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पढ़िए, हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी 7 बेहद जरूरी जानकारियां

Sun, 03 May 2015 05:14 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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क्या आप हेल्थ इंश्योरेंस लेने जा रहे हैं? अगर हां तो पहले ये 8 बातें जरूर जान लें। फायदे में रहेंगे। देखिए तस्वीरें और जानिए अहम जानकारी।
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आयकर अधिनियम की धारा 80 डी के तहत व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता स्वयं, पति/पत्नी एवं बच्चों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के सालाना प्रीमियम पर अधिकतम रु. 15000 (सीनियर सिटीजन की दशा में रु 20000) तक की आय से छूट प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही माता-पिता की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के सालाना प्रीमियम पर भी अधिकतम रु. 15000 (सीनियर सिटीजन की दशा में रु 20000) तक की आय से अतिरिक्त छूट प्राप्त की जा सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से आप टैक्स बचत के साथ-साथ परिवार को स्वास्थ्य रक्षा भी प्रदान कर सकते हैं।
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लोग यह सोचकर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं लेते हैं कि हम स्वस्थ हैं, हमें मेडिक्लेम की क्या जरूत है, लेकिन वे नहीं जानते कि इंश्योरेंस हमेशा अनिश्चित घटनाओं का होता है। हगर हम बीमारी का शिकार हो गए हैं तो हमें मेडिक्लेम पॉलिसी नहीं मिल पाएगी या फिर मिल भी जाती है, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 3 से 4 वर्ष तक उस बीमारी से संबंधित क्लेम नहीं मिल पाता है। साथ ही दुर्घटनाओं पर किसी का बस नहीं होता है। इसलिए स्वस्थ रहने के दौरान ही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेने चाहिए।

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मेडिकल साइंस के कारण आज अधिकांश बीमारियों एवं दुर्घटनाओं का इलाज तो संभव हो गया है, परंतु इनके उपचार का खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। इन खर्चों की पूर्ति के लिए हमारे पास दो विकल्प हैं या तो हम उपचार पर खर्च होने वाली राशि की व्यवस्था करके रखें या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले लें। लेकिन बीमारियों एवं दुर्घटनाओं की अनिश्चितता के कारण उचित राशि का निर्धारण कर उस राशि की व्यवस्था कर पाना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं हो पाता है। अतः हमें दूसरा विकल्प चुनकर बढ़ी हुई मेडिक्लेम कास्ट को ध्यान में रखकर कम से कम 3 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस ले लेना चाहिए।
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जीवन बीमा कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही पॉलिसी कंपनसेशन पर आधारित होती हैं। इनके तहत हॉस्पिटलाइजेशन-केश बेनीफिट (एचसीबी) एवं मेजर सर्जिकल बेनिफिट (एमएसबी) उपलब्ध होते हैं। इनमें लिए गए सम एश्योर्ड के अनुसार, सामान्यतः 48 घंटे से अधिक हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में निश्चित राशि का एचसीबी अदा किया जाता है। सर्जरी की दशा में पॉलिसी की शर्तों के अनुसार एमएसबी दिया जाता है। इसका वास्तविक इलाज की राशि से कोई संबंध नहीं होता है। साथ ही इस तरह की पॉलिसी में एक हिस्सा निवेश पर भी जाता है। इसमें प्रीमियम लोकेशन चार्जेस, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेस आदि भी अदा करने होते हैं।
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साधारण बीमा कंपनियों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को मेडिक्लेम भी कहा जाता है। यह पॉलिसी रियेम्बर्समेंट के सिद्धांत पर काम करती है। इस तरह की पॉलिसी में 24 घंटे या उससे अधिक हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में इलाज खर्चों का भुगतान पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा-धन की सीमा तक किया जाता है। सामान्यतः हॉस्पिटलाइजेशन के 30-60 दिन पूर्व एवं 30-60 दिन के बाद के खर्चों का भी भुगतान इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया जाता है। इसमें जीवन बीमा कंपनी द्वारा उपलब्ध पॉलिसी के मुकाबले कम प्रीमियम होता है एवं इलाज खर्च के अनुसार भुगतान प्राप्त हो जाता है। अतः जीवन बीमा के हेल्थ इंश्योरेंस के बजाए साधारण बीमा कंपनियों द्वारा उपलब्ध हेल्थ इंश्योरेंस (मेडिक्लेम पॉलिसी) बेहतर होती है। बाजार में दो प्रकार की मेडिक्लेम पॉलिसियाँ व्यक्तिगत एवं फ्लोटर उपलब्ध हैं।
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उपयुक्त मेडिक्लेम पॉलिसी का चयन करते समय विभिन्ना पॉलिसियों के तहत उपलब्ध फायदों एवं अपवादों जैसे प्रीमियम, क्लेम सैटेलमेंट प्रक्रिया, कैशलेस फेसिलिटी, हॉस्पिटल नेटवर्क टाई-अप, अधिकतम बीमाधन की उपलब्धता, बीमाधन को बढ़वाने की शर्त, पॉलिसी लेने की न्यूनतम व अधिकतम उम्र, पॉलिसी रिन्यू कराने की अधिकतम आयु, हॉस्पिटलाइजेशन, प्री-हॉस्पिटलाइजेशन एवं पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन बेनीफिट, रूम रेंट, को-पेमेंट चार्जेस, डे केयर, डॉमिन्साइल ट्रीटमेंट, पूर्व से मौजूद बीमारी का कवरेज, विभिन्ना बीमारियाँ जो कवर नहीं होंगी अथवा कुछ वर्षों बाद कवर होने वाली बीमारियाँ, नो-क्लेम बोनस, नो-क्लेम डिस्काउंट अथवा कोई ऐसे खर्च, जिनकी सीमा निर्धारित की गई हो आदि की जानकारी ले लेना चाहिए।
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मेडिक्लेम पॉलिसी के क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों के आ जाने से नित नई पॉलिसियाँ लांच की जा रही हैं एवं मौजूदा पॉलिसियों में भी समय-समय पर परिवर्तन किया जा रहा है, अतः यह भी आवश्यक है कि हम समय-समय पर अपनी मेडिक्लेम पॉलिसी को रिव्यू करते रहें। यदि आप अपनी पॉलिसी एक इंश्योरेंस कंपनी से दूसरी पर शिफ्ट करने की योजना बना रहे हैं तो यह जान लेना चाहिए कि नई पॉलिसी में रोल ओवर बेनीफिट उपलब्ध है या नहीं।
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