शाहजादपुर-साहा मुख्य मार्ग पर हुए हादसे की टीस घायलों को जिंदगी भर महसूस होगी। किसी ने दोस्त खो दिया तो किसी ने शिक्षक। हादसे की रात घायलों को यह मंजर दिखता रहा और दोस्तों को याद करते रहे। एसआरएम व देवी दयाल कॉलेज का स्टाफ घायलों और मृतकों का सामान लेने के लिए कैंट के सिविल अस्पताल पहुंचा।
'आंख खुली तो न मेरे दोस्त जिंदा थे..न शिक्षक'
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घायल योगेश ने कहा कि वह रोजाना की तरह गहरे दोस्तों के साथ हंसी व खुशी से बस में सवार होकर कालेज जा रहा था। वह बस में चालक के पीछे चौथी सीट पर दोस्तों के पीछे बैठा था। लेकिन उसे क्या पता था कि दोस्तों से आखिरी मुलाकात होगी। वह बैग से हैडफोन निकालकर गाना सुनता हुआ सो गया था। इसके बाद जब आंख खुली तो वह मिट्टी के ढेर में दबा था। यह मंजर उसे पूरी जिंदगी याद रहेगा, जबकि उसने दोस्तों को खो दिया।
'आंख खुली तो न मेरे दोस्त जिंदा थे..न शिक्षक'
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बस चालक पवन ने बताया कि रातभर इस हादसे का खौफ उसके दिलोदिमाग पर छाया रहा। उसे यकीन नहीं हो रहा कि जिनको वह रोजाना बस में बिठाकर लाता था, उनमें से कुछ चेहरे अब नहीं दिखेंगे। यह हादसा ऐसा था, जिसे मैं याद नहीं करना चाहता, लेकिन फिर भी यह हादसा जिंदगी भर टीस देता रहेगा।
'आंख खुली तो न मेरे दोस्त जिंदा थे..न शिक्षक'
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अस्पताल में दाखिल घायलों व हादसे में मारे गए लोगों का सामान इकट्ठा करने के लिए संस्थान का स्टाफ सिविल अस्पताल पहुंचा। खून से लथपथ यह सामान देखकर स्टाफ की आंखें भी भर आईं। यह सारा सामान अस्पताल के स्टोर रूम में रखा हुआ था।
'आंख खुली तो न मेरे दोस्त जिंदा थे..न शिक्षक'
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अस्पताल में दाखिल गांव बब्याल निवासी सतीश ने बताया कि बेशक सिविल अस्पताल में प्रशासन ने काफी तेजी दिखाई है, लेकिन हालात ज्यादा सही नहीं हैं। वह गंभीर घायल था, लेकिन प्राथमिक उपचार देने के बाद केवल वार्ड में भेज दिया गया। इसी कारण वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराएगा।
हादसे का शिकार हुए अंकित गुप्ता का कैंट में अंतिम संस्कार कर दिया। इस हादसे के शिकार हुए दो अन्य का अंतिम संस्कार मंगलवार देर सायं कर दिया था। बुधवार को श्मशान घाट में अंकित गुप्ता के अंतिम संस्कार में काफी संख्या में लोग पहुंचे। हर किसी की आंख में आंसू दिखाई दिए।