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बच्चों को विदेश भेजने से पहले सावधान, एजेंटों का 'खेल' बर्बाद कर सकता है, कई नुकसान झेलेंगे

Sat, 14 Dec 2019 11:32 AM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना चाहते हैं तो सावधान, एजेंटों के चक्कर में फंसे तो आपके साथ वो हो सकता है, जो इन सभी के साथ हुआ। दोनों तरफ से नुकसान उठाना पड़ सकता है, परेशानी होगी अलग से।
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दरअसल, यूके की आधा दर्जन यूनिवर्सिटी से तीन हजार छात्रों के गायब होने की वजह ट्रेवल एजेंटों का मायाजाल है, जिसमें फंसकर छात्रों ने 15-15 लाख रुपये तो एजेंटों को अदा कर दिए, लेकिन यूके जाकर पता चला कि उनकी फीस महज सवा लाख से लेकर तीन लाख रुपये जमा हुई, बाकी की बकाया लगभग 10 लाख रुपये फीस जेब से जमा करानी ही होगी। इससे पहले कि यूनिवर्सिटी उनको भारत वापस भेजने का प्रबंध करती, छात्र अपना बोरिया बिस्तर समेटकर खिसक गए।
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यूके गए एक छात्र ने अपना नाम न छापने की बात पर बताया कि वह एक स्टडी वीजा सेंटर पर गया था। उसको यूके की यूनिवर्सिटी, वहां की फीस और तमाम प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। एजेंट ने उसको अपने जाल में फंसा लिया और बोला कि वह सारा कुछ खुद कर देगा, वीजा के बाद 14 लाख रुपये अदा कर देना। जिसमें मेडिकल की फीस, बैंक में फंड शो करने का खर्चा, इंश्योरेंस, टिकट व यूनिवर्सिटी की फीस शामिल होगी। छात्र ने तत्काल 14 लाख रुपये के पैकेज में हामी भर दी।

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एजेंट ने तीन लाख रुपये यूनिवर्सिटी की प्राथमिक फीस अदा करके कैस लैटर (कंफर्मेशन ऑफ एक्सेप्टेंस फॉर स्टडीज) हासिल कर लिया। जिसके बाद 1.20 लाख रुपये की राशि इंश्योरेंस, 50 हजार रुपये की राशि खर्च कर बैंक के फंड शो करवाए, 50 हजार की एयर टिकट और दो हजार रुपये खर्च कर मेडिकल करवा दिया। कुल मिलकर महज 5 लाख 22 हजार खर्च किये और 14 लाख वसूल लिये। एजेंट ने करीब 9 लाख रुपये की कमाई कर जेब में डाल ली।
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छात्र का कहना है कि उसको पता ही नहीं था कि यूनिवर्सिटी की कुल फीस 12 लाख रुपये है। एजेंट ने सिर्फ तीन लाख रुपये ही अदा किए हैं और बाकी के 9 लाख बकाया उसको ही अदा करना है। यूके आकर उसको पता चला तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। वह नौ लाख रुपये तत्काल कैसे अदा कर देता। पिता ने भी कर्ज लेकर 15 लाख रुपये का जुगाड़ किया था, इसलिए यूके में अब अवैध रूप से रहना ही बेहतर, क्योंकि आगे की स्टडी के लिए फूटी कौड़ी नहीं है।
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हमारी ट्रेड बदनाम तो हो रही है, लेकिन क्या किया जाए
एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज कंसलटेंट एजुकेशन के प्रधान जसपाल सिंह व पूर्व प्रधान सुकांत त्रिवेदी का कहना है कि हमारी ट्रेड इस प्रेक्टिस से बदनाम तो हो रही है, लेकिन इसका हल कुछ भी नहीं है। निश्चित तौर पर इसका हल निकालना जरूरी हो गया है। अब इसके लिए छात्र भी जिम्मेदार है कि वह ऐसे एजेंटों के पास क्यों जाते हैं? यूके में इसको लेकर भारत की बदनामी हो रही है, इस पर दोनों ने कहा कि यूके अपना स्टडी वीजा का सिस्टम दुरुस्त भी करने जा रहा है, ऐसी खबरें आ रही हैं। इस प्रेक्टिस को सही रखना तमाम एजेंटों की जिम्मेदारी है।
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