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ITBP श्वानों को मिली देसी पहचान...17 बच्चों को मिले रेजांग, गलवां जैसे नाम, वजह जान करोगे सलाम

Thu, 31 Dec 2020 01:56 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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आईटीबीपी ने अपने श्वानों का किया नामकरण। - फोटो : ANI
चीन सीमा पर देश की रक्षा में तैनात आईटीबीपी ने अपने श्वानों का नामकरण किया है। इस बार इन 17 श्वानों को देसी नाम दिए गए हैं। ये सभी नाम लद्दाख के स्थानों पर हैं। इससे पहले इन्हें पश्चिमी नाम दिए जाते थे। किसी का नाम गलवां तो किसी का नाम सासवां और किसी का दौलत और चुंगथांग और चिपचौप रखा गया है। इसके पीछे की वजह जान आप भी आईटीबीपी को सलाम करोगे।
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आईटीबीपी - फोटो : ANI
ये श्वान आईटीबीवी के के-9 विंग के हैं। नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग एंड एनीमल और बेसिक ट्रेनिंग सेंटर पंचकूला में इनका नामकरण किया गया। बेल्जियन मेलीनाय ब्रीड के इन श्वानों के लिए ब्रीडिंग पंचकूला में आईटीबीपी के इसी सेंटर में की गई थी। खास तैयारी के बाद इनकी ब्रीडिंग करवाई गई। इनके  पिता ‘गाला’ और मां ‘ओलगा’ और ‘ओलिशिया’ हैं जो कि कुछ समय पहले छत्तीगढ़ में तैनात थीं। 
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आईटीबीपी - फोटो : ANI
नामकरण सेरेमनी के दौरान इन श्वानों के गले में उनके नाम के पट्टे डाले गए और उसके साथ ही तलवार से छुआ गया। तलवार से छूने का अर्थ यह है कि इन्हें अब आईटीबीपी की इकाई में शामिल कर लिया गया है। सभी को नाम डीआईजी वेटनरी आईटीबीपी सुधाकर नटराजन ने दिया है। 

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आईटीबीपी - फोटो : ANI
उन्होंने बताया कि इन सभी श्वानों के नाम चीन सीमा पर स्थित पोस्ट के नाम पर रखे गए हैं। ये वह पोस्ट हैं जो नौ हजार फीट से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। यहां तैनात आईटीबीपी के जवानों को सम्मान देने के उद्देश्य से के-9 टीम के इन सदस्यों को यह नाम दिए गए हैं।आईटीबीपी के एक अधिकारी ने बताया कि इन श्वानों को अब ट्रेनिंग दी जाएगी और उसके बाद उनकी तैनाती बड़े होने पर अलग अलग जगह की जाएगी।
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आईटीबीपी - फोटो : ANI
बच्चों को आने-ला, गलवां, ससोमा, सिरिजाप, चिप चाप, सासेर, चार्डिंग, रेजांग, दौलत, सुल्तान-चुस्कू, इमिस, रांगो, युला, मुखपरी, चुंग थुंग, खार्दुंगी और श्योक नाम दिया गया है। पहली बार आईटीबीपी ने अपने श्वानों को देसी नाम दिया है। अब तक इन्हें सीजर, ओलगा, एलिजाबेथ, बेट्टी, लीजा जैसे नाम से होते थे। आईटीबीपी ने तय किया है कि आगे श्वानों का नाम कराकोरम दर्रे से जचेप दर्रे तक 3,488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा के प्रसिद्ध स्थानों के नाम पर रखा जाएगा।
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