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जानलेवा बारिश, बेइमान मौसम...और मर रहा किसान

Thu, 16 Apr 2015 04:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी फसल के बर्बाद होने का सिलसिला जारी है। इससे किसान तो तबाह हुआ ही है, लोगों को भी अनाज की चिंता सताने लगी है। तस्वीरों में देखिए तबाही का मंजर। रिपोर्टः प्रवीण पांडेय
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जानलेवा बारिश, बेइमान मौसम...और मर रहा किसान

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बेमौसम बारिश न केवल किसानों और लोगों के लिए, बल्कि सरकार के लिए यह बेमौसम बारिश परेशानी का सबब बन गई है। मार्च के महीने में तो बारिश ने कहर ढाया ही, अप्रैल में भी इससे निजात नहीं मिली है।
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कल शाम से हरियाणा में बारिश हो रही है। इसने किसानों की थोड़ी बहुत बची उम्मीद पर भी पानी फेर दिया। हालिया स्थिति देखें तो फतेहाबाद में रात हुई तेज बारिश से पक्की हुई खड़ी गेंहू और सरसों की फसल तबाह हो गई। मंडियों में पड़ा गेंहू भी नम पड़ गया है, जिसके चलते गेंहू की खरीद में देरी होगी। इससे किसानों की मुसीबतें और बढ़ेंगी।

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दूसरी ओर, राज्य में भाजपा सरकार के लिए संकट की इस घड़ी में जल्द से जल्द मुआवजा देने चुनौती है। हालांकि आमतौर पर मुआवजे में एक साल तक का समय लग जाता है, फिर भी इस बार सरकार ने वादा किया है कि 15 अप्रैल तक गिरदावरी का काम पूरा हो जाएगा और एक मई तक मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा।
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फिलहाल नुकसान का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि आमतौर पर हरियाणा में प्रति वर्ष करीब 100 करोड़ का नुकसान होता था। इस बार मुआवजे की यह राशि 400 से 500 करोड़ तक पहुंच सकती है।
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अब सरकार के सामने सवाल यह है कि 15 मई से पहले मुआवजे की राशि बांटने की कवायद को भला कैसे अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश में विशेष गिरदावरी तो करवा दी है, मगर उसकी रिपोर्ट कंपाइल होनी बाकी है।
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उम्मीद है कि 19 से 20 अप्रैल तक गिरदावरी की अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री की टेबल पर पहुंच जाएगी। इसके बाद 15 मई तक मुआवजा वितरित कर दिया जाएगा।

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मुआवजे के लिए प्रदेश सरकार ने एचसीएस श्रेणी-प्रथम के वरिष्ठ अधिकारियों की समिति का गठन किया है। यह समिति यह राहत राशि वितरित करेगी। गिरदावरी और विशेष गिरदावरी तथा राहत वितरण की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए मुख्यालय पर आपातकालीन व नियंत्रण कक्ष भी शुरू किए गए हैं।

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हरियाणा सरकार ने राहत के वर्तमान मानदंडों को बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। नए मानदंडों के आधार पर देय राशि की गणना की जाएगी। 76 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच गेहूं की फसल के नुकसान होने पर 12000 रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। इससे पूर्व यह केवल 10 हजार रुपये प्रति एकड़ दी जाती थी।
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इसी प्रकार, 51 से 75 प्रतिशत के बीच गेहूं की फसल के नुकसान पर इससे पूर्व दी जाने वाली 7500 रुपये की स्वीकृत राशि के प्रति 9500 रुपये की राशि दी जाएगी। 26 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच के नुकसान के लिए 5000 रुपये के स्थान पर 7000 रुपये की राशि दी जाएगी।
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