102 साल के दुलीचंद ने दिया जिंदा होने का सबूत।
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बैंड बाजे के साथ पहुंचे थे जीवित होने का प्रमाण देने
रोहतक के गांव गांधरा निवासी 102 वर्षीय दुलीचंद बुढ़ापा पेंशन काटे जाने से आहत होकर गुरुवार को बैंड बाजे के साथ अपने जीवित होने का प्रमाण देने एडीसी कार्यालय पहुंचे थे। दुलीचंद पगड़ी पहन, हाथ में फरसा लेकर रथ पर सवार होकर निकले थे। दुलीचंद के हाथ में पट्टिका थी, जिस पर लिखा था 'थारा फूफा जिंदा है'।