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ये होती है हौसलों की उड़ान, हादसे से नहीं मानी हार, मजदूर बाप की बेटी बॉक्सरों की खेप कर रही तैयार

Mon, 02 Nov 2020 10:20 AM IST
ajay kumar उमेश भार्गव, अमर उजाला, अंबाला (हरियाणा)
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मुक्केबाज सोनिया। - फोटो : अमर उजाला
हौसले के तरकश में कोशिश का तीर जिंदा रख, हार जा चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की वो उम्मीद जिंदा रख। हरियाणा के अंबाला के गोवर्धन नगर में रहने वाली सोनिया रॉय के लिए ही शायद यह पंक्ति लिखी गई है। मंजिल दूर थी। पग-पग पर कांटे की सेज बिछी थी पर बेटी ने उम्मीद को मरने नहीं दिया। न केवल रिंग में उतरी बल्कि इस तरह पंच बरसाए कि फिर कोई उसके सामने न टिक सका। कुछ ऐसी ही कहानी है मुक्केबाज सोनिया रानी की।
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- फोटो : अमर उजाला
सोनिया रॉय का छोटा भाई राहुल 8वीं में पढ़ता था और सोनिया 9वीं में थी। भाई को मुक्केबाजी करते देख सोनिया ने मन ही मन मुक्केबाज बनने की ठान ली । बस इसके बाद सोनिया के पंच कभी नहीं रूके। भाई राहुल स्टेट चैंपियन ही बन सका लेकिन सोनिया की जिद तो पूरे हिंदुस्तान में धाक जमाने की थी और वर्ष 2015-16 में आल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीतकर यह सपना भी पूरा कर लिया। दो बहनें और एक छोटा भाई, ऊपर से तीनों की पढ़ाई। परिवार का गुजर-बसर बड़ी मुश्किल से चल रहा था। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली सोनिया ने इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी।
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- फोटो : अमर उजाला
अंबाला शहर के राजकीय प्रेम नगर सीसे स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद शहर के राजकीय महिला कॉलेज से 2017 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान खेल के लिए शरीर पर ध्यान रखना सबसे जरूरी था। क्योंकि यदि खाना सही नहीं होगा तो शरीर जवाब दे जाएगा। कोच पूनम की यह बात ध्यान में रखते हुए सोनिया ने पढ़ते-पढ़ते कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब एक दुकान पर की। इसके बाद वहां से नौकरी चली गई तो फोटोस्टेट की दुकान पर मशीन चलाने का काम करने लगीं। इस तरह इससे अपना-गुजर-बसर और पढ़ाई का खर्च निकाला।

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अपनी कोच के साथ सोनिया। - फोटो : अमर उजाला
सोनिया की जिंदगी में मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही थी। वर्ष 2016 में एक हादसे में टांग का लीगामेंट टूट गया। गरीबी के चलते कई जगह धक्के खाए और अंत में चंडीगढ़ के सेक्टर- 32 स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाया। एक साल रिकवरी में लगा। बेशक ठीक हो गईं लेकिन 100 प्रतिशत ठीक नहीं हो सकीं। इतने सब के बावजूद सोनिया की उम्मीद जिंदा रही। 2018 में सोनिया को गुरूग्राम की सक्षम संस्था ने बॉक्सिंग कोच के तौर पर मौका दिया। वहां करीब 100 बच्चों को कोचिंग दी। वहां से अब ऊना के हंबोली गांव से एक संस्था ने बतौर कोच सोनिया को रख लिया। अब यहां 60 बच्चों के बैच को सोनिया तैयार कर रही हैं।
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मुक्केबाज सोनिया। - फोटो : अमर उजाला
उपलब्धियां-
  • राजकीय महिला कॉलेज में 2013 से 15 तक बेस्ट एथलीट चुनी गईं।
  • एलपीयू में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक  2015-16 जीता।
  • 2014 में 16 हरियाणा में स्वर्ण पदक ।
  • खेल महाकुंभ में 2018 में भागीदारी।
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