'सरकार बेटी बचाने-बेटी पढ़ाने का नारा देती है। लेकिन सरकार के राज में स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं के रास्ते में शराब ठेके भी खुलवा देती है।'
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रेवाड़ी
- फोटो : SELF
ये शब्द हरियाणा के रेवाड़ी की छात्रा सरिता के हैं, जो अन्य छात्रों के साथ हड़ताल पर बैठी थी। गोठड़ा ठप्पा डहीना के अपग्रेड स्कूल में शुक्रवार से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई शुरू हो गई। गांव की 13 बेटियों के अनशन के बाद सातवें दिन बुधवार को राजकीय हाई स्कूल को अपग्रेड कर 12वीं का दर्जा देने का नोटिफिकेशन जारी हुआ था। फैकल्टी पूरी नहीं होने के कारण औपचारिक कक्षाएं लग रही हैं।
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rewari strike
वर्तमान में दस बेटियों समेत बीस बच्चों ने इस सत्र के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू कर दी है। अमर उजाला संवाददाता ने गोठड़ा ठप्पा डहीना स्कूल का दौरा कर छात्राओं से बातचीत की। छात्राओं का कहना है कि गोठड़ा ठप्पा डहीना गांव की बच्चियों ने तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव कंवाली के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से आते और जाते समय छेड़खानी की शिकायत कर स्कूल अपग्रेड करने की मांग की थी।
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अनशन करती छात्राएं, सीएम मनोहर लाल
शुक्रवार को गांव के स्कूल में एक कक्षा में मुश्किल से 20 बच्चे थे। स्कूल के प्रधानाचार्य सतीश कुमार 11वीं के बच्चों को पढ़ा रहे थे। इनमें से बेटियों की संख्या महज पांच ही थी। बच्चों की कम संख्या के बारे में उनका कहना था कि करीब पांच स्टूडेंट्स और थीं। वे मध्यावकाश से चली गई हैं।
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rewari strike
समस्याओं के निस्तारण के लिए बीईओ को लिखा पत्र
स्कूल के प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने बताया कि स्कूल अपग्रेड होने के बाद अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम के बच्चों को दाखिला देना है या नहीं। इसके अलावा अपग्रेड होने की स्थिति में स्कूल में पहले साल 11वीं कक्षा तक ही पढ़ाई होती है। इस मामले में क्या किया जाएगा। प्रधानाचार्य ने समस्याओं के निस्तारण के लिए पत्र लिखा है।
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rewari strike
बेटियां बोलीं: रास्ते में थी दिक्कत, मजबूरी थी अनशन
गोठड़ा स्कूल में ही 10वीं कक्षा की पढ़ाई की थी। परीक्षा होने के बाद कंवाली स्कूल में ही एडमिशन होना था। रास्ते में पड़ने वाले शराब ठेके के पास होने वाली बदतमीजी सबको मालूम थी। इस कारण अन्य छात्राओं के साथ मिलकर भूख हड़ताल का फैसला लिया। - पूजा, अनशनकारी छात्रा
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rewari strike
भूख हड़ताल में शामिल तो नहीं थी, लेकिन अगर हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं तो जल्द ही मैं भी इसमें शामिल हो जाती। हां, प्रदर्शन के दौरान जरूर शामिल थी। स्कूल अपग्रेडेशन की मांग जायज थी। अब गांव की बच्चियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। -पल्लवी, प्रदर्शन में शामिल छात्रा
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rewari school
सरकार बेटी बचाने-बेटी पढ़ाने का नारा देती है। लेकिन सरकार के राज में स्कूल आनेजाने वाली छात्राओं के रास्ते में शराब ठेके भी खुलवा देती है। लगातार परेशानी के बाद ही हमारी सीनियर छात्राओं ने यह कदम उठाया है। - सरिता, छात्रा
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rewari strike
महज स्कूल अपग्रेड करने से ही कुछ नहीं होगा। इतनी गर्मी होने के बावजूद अभी तक स्कूल में पंखे नहीं लगे हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले को महज औपचारिकता ही कहा जाएगा। जरूरी है कि छात्राओं को जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाए। - अलका, छात्रा
विषयों के चयन को लेकर भी अभी स्कूल में असमंजस की स्थिति है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर मामला स्पष्ट हो जाएगा। वहीं मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। हालांकि स्कूल में आना शुरू कर दिया है। जिससे पढ़ाई को लेकर दिनचर्या नियमित हो सके। - चाहत, छात्रा