आतंकियों और दुश्मनों के खिलाफ अब और खतरनाक होगा भारतीय सेना का प्रहार। टकराने की हिम्मत करके देखो, नामोनिशां ही मिट जाएगा, खाक में मिल जाएंगे।
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भारतीय सेना
भारतीय सेना अब घाटी और नार्थ-ईस्ट राज्यों में चल रहे अपने सैन्य अभियानों में भाग लेने वाले अधिकतर जवानों को सेमी आटोमैटिक ‘40 एमएम मल्टी शूट ग्रेनेड लांचर’ से लैस करेगी सेना इस हथियार का इस्तेमाल इस वक्त घाटी में सबसे ज्यादा कर रही है।
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indian army
सेना का मानना है कि इससे घाटी में आतंक और घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे सेना के ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ की ताकत और बढ़ेगी। इस वक्त घाटी में आतंकियों और घुसपैठियों के हालात चिंताजनक बनी हुई हैं। हालांकि सेना भी फ्री हैंड होकर इन देश विरोधी ताकतों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, लेकिन फिर भी इनकी नापाक करतूतें कम नहीं हो रही है।
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भारतीय सेना
- फोटो : SELF
इसलिए सेना जवानों को घाटी में इस एडवांस हथियार से लैस करेगी। घाटी का वे जंगलात इलाके, जहां आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं औरघुसपैठ सबसे ज्यादा है, वहां तैनात जवानों को ये लांचर उपलब्ध करवाई जाएगी। ताकि आतंकियों पर प्रहार प्रबल हो सके। ये लांचर साउथ अफ्रीका की तकनीक पर आधारित है।
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375 मीटर तक रेंज, 10 मीटर तक कीलिंग एरिया
इस ग्रेनेड लांचर को एक जवान आसानी से उठाकर चल और इसका इस्तेमाल कर सकता है। दुश्मन के बंकर को उड़ाने के लिए पास जाने की जरूरत नहीं, इससे निशाना लगाकर बंकर दूर से ही उड़ाया जा सकता है। रेंज 30 मीटर से लेकर 375 मीटर, 10 मीटर तक कीलिंग एरिया और प्रैक्टिकल रेट ऑफ फायर 18 राउंड प्रति मिनट। घाटी में काउंटर विद्रोह और कम तीव्रता वाले संघर्ष को काबू करने के लिए एक आदर्श हथियार।
चार तरह का बारूद चला सकता है ये लांचर
इस सेमी आटोमैटिक ग्रेनेड लांचर में चार तरह का बारूद इस्तेमाल हो सकता है। इन बारूदों में हाई एक्सप्लोसिव (एचई), हाई एक्सप्लोसिव एंटी पर्सनल (एचईएपी), हाई एक्सप्लोसिव ड्यूल पर्पस (एचईडीपी) और स्मॉक शामिल है। ये बारूद पतली चादर की बख्तर बंद गाड़ियों, बंकरों और लोगों के समूह को दूर से ही उड़ाने में सक्षम हैं।