फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरें: यह है वीरों का कॉलेज, 13 छात्र देश पर बलिदान, 100 से ज्यादा सीमा पर डटे, पढ़ें- गौरवगाथा

Sat, 15 Aug 2020 12:53 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

देश आज आजादी की 74वीं वर्षगांठ मना रहा है। ये आजादी हमें लाखों कुर्बानियों के बाद मिली है।
विज्ञापन
1 of 16
देश आज आजादी की 74वीं वर्षगांठ मना रहा है। ये आजादी हमें लाखों कुर्बानियों के बाद मिली है। आजादी के बाद भी देश पर कुर्बान होने का सिलसिला थमा नहीं। रण बांकुरे आज भी सीमा पर हंसते-हसते अपने प्राणों को न्योछावर कर देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे कॉलेज की गौरवगाथा बताने जा रहे हैं, जिसकी पहचान शहीदों के कॉलेज के तौर पर है।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 16
इस कॉलेज के विद्यार्थियों की रगो में देशभक्ति का जज्बा बहता है। कॉलेज की आबोहवा में ऐसा रंग घुला है कि पहले विद्यार्थी सेना में शामिल होता है और बाद में सरहद पर जाकर दुश्मनों के छक्के छुड़ा देता है। कॉलेज के कई विद्यार्थी शहीद भी हुए हैं और उनका नाम देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जा चुका है। उनकी गाथाएंसमय-समय पर सुनाई जाती हैं। जो भी इनके शौर्यता और वीरता के किस्से सुनता है उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं
विज्ञापन

3 of 16
चंडीगढ़ - फोटो : social media
यह कॉलेज है चंडीगढ़ के सेक्टर- 10 स्थित डीएवी कॉलेज। डीएवी प्रिंसिपल डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि कॉलेज का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। यहां के कई विद्यार्थी देश की सेवा करते हुए शहीद हो चुके हैं। यहां से निकले वीरों की शहादत देश के युवाओं की प्रेरणा है। परमवीर चक्र विजेता विक्रम बत्रा, महावीर चक्र विजेता मेजर संदीप सागर, सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू, वीर चक्र विजेता कैप्टन विजंयत थापर के नाम आज हर किसी के जुबां पर रहते हैं। 

4 of 16
कैप्टन विक्रम बत्रा। - फोटो : सोशल मीडिया
यहां से निकले करीब 120 से ज्यादा विद्यार्थी देश की अलग-अलग सेनाओं में हैं। सेना में जाने के लिए कई विद्यार्थी इसी कॉलेज में एडमिशन लेते हैं। कॉलेज ने इन्हीं वीरों के सम्मान में डीएवी एडमिन ब्लॉक का नाम शौर्य भवन रखा है। कॉलेज में एनसीसी का आर्मी विंग, एयरफोर्स विंग और नेवल विंग है। जो विद्यार्थियों को सेना की तरह अनुशासित बनाता है और उनमें देश प्रेम की प्रेरणा बढ़ाता है। आइए जानते हैं वे कौन हैं, जो न सिर्फ कॉलेज की शान बनें बल्कि देश के नौजवानों के प्रेरणास्रोत हैं।
विज्ञापन

5 of 16
विक्रम बत्रा - फोटो : फाइल फोटो
विक्रम बत्रा: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के विक्रम बत्रा की शहादत हर बच्चे की जुबां पर है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पालमपुर में हुई। उसके बाद वे सेक्टर- 10 डीएवी कॉलेज आ गए। साल 1996 में सेना ज्वाइन की। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने अदम्य शौर्य दिखाया। उन्होंने अपनी टुकड़ी के साथ श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे ऊंची चोटी को पाकिस्तान के सैनिकों के छक्के छुड़ाकर अपने कब्जे में लिया। सफलता हासिल करने के बाद दूसरी चोटी को भी उन्होंने कब्जाया लेकिन इस दौरान वे बुरी तरह से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च बलिदान पुरस्कार मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
विज्ञापन

6 of 16
मेजर संदीप सागर
मेजर संदीप सागर: डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र मेजर संदीप सागर को महावीर चक्र मिला। कारगिल युद्ध के दौरान ही 25 जून 1999 को दुश्मन की बिछाई बारूदी सुरंग फटने से मेजर संदीप सागर वीरगति को प्राप्त हो गए। वे उस समय 26 साल के थे। आर्मी में संदीप का सेलेक्शन लेफ्टिनेंट की पोस्ट पर हुआ था। उनकी पहली पोस्टिंग जून 1995 में यूपी में हुई। उसके बाद बटालियन कश्मीर आ गई। साल 1999 के जून महीने में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास राजौरी जिला के कलसियां एरिया में आतंकवादियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन चल रहा था। सेना के विजय ऑपरेशन में मेजर संदीप सागर भी शामिल थे। 25 जून को सैन्य ऑपरेशन के दौरान दुश्मन की बिछाई बारूदी सुरंग फटने से वह शहीद हो गए।
विज्ञापन

7 of 16
विजयंत थापर - फोटो : फाइल फोटो
विजयंत थापर: डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्रा कैप्टन विजयंत थापर के शौर्य की चर्चा आज भी सुनी जा सकती है। वे 22 साल की उम्र में ही शहीद हो गए थे। थापर की रेजिमेंट को कारगिल युद्ध में तोरोलिंग में घुसे दुश्मनों को उखाड़ फेंकने का काम मिला था। 10000 से 15000 फुट की चोटियों पर जैसे प्रमुख चोटी बर्बाद पोस्ट (पा.4590) जिसे कैप्टन थपर की अगुवाई में जीता जा चुका था। यह तोरोलिंग की पहली चोटी थी। यहां पर कैप्टन थापर ने अपनी पहली जीत दर्ज की और स्वयं तिरंगा फहराया था। 

8 of 16
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
यह कारगिल युद्ध की एक महत्वपूर्ण सफलता थी, क्योंकि यहां से ही दूसरी चौकियों पर चढ़ाई करने में आसानी हो गई। थापर की टुकड़ी आगे बढ़ती गई। उन्हें नोल पोस्ट पर कब्जा करना था। इस आक्रमण में मेजर पी आचार्य व थापर का सहायक सिपाही जगमाल सिंह शहीद हो चुके थे, भारी नुकसान हो चुका था, इसलिए थोड़ा पीछे हटकर एक बड़ी चट्टान के पीछे सुबह होने से पहले पहुंच चुके थे और रात का इंतजार करते रहे। निर्णायक हमला 29 जून की रात को कैप्टन थापर व उनकी टुकड़ी ने दोबारा किया। आधी रात को नोल पोस्ट के ठीक नीचे एक बड़ी चट्टान के नीचे मोर्चा संभाला। 

9 of 16
कैप्टन अतुल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
भारी मशीनगनों से फायर ऊपर से लगातार आ रहा था। थापर ने परवाह किए बगैर नायक तिलक सिंह के साथ अचानक आगे बढ़कर धावा बोल दिया। दुश्मन के कुछ सैनिक मारे गए, कुछ भाग खड़े हुए। मदद के लिए दूसरे सैनिक भी वहां पहुंचने लगे थे। अचानक पीछे से गोलियों की बौछार कैप्टन थापर पर आई और वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया है।

कैप्टन अतुल शर्मा: चंडीगढ़ के रहने वाले कैप्टन अतुल शर्मा ऑपरेशन रक्षक में 15 नवंबर 2000 को शहीद हुए। वे आर्मी की एयर डिफेन्स में थे। शहीद अतुल शर्मा डीएवी से ग्रेजुएशन के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट रहे।

10 of 16
शहीद राजीव संधू - फोटो : फाइल फोटो
शहीद राजीव संधू: डीएवी कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी राजीव संधू पांच मार्च 1988 में सेना में शामिल हुए थे। श्रीलंका में चल रहे पीस मिशन के लिए राजीव को श्रीलंका में तैनात किया गया था। 19 जुलाई 1988 को राजीव संधू दो वाहनों के काफिले में राशन लेने श्रीलंका में एक जगह से दूसरी जगह जा रहे थे। जब वे रास्ते में जंगल से निकल रहे थे तो उनके काफिले पर आतंकवादियों ने रॉकेट लॉन्चर और एके-47 से हमला कर दिया। दो जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रॉकेट सीधा राजीव संधू के पांव पर लगा। इससे उनकी दोनों टांगें कट गई। बावजूद इसके अपनी 9एमएम कार्बाइन के साथ राजीव किसी तरह आर्मी के वाहन से बाहर निकले। एक आतंकवादी यह सोचकर हथियारों को लूटने के इरादे से आया कि सभी मर चुके हैं।

11 of 16
अनिल यादव - फोटो : फाइल फोटो
वह जब नजदीक आया तो राजीव ने उसे गोली मार दी। इसके बाद आतंकवादियों ने राजीव पर फायरिंग शुरू कर दी। राजीव मोर्चे पर डटे रहे। आतंकवादी चाहते थे कि वह अपने साथी की बॉडी को ले जाएं साथ ही असलाह भी लूट लें। लेकिन खून से लथपथ होने के बावजूद राजीव ने हार नहीं मानी और आतंकवादी अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो सके। इसके बाद आर्मी के एक अन्य काफिले को इसका पता चला। जब वे मौके पर पहुंचे तो राजीव आतंकवादियों से लोहा ले रहे थे। आर्मी के काफिले को आता देख आतंकवादी भाग गए। वे 19 जुलाई 1988 को शहीद हो गए थे। 21 साल की उम्र में शहादत पाकर वीरता की नई मिसाल दी। उन्हें इस अदम्य साहस और शौर्य के लिए मरणोपंरात महावीर चक्र मिला। वह सबसे छोटी उम्र में महावीर चक्र पाने वाले सैन्य अधिकारी हैं।

12 of 16
मेजर नवनीत वत्स - फोटो : फाइल फोटो
मेजर नवनीत वत्स: डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र मेजर नवनीत वत्स की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। 20 नवंबर 2003 में कुछ आतंकियों ने श्रीनगर टेलीकॉम बिल्डिंग पर हमला कर दिया था। उस दौरान मेजर नवनीत की पोस्टिंग भी वही थी। हमले की खबर सुनते ही मेजर नवनीत वत्स को फौरन आतंकियों को खदेड़ने के लिए भेजा गया। उन्होंने बहुत साहस के साथ लड़ते हुए आतंकियों का सामना किया लेकिन इस मुठभेड़ में मेजर नवनीत शहीद हो गए।

13 of 16
कैप्टन रोहित कौशल - फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन रोहित कौशल: पंचकूला के रहने वाले कैप्टन रोहित कौशल ऑपरेशन रक्षक में 11 नवंबर 1995 को शहीद हुए। उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया। शहीद रोहित कौशल आर्मी की पंजाब रेजीमेंट में थे। 11 नवंबर को उनकी टुकड़ी और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी हुई थी। उस समय वे कंपनी कमाडर थे, जिन्होंने निडरता से उग्रवादियों को सामना किया तथा सीने में गोलियां लगने के बाद भी दो उग्रवादियों को ढेर कर दिया था। भारत सरकार ने उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत शौर्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

14 of 16
बिग्रेडियर बीएस शेरगिल - फोटो : फाइल फोटो
बिग्रेडियर बीएस शेरगिल: डीएवी कॉलेज के पूर्व छात्र बीएस शेरगिल सेना में बिग्रेडियर के पद पर तैनात थे। 21 अगस्त 2000 को जब सेना की एक टुकड़ी कुपवाड़ा जिले में गश्त पर थी, तभी आतंकवादियों ने आईईडी धमाके कर वाहनों को उड़ा दिया था। इसमें बिग्र्रेडियर बीएस शेरगिल शहीद हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि जिस वाहन में अधिकारी थे, उसके परखच्चे उड़ गए थे।

15 of 16
कैप्टन रिपूदमन सिंह - फोटो : फाइल फोटो
सेकेंड लेफ्टिनेंट अनिल यादव: डीएवी से पढ़े सेकेंड लेफ्टिनेंट अनिल यादव 1994 में देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। सेकेंड लेफ्टिनेंट अनिल यादव आर्मी की राजपूताना राइफल्स में थे। शहीद अनिल यादव को सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

कैप्टन रिपूदमन सिंह: राजस्थान के सवाई माधोपुर के रहने वाले कैप्टन रिपूदमन सिंह ने डीएवी कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। वे आर्मी में सेवाएं देते हुए 3 अप्रैल, 2004 को शहीद हो गए। कैप्टन रिपूदमन सिंह आर्मी की बिहार रेजीमेंट में थे। सवाई माधोपुर में प्रशासन ने उनके नाम पर गवर्मेंट कॉलेज बनाया है।
विज्ञापन

16 of 16
मेजर मनविंदर सिंह - फोटो : फाइल फोटो
मेजर मनविंदर सिंह: मेजर मनविंदर सिंह ने अपनी पढ़ाई डीएवी कॉलेज से की। वे आर्मी की रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी में थे। मेजर मनविंदर सिंह वर्ष 2000 में देश की सेवा करते करते शहीद हो गए।

ये भी शहीद हुए
स्कवाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ
फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरसिमरत सिंह ढींढसा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें