जब गुरमीत गोयत से बात की गई तो उसने बताया कि यह मेरे दादा का सपना था। वे चाहते थे कि मेरा एक नाम हो, अपनी एक पहचान हो। वे मुझे हमेशा एक मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित करते थे, लेकिन वह अब मेरे साथ नहीं। अब मैं उनके सपने को पूरा करने में लगा हूं, पर मुझे अफसोस है कि वे यह सब देखने को जीवित नहीं।
गुरमीत ने बताया कि पत्रकारिता में मेरी रुचि है। मैं 2034 तक जर्नलिज्म का कोर्स करके पत्रकार बनना चाहता हूं। इसके अलावा मैं राजनीति में आना चाहता हूं। चुनाव लड़ना चाहता हूं। जब भी मौका मिलेगा, मैं बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ूंगा। मेरे माता-पिता को मेरे इस फैसले से कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि वे भी मुझे इसमें सहयोग करते हैं।