हम आपको सुना रहे हैं एक ऐसे शख्स की कहानी, जो कभी गायों को चराया करता था। पर पहले मुख्यमंत्री बना और फिर राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठा।
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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
बात हो रही है देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की। आज यानी 5 मई को इनका जन्मदिन है। ज्ञानी जैल सिंह का रियल नाम जरनैल सिंह था। वह पंजाब के किसान किशन सिंह के बेटे थे। उनका जन्म फरीदकोट के संधवान गांव में 5 मई 1916 को हुआ था। छोटी उम्र के थे, मां छोड़ कर चली गई। मौसी ने उनका लालन-पालन किया था।
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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
ज्ञानी बचपन से ही पिता के साथ खेतों में जाते थे, उन्होंने भी खेती की, हल चलाए, फसल काटी और जानवरों को भी चराने ले जाते थे। पढ़ने में कोई खास इंटरेस्ट नहीं था, पढ़ाई बीच में ही छूट भी गई थी। पढ़ने से ज्यादा म्यूजिक का शौक था, इसलिए वह हारमोनियम सीखने के लिए पिता की हर बात मानते थे। महज 15 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी।
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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
ये देश के पहले सिख राष्ट्रपति थे और इन्हीं के कार्यकाल में देश को हिला कर रख देने वाला ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 में सिख विरोधी दंगे हुए थे। ज्ञानी जैल सिंह का स्वभाव बचपन से ही क्रांतिकारियों की तरह था, इसलिए वह 15 साल की उम्र में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध काम कर रहे अकाली दल से जुड़ गए थे।
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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
स्वतंत्रता से पूर्व ज्ञानी जैल सिंह देश को स्वराज दिलाने और अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए आंदोलनों में शामिल होने लगे थे। 1938 में 'प्रजा मंडल' पार्टी का गठन किया था। अंग्रेजों ने जरनैल सिंह को जेल भेज दिया, उन्हें पांच वर्ष की सजा सुनाई गई। बताया जाता है कि उन्होंने पंजाब में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में नौकरी भी की, लेकिन उनका मन वहां भी नहीं लगा।
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देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
ज्ञानी जैल सिंह जब जवान थे तो उन्होंने फरीदकोट में तिरंगा फहराने के बारे में सोचा, लेकिन वहां के स्थानीय अफसरों ने मना कर दिया। ज्ञानी को यह बात अच्छी नहीं लगी ओर उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेटर लिखा। उनकी इस बात से नेहरू इंप्रेस हो गए थे। उन्होंने अपनी 'पार्टी प्रजा मंडल' को छोड़ दिया और नेहरू के साथ जुड़ कर पंजाब में राजनीति करने लगे।
स्वतंत्रता के बाद ज्ञानी जैल सिंह को पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्यों के संघ का राजस्व मंत्री बनाया गया। 1951 में उनको कृषि मंत्री बनाया गया। वह 1956 से 1962 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे। सन 1962 में ज्ञानी जैल सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री बने। 1982 में उन्होंने भारत के सातवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। 25 दिसंबर 1994 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।