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बाजार में बर्तन बेचने को मजबूर है महिला कबड्डी टीम की कप्तान, आखिर क्यों?

Wed, 03 Aug 2016 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी
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women kabaddi team captain nirmala
खेल के दम पर महिला कबड्डी टीम की कप्तान तो बन गई, लेकिन बेचारी को दिनभर सड़क किनारे बैठकर मिट्टी के बर्तन और खिलौने बेचने पड़े रहे हैं। देखिए क्यों?
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kabaddi team captain nirmala
बात हो रही है हरियाणा महिला कबड्डी टीम की कप्तान निर्मला पूरी की। चरखी दादरी के प्रजापति मोहल्ले में रहने वाली के पास इतने पैसे भी नहीं है कि वह तमिलनाडु में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व कर सके। लेकिन,वह 24 अगस्त को तमिलनाडु जा पाएगी, इसका उसे भरोसा नहीं है। कारण, तमिलनाडु जाना, वहां रहना, एंट्री फीस आदि का खर्चा वहन करने में उसका परिवार सक्षम नहीं है।
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kabaddi team captain nirmala
आर्थिक तंगी के कारण ही वह सोनीपत में हो रही स्टेट रूरल महिला कबड्डी प्रतियोगिता में भी नहीं हिस्सा ले पाई। बता दें कि निर्मला ने पिछले दिनों शानदार प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र में हुए छठे इंडियन रूरल गेम्स में हरियाणा टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश को स्वर्ण पदक दिलाया था। निर्मला के पिता फलों की रेहड़ी लगाते हैं तो मां रोज गार्डन के पास फुटपाथ पर मिट्टी के बर्तन बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।

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women kabaddi team captain nirmala
कप्तान निर्मला ने कहा कि एक तरफ तो सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग वाले खिलाडिय़ों को पदक जीतने से पहले ही लाखों रुपये की इनामी राशि देती है, वहीं दूसरे राज्यों में हो रही राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाडिय़ों को टिकट व एंट्री फीस तक की व्यवस्था भी नहीं करती। पिछले दिनों महाराष्ट्र में हुई प्रतियोगिता में उनकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रतियोगिता में शामिल महिला खिलाडिय़ों से पांच-पांच हजार रुपये एंट्री फीस ली गई थी।
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कप्तान निर्मला ने कहा कि एक तरफ तो सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग वाले खिलाडिय़ों को पदक जीतने से पहले ही लाखों रुपये की इनामी राशि देती है, वहीं दूसरे राज्यों में हो रही राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाडिय़ों को टिकट व एंट्री फीस तक की व्यवस्था भी नहीं करती। पिछले दिनों महाराष्ट्र में हुई प्रतियोगिता में उनकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रतियोगिता में शामिल महिला खिलाडिय़ों से पांच-पांच हजार रुपये एंट्री फीस ली गई थी। 
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