चरणजीत कौर ने अपने बेटे को प्यार से रखे नाम ‘मोहनी’ कह कर पुकारा। ‘खड़ा हो जा पुत्त मोहनी कित्थे चला गया तूं, रब्बा मैनूं ही चक लेंदा, मेरे पुत्त नूं भरी जवानी विच्च ले गया।’ बार- बार मां अपने बेटे को छूने की कोशिश करती रहीं। शहीद की बड़ी बहन सुखजीत कौर रोते-रोते बोली ‘वीरे तूं छेती आऊण दा वादा करके कित्थे चला गया, असीं तां तेरे विवाह दीयां तैयारियां कर रहे सी।’ पिता लाभ सिंह और बडे़ भाई गुरप्रीत सिंह भी फूट फूट कर रोए। उन्होंने कहा कि अपने बेटे की शहादत पर नाज है लेकिन यह दुख जीवन में भूल नहीं सकते हैं।