ध्यान दें, अगर कोई आपका 10 रुपये का सिक्का लेने से मना कर रहा है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है, बस आपको करना होगा ये।
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दस रुपये का सिक्का
देशभर में 500 और 1000 के नोटबंदी की घोषणा के बीच ट्राइसिटी में 10 रुपये के नकली सिक्के के प्रचलन की चर्चा क्या फैली कि दुकानदार इसके लेनदेन से कतराने लगे हैं। इसे लेकर उनका तर्क यह है कि उन्हें असली-नकली की पहचान नहीं है, इसलिए वे इसे ले नहीं रहे हैं।
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दस रुपये का सिक्का
वहीं दूसरी ओर लोग भी इसे लेने से मना कर देते हैं। दिल्ली में 10 रुपये के नकली सिक्कों की फैक्टरी पकड़े जाने और उसके बाद सोशल मीडिया पर नकली सिक्कों का मैसेज वायरल होने के बाद दुकानदारों में संशय बना हुआ है।
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10 रुपए के सिक्के
यह है सिक्का अधिनियम
सिक्का अधिनियम 2011 के अनुसार सिक्कों का प्रचलन एक लीगल टेंडर है। कोई भी व्यक्ति अथवा सरकारी संस्था जैसे कि बैंक या अन्य तय सीमा तक किसी भी तरह के सिक्के को लेने से इंकार नहीं कर सकता है। तय सीमा में सिक्के लेने से इंकार करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई बनती है।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
- फोटो : getty image
अगर कोई दुकानदार या व्यक्ति भी इसे लेने से मना करता है तो उसकी सूचना आरबीआई या पुलिस को दें। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई बनती। वहीं बैंक भी अगर तय सीमा तक सिक्के लेने से मना करें तो उनकी भी शिकायत आरबीआई से कर सकते हैं।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
एसबीआई के एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैंकों में लोग सिक्के जमा कराने नहीं आते हैं। ऐसे में अगर उनके पास कोई ऐसा सिक्का आता है जिसे वह नकली समझते हैं तो उसके बारे में बैंक से जानकारी ले सकते हैं। लोग और दुकानदार केवल मार्केट में चल रही अफवाहों पर ही इसका लेन-देन बंद कर रहे हैं, जोकि गलत है।
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दस रुपए के दो सिक्के
सिक्के लेने बंद कर दिए
सेक्टर-42 स्थित मोबाइल रिचार्ज की दुकान चलाने वाले अशोक गोयल के अनुसार उनके पास रोजाना 1000 रुपये तक के 10-10 रुपये के सिक्के आते थे। व्हाट्सअप पर नकली सिक्के चलने का मैसेज आया तो कई दुकानदारों ने इसे लेने से मना कर दिया। इसके बाद से उन्होंने भी इसे लेने से मना कर दिया।
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दस रुपये के सिक्के
मनीमाजरा स्थित बुद्धिराजा सुपर मार्केट के मालिक ओम प्रकाश बुद्धिराजा का कहना कि कई व्यापारियों और दुकानदारों के पास 10 रुपये के सिक्कों की अच्छी-खासी संख्या है। ऐसे में दुकानदारों के सिक्के ग्राहकों द्वारा न लिए जाने पर ये सिक्के उनके पास जमा होकर बेकार हो रहे हैं।
मनाव ढाबा के संचालक बलजिंदर सिंह का कहना कि लोग तो 10 का सिक्का देखकर ही इसे लेने से इंकार कर दे रहे हैं। ऐसे में दुकानदारों की समस्या बढ़ गई है कि वह सिक्का लेकर कहां जाएं।