आसानी से पकड़ नहीं पाता है। जिसका प्रमुख कारण हेलीकॉप्टर की सेमी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है। इसमें अत्याधुनिक लांगबो रडार लगा हुआ है जिससे यह नौसेना के लिए भी मददगार साबित होगा।
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नए उपकरणों के साथ भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ
अपाचे मल्टी रोल फाइटर हेलीकॉप्टर है। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अपाचे के बेड़े में शामिल होने से उसकी लड़ाकू क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इनमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बदलाव किया गया है। शुरुआत में इन हेलीकॉप्टरों को हिंडन एयरबेस पर तैनात किया गया था। जहां से आज यानी मंगलवार को कुछ जरूरी उपकरण लगाने के बाद इन्हें पठानकोट एयरबेस पर आधिकारिक तौर पर वायुसेना में शामिल कर लिया गया है।
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एमआई-35 की रिप्लेसमेंट है अपाचे
रॉकेट, मिसाइल, नाइट विजन राडार, गन इत्यादि हथियारों व उपकरणों से लैस इस हेलीकाप्टर से इंडियन एयरफोर्स की मारक क्षमता अब हर दुर्गम क्षेत्रों तक हो गई है। दिन हो या रात हर मौसम में यह हेलीकाप्टर दुश्मन के किसी भी दुर्गम क्षेत्र में जाकर बड़े हमले को अंजाम दे सकता है। एयरफोर्स के एक आला अफसर बताते हैं कि अपाचे के आने के बाद एयरफोर्स की मारक क्षमता भी पहले से कई गुना बढ़ जाएगी। अपाचे को एमआई-35 की रिप्लेसमेंट के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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22 अपाचे आएंगे भारत
दरअसल, अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह वॉर जोन में कतई फेल न हो। बोइंग ने पूरी दुनिया में 2200 से अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति की है और भारत 14वां देश है, जिसने इसे अपनी वायुसेना के लिए चुना है। चार साल पहले भारत ने अमेरिका की कंपनी बोइंग के साथ सितंबर 2015 में 22 अपाचे हेलीकॉप्टर का करार किया था। 2022 तक सभी 22 अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे।