जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए मेजर सतीश दहिया शहीद हो गए। जानिए इस वीर सपूत की जिंदगी के बारे में सब कुछ।
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मेजर सतीश दहिया
हरियाणा में नारनौल के रहने वाले 32 वर्षीय मेजर सतीश दहिया मंगलवार शाम को हुई मुठभेड़ में घायल हो गए थे। उन्हें श्रीनगर के बेस अस्पताल लाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हमले में सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के कमांडिंग अफसर चेतन कुमार चीता समेत 10 जवान जख्मी हुए हैं। इनमें से भी दो की मौत हो गई है। वहीं, चार आतंकियों को मार गिराया गया है।
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हंदवाड़ा मुठभेड़
नांगल चौधरी खंड के गाव बनिहाड़ी निवासी शहीद मेजर सतीश दहिया हंदवाड़ा ऑपरेशन को लीड कर रहे थे और वे 13 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। वे सात साल पहले सेना में शामिल हुए थे। वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। गांव में मेजर के शहीद होने का समाचार मिलते ही मातम पसर गया। पहले घायल होने खबर आई और मंगलवार शाम को ही उनकी मौत की खबर आई।
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हंदवाड़ा मुठभेड़
खबर मिलते ही घर में चीख पुकार मच गई। मां बाप और पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। बुधवार सुबह गांव बनिहाड़ी समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग उनके घर पहुंच गए। शहीद मेजर सतीश दहिया के अपने पीछे तीन साल की मासूम बच्ची प्रिया को छोड़ गए। सतीश के पिता 62 वर्षीय अचल सिंह मोदी नगर में पहले व्यापार करते थे। वहीं अब वे अपनी पत्नी अनीता देवी के साथ गांव में ही रह रहे थे। शहीद मेजर की पत्नी व बेटी भी गांव में ही रहती हैं।
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मेजर सतीश दहिया
शहीद सतीश दहिया ने प्रारंभिक शिक्षा बनिहाड़ी के राजकीय स्कूल से की। वहीं दस जमा दो की शिक्षा उन्होंने उत्तर प्रदेश के मोदी नगर से प्राप्त की। इसके बाद शहीद ने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से एमए अंग्रेजी विषय में की। 2008 में बतौर कमीशन वे सेना में लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुए। सेना द्वारा उन्हें 2009 में बहादुरी पुरस्कार भी दिया गया। फरवरी 2011 में उनकी शादी सुजाता चौधरी के साथ हुई, जो एक घरेलू महिला हैं। 2012 में प्रमोशन पाकर वे मेजर बने।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंगलवार की शाम कुपवाड़ा के हंदवाड़ा इलाके में आतंकियों के होने की सूचना मिली। इसके बाद सेना की 30 आरआर टुकड़ी और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिल कर इलाके की घेराबंदी की। इस दौरान आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में तीन आतंकवादी मारे गये। गंभीर रूप से घायल मेजर को अस्पताल लाया गया, जहां वे जिंदगी की जंग हार गये। शहीद जवानों में एक उत्तराखंड और एक उत्तर प्रदेश निवासी है।