आईटीबीपी
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बच्चों को आने-ला, गलवां, ससोमा, सिरिजाप, चिप चाप, सासेर, चार्डिंग, रेजांग, दौलत, सुल्तान-चुस्कू, इमिस, रांगो, युला, मुखपरी, चुंग थुंग, खार्दुंगी और श्योक नाम दिया गया है। पहली बार आईटीबीपी ने अपने श्वानों को देसी नाम दिया है। अब तक इन्हें सीजर, ओलगा, एलिजाबेथ, बेट्टी, लीजा जैसे नाम से होते थे। आईटीबीपी ने तय किया है कि आगे श्वानों का नाम कराकोरम दर्रे से जचेप दर्रे तक 3,488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा के प्रसिद्ध स्थानों के नाम पर रखा जाएगा।