पंजाब विधानसभा चुनाव वोटिंग के बाद नेता और जनता सबकी नजरें 11 मार्च के नतीजों पर हैं। दिग्गजों की चर्चाओं में कयासों और अटकलों का दौर भी जोर पकड़ रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है?
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- फोटो : punjab
पंजाब में राजनैतिक विश्लेषक त्रिशंकू विधानसभा और राजनैतिक दलों को अल्पमत की संभावनाओं से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। ऐसे यह सवाल सबके मन में है कि इन हालातों में कांग्रेस, शिअद-भाजपा गठबंधन और आप की रणनीति क्या होगी। इन हालातों में अगर आंकलन किया जाए तो ये प्रमुख संभावनाएं और समीकरण बनते नजर आते हैं।
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017
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अगर त्रिशंकु विधानसभा में आप की सीटें 45 से ज्यादा रहती हैं और कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा गठबंधन 40 से कम पर सिमटते हैं तो ऐसे में भाजपा और शिअद राष्ट्रपति शासन चाहेंगे, मगर कांग्रेस इससे बचने के लिए आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन की घोषणा कर सकती है। दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार को कांग्रेस ने इस तरह से बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि ऐसी सरकार कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है।
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017
अगर त्रिशंकु विधानसभा में कांग्रेस की सीटें 50 के आसपास और आप की 45 से ज्यादा रहती हैं तो कांग्रेस के समर्थन से बनने वाली आप की सरकार को रोकने के लिए कांग्रेस को सबसे बड़ा दल होने के नाते मुद्दों पर आधारित बाहर से समर्थन की बात शिअद गठबंधन कर सकता है। ऐसी सरकार की उम्र भी ज्यादा लंबी नहीं होगी। जनाधार की लड़ाई में पानी और नशे जैसे मुद्दों पर समर्थन की बैशाखी हटाई जा सकती है।
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017
- फोटो : अमर उजाला
अगर 11 मार्च के नतीजे इस तरह पांसा फेंकते हैं कि कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन को 40-40 से ज्यादा सीटें मिलती हैं आैर आम आदमी पार्टी 30 से नीचे रह जाती हैं। ऐसे में इसकी संभावना बहुत कम हैं कि आम आदमी पार्टी किसी को समर्थन देगी। इन हालात में शिअद और भाजपा भी चाहेंगे कि राष्ट्रपति शासन लागू हो और राज्य में फिर से चुनाव करवाए जाएं।
चुनाव में यदि किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो सरकार बनाने के लिए उसका रास्ता पूरी तरह साफ होगा। इस स्थिति में उक्त राजनैतिक दल बहुमत के आधार पर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा। लेकिन अगर किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है और त्रिशंक विधानसभा की स्थिति सामने आती है तो सभी राजनैतिक दलों को अपनी सीटों के आधार पर रणनीति बनाते हुए फैसला लेना होगा। जबकि राज्य में राष्ट्रपति शासन का भी एक विकल्प खुला होगा।