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हैदराबाद एनकाउंटर पर बोलीं पंजाब की महिलाएं- चाहे कैसे भी एनकाउंटर हुआ, आरोपी इसी के काबिल थे

Fri, 06 Dec 2019 08:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना/जालंधर (पंजाब)
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- फोटो : अमर उजाला
महिला डॉक्टर से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले चार आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर की खबर के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। पंजाब के लुधियाना में लोगों में खुशी का आलम देखने को मिला। विशेषकर महिलाओं का कहना है कि चाहे कैसे भी एनकाउंटर हुआ है, लेकिन आरोपी इसी के काबिल थे। 

इस घटना के बाद आपराधिक सोच वालों के लिए मैसेज तो गया है कि उनके साथ भी ऐसा हो सकता है। केंद्र हो या राज्य सरकार उन्हें दुष्कर्म जैसे अपराध करने वाले लोगों को सरकारी मेहमान बनाने की जगह सरेआम फांसी पर लटकाना चाहिए। तभी ऐसे अपराधों पर लगाम लग सकती है। 

एक रात में करंसी बदल सकती है तो दुष्कर्मियों को फांसी क्यों नहीं
हैदराबाद पुलिस ने जो भी किया उससे खुशी मिली है। एक महिला को दुष्कर्म कर जलाकर मारने वाले आरोपियों को जीने का कोई अधिकार नहीं है। उनके साथ ऐसा ही होना चाहिए था। इस मामले में महिला डॉक्टर की मौत हो चुकी है। लेकिन मैं दुष्कर्म का दंश झेल रही हूं। सोचती हूं ऐसे मामलों में मर जाना अच्छा है। मेरे साथ दुष्कर्म हुए दस माह बीते चुके हैं, लेकिन अभी तक अदालतों के चक्कर लगा रही हूं, ताकी आरोपियों को सजा मिल सके।
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सिप्पी जोशी, बिंदिया भोला - फोटो : अमर उजाला
इस हादसे को जितना भूलना चाहती हूं, हर तारीख मुझे फिर वही घटना याद करवाती है। जिस कारण रात को सो तक नहीं पाती हूं। उन्हें यह सजा कब मिलेगी, कोई कुछ नहीं कह सकता है। हर कोई सोच सकता है कि एक पीड़िता का जीवन कैसा होगा, अदालत में जाकर बार-बार जलील होना, समाज में भी लोगों की तरह-तरह की बातें सुनना। 

इसके बाद आगे की जिंदगी में क्या-क्या सहना पड़ेगा। इसे सोच कर ही डर रही हूं। इससे तो मर जाना ही अच्छा है। सरकार को चाहिए कि अगर वह एक रात में करंसी बंद करने का फैसला ले सकती है, तो दुष्कर्मियों को फांसी के तख्ते पर लटकाने जैसे फैसले में देरी क्यों हो रही है। -इस्सेवाल दुष्कर्म पीड़िता।

जो भी हुआ अच्छा हुआ, ऐसा ही होना चाहिए

शुक्रवार को सुबह जैसे ही हैदराबाद की खबर देखी तो दिल बहुत खुश हुआ है, जो भी हुआ, अच्छा हुआ है। इस खबर में पूरे देश में एक मैसेज दिया है कि महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराध करोगे, तो अब ऐसी सजा मिल सकती है। आज निर्भया केस को सात साल बीत चुके हैं, लेकिन किसी को फांसी की सजा नहीं मिली है। इस मामले में न्यायपालिका में कुछ तेजी लाने की जरूरत है, क्योंकि एक पीड़िता के लिए हर दिन भारी होता है। वह इस समाज में कैसे रहती है, हम सिर्फ अंदाजा लगा सकते है। -मोना लाल, एग्जिक्यूटिव डॉयरेक्टर निफ्ड।
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हैदराबाद पुलिस को सैल्यूट 

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अरुणा अरोड़ा, दीपिका मल्होत्रा - फोटो : अमर उजाला
चाहे पुलिस ने दुष्कर्म आरोपियों को सेल्फ डिफेंस में गोली मारकर मौत के घाट उतारा है, लेकिन हैदराबाद पुलिस को मैं सैल्यूट करती हूं। आज पीड़ित परिवार को न्याय तो मिला, उन्हें इतना सुकून तो जरूर मिलेगा कि उनकी बेटी को मारने वालों को उसी जगह पर मौत मिली है, जहां जघन्य अपराध किया था। देश के सभी पुलिसवालों को इसी तरह काम करना चाहिए, दुष्कर्मियों को ऑन द स्पॉट सजा मिले। -दमनप्रीत कौर, छात्र, निफ्ड

एनकाउंटर फर्जी है, तो निंदनीय 
अगर पुलिस ने एक फर्जी एनकाउंटर किया है तो इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। क्योंकि ऐसा कर अगर पुलिस ही जज बन गई तो न्यायपालिका का काम क्या रहेगा। ऐसा करना मानव अधिकार का सीधे तौर पर हनन है। सरकार को चाहिए कि देश में दुष्कर्म के मामलों में आई तेजी को देखते हुए संविधान में तुरंत संशोधन कर सजा देने की प्रक्रिया को आसान बनाए। ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिले। -सिरमजीत सिंह बैंस, विधायक लिप।

ऐसा कानून हो, जिससे जल्द न्यास मिले
सरकार को चाहिए कि ऐसा ही कानून बनाए, जिससे जल्द न्याय हो। दुष्कर्म के आरोपियों को ऑन द स्पॉट सजा मिलनी चाहिए। तभी ऐसे अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा होगा। एनकाउंटर की खबर ने मुझे काफी खुशी दी है, मुझे क्या हर महिला इस खबर के बाद खुश महसूस कर रही है। सरकार को ऐसा ही कानून बनाना चाहिए। -शशी जैन, प्रिंसिपल सनमति विमल जैन स्कूल जगरावां।

अब बाकी केसों में भी देरी न हो...

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समाज सेविका दीप्ति जैन। - फोटो : अमर उजाला
महिला डॉ. से दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों को पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद चौतरफा प्रशंसा हो रही है। हर किसी के मुंह से निकल रहा है.... सैल्यूट हैदराबाद पुलिस। साथ ही सवाल उठ रहा है कि अब दुष्कर्म के बाकी केसों का फैसला जल्द होना चाहिए। आईलेट्स ट्रेनर चैरी बहल का कहना है कि ऐसे एक्शन का लंबे समय से इंतजार था। अब देश की रियल हीरो हैदराबाद पुलिस है। बस ऐसे ऑन द स्पॉट फैसले होने चाहिए, अपराधी की क्या मजाल कि वह किसी घिनौनी हरकत को अंजाम दे पाये। 

समाज सेविका पूजा पराशर का कहना है कि हैदराबाद पुलिस से बाकी राज्यों की पुलिस को सबक लेना चाहिए। दुष्कर्म के बाकी केसों का फैसला तय समय में होना चाहिए। समाज सेविका चारु ढल्ल का कहना है कि पुलिस का एक्शन काबिले तारीफ है और चंद दिन पहले असुरक्षित महसूस कर रही महिलाएं, आज सुरक्षित महसूस करने लगी हैं। अंदर इस बात की खुशी है कि दोषियों को सजा ट्रायल से पहले ही मिल गई।

कारोबारी महिला सिप्पी जोशी का कहना है कि ऐसे ही फैसले तेजी से होने चाहिए। अदालत में इंसाफ इतना लंबा खिच जाता है कि शिकायतकर्ता टूट जाता है। इसलिए ऐसे केसों में सजा कम हो पाती है। सरकार को भी चाहिए कि जितने केस पेंडिंग हैं, उनका फैसला अब जल्द से जल्द कर दिया जाए। समाज सेविका दीप्ति जैन का कहना है कि दिल में आज गजब की खुशी है। पहली बार जिंदगी में ऐसा इंसाफ देखा है। कम से कम महिला डॉ. की आत्मा को शांति जरूर मिली होगी। दिल में सुकून है कि इंसाफ ऑन द स्पॉट मिला।
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रिटायर एसपी सुदेश अग्निहोत्री, नरेश कुमार शर्मा - फोटो : अमर उजाला
पार्षद अरुणा अरोड़ा का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार को यकीनी बनानी चाहिए। हैदराबाद पुलिस के एक्शन से अब दरिंदों के बीच खौफ जरूर पैदा हो गया होगा। ऐसे लोग तो समाज में रहने के काबिल ही नहीं है। कारोबारी दीपिका मल्होत्रा का कहना है कि अब देश बदल चुका है, महिलाएं पुरुषों का मुकाबला कर रही हैं, लेकिन उनके साथ दरिंदगी करने वालों का अंजाम इससे भी बुरा होना चाहिए। कम से कम आज महिलाओं को यह तो लगने लगा है कि पुलिस उनके साथ खड़ी है।

भाजपा नेता सुमन सहगल का कहना है कि वेलडन हैदराबाद पुलिस। जितने शब्द तारीफ में बोलूंगी उतने कम है। महिलाओं के साथ संगीन अपराध करने वालों को ऐसे ही ऑन द स्पॉट सजा मिलनी चाहिए। घरेलू महिला बिंदिया भोला का कहना है कि इससे अच्छा फैसला क्या हो सकता है? अदालतों में इंसाफ कैसे मिलता है, सबको पता है। अभी तक निर्भया केस के आरोपी सांस ले रहे हैं। अदालतों में उसके परिवार वाले चक्कर काटकर थक चुके हैं। कामकाजी महिला शैली चोपड़ा का कहना है कि अच्छा हुआ, हैदाबाद पुलिस ने चारों को मार डाला। वहशी थे और समाज की गंदगी थे। 
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शैली चोपड़ा। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब पुलिस के रिटायर अधिकारी बोले-पुलिस का खौफ जरूरी
दुष्कर्म व हत्या के मामले में आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराने की कार्रवाई पर पंजाब पुलिस के रिटायर अधिकारियों का एक सुर में कहना है कि पुलिस का खौफ बरकरार रहना जरूरी है। अपराध व अपराधियों के खिलाफ उचित व ठोस कार्रवाई की जरूरत है, ताकि अपराध करने से पहले अपराधी थर थर कांपे।

पद्मश्री व रिटायर आईजी करतार सिंह का कहना है कि हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई प्रशंसनीय है। देश में महिलाओं के साथ अपराध करने वालों को कठोरता के साथ निपटना होगा और ठोस एक्शन जरूरी है। रिटायर आईपीएस अधिकारी पवन कुमार उप्पल का कहना है कि पुलिस का उचित एक्शन जरूरी है ताकि अपराध पर नकेल कसी जा सके। अपराधियों में खाकी का खौफ जरूर बरकरार रहना चाहिए तभी कानून व्यवस्था सुचारु रूप से ठीक रह सकेगी।

रिटायर एसपी सुदेश अग्निहोत्री का कहना है कि पुलिस की आलोचना अकसर होती है, लेकिन शाबाशी कम ही मिलती है। पुलिस के ऐसे ठोस एक्शन जरूरी हैं कि अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। अगर खाकी का खौफ कम हो गया तो अपराधी जनता व आम लोगों का जीना हराम कर देंगे। रिटायर एसपी नरेश कुमार शर्मा का कहना है कि पुलिस को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए कि लोग घिनौने अपराध से पहले थर थर कांपें। अब बाहरी कई देशों में चोरी की सजा में हाथ काटने तक का प्रावधान है, वहां पर चोरी नहीं होती। देश में सख्त कानून व पुलिस के ठोस एक्शन की जरूरत है।
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