हनीप्रीत ने कबूल लिया कि पंचकूला उसी ने जलाया था। ये भी बताया कि उसने राम रहीम को भगाने की साजिश कैसे रची और उसकी प्लानिंग क्या थी।
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हनीप्रीत के साथ राम रहीम
देश का नाम विश्व मानचित्र से मिटाना चाहती थी
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, हनीप्रीत ने साजिश रची, क्योंकि वह राम रहीम को जेल भेजने का बदला लेना चाहती थी। दूसरा, उसने भारत को विश्व के मानचित्र से मिटाने की कसम खाई थी। इस साजिश में डॉ. आदित्य इंसां समेत देशद्रोह मामले के सभी आरोपी शामिल थे। हनीप्रीत विदेश में बसकर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होकर भारत का नाम मिटाना चाहती थी। खुद को देशप्रेमी कहने वाले गुरमीत और हनीप्रीत के खुलासे ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
ऐसे बनाया था हिंसा का प्लान
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, साजिश को अंजाम देने के लिए हनीप्रीत ने 17 अगस्त को ही तैयारी कर ली थी। इसके लिए एक बैठक बुलवा कर डेरे के बड़े कारिंदों की बकायदा ड्यूटी लगाई गई थी, जिसमें किराए पर गुंडे लाने की जिम्मेवारी पंचकूला के डेरा इंचार्ज चमकौर सिंह को सौंपी गई थी।
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Ram rahim
सिरसा में हुई थी बैठक
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, साजिश के तहत लोगों की ड्यूटियां लगाने के बाद प्लान बनाया गया कि गुरमीत राम रहीम को कस्टडी से छुड़वाकर उसके साथ नेपाल के रास्ते विदेश भाग जाऊंगी। इसी योजना के तहत मैं अपना और पिताजी का पासपोर्ट, डेरा गोपनीय, प्रॉपर्टी के दस्तावेज, कई बैंक्स की चेक बुक और क्रेडिट कार्ड लेकर साथ आई थी। ये सारा सामान एक अटैची में रखा था, जो 25 अगस्त को भी साथ थी और उसी कार में रखा गया था, जिसमें गुरमीत राम रहीम को पंचकूला लाया जा रहा था।
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Ram Rahim
राम रहीम को फरार कराने के लिए किया था इशारा
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, डेरा प्रमुख को दोषी करार दिए जाने के बाद एक हनप्रीत ने गर्दन हिलाते हुए पीए राकेश को इशारा किया, जिसका मतलब हिंसा भड़काने के लिए तैयार रहने का निर्देश था। डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश रची गई थी, जिसमें पीए राकेश और बबलू भी शामिल था। इस प्लानिंग के तहत पुलिस, प्रशासन, सरकार, मीडिया मुख्य तौर पर निशाने पर थे, जबकि आम लोग भी हिंसा के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुए। जबकि जिस मकसद से साजिश रची गई, वो पूरा भी नहीं हो पाया था।
पुलिस की एक रणनीति के कारण कामयाब नहीं हुआ प्लान
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, बाबा को भगाने और उनके साथ विदेश बसने का हनीप्रीत का प्लान कामयाब नहीं हो पाया, क्योंकि पुलिस ने बाबा को हेलीकॉप्टर के जरिए रोहतक जेल ले जाने की तैयारी कर ली थी। इसलिए राम रहीम के सुरक्षाकर्मियों को उन्हें भगाने का मौका नहीं मिला और प्लान फेल हो गया। हनीप्रीत को 25 अगस्त की ही डेरा लौटना पड़ा। 27 अगस्त को एक अटैची लेकर जयपुर को रवाना हुई। उससे पहले उसने अपना लैपटॉप और एप्पल मोबाइल फोनन विपसना इंसा को सौंपा दिया था।