मिलिए ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया से। इस बेटी पर न केवल उसके पिता को, बल्कि गांव, जिले, प्रदेश और देश भर को गर्व है। ऐसी बेटी के होने पर आप भी गर्व करेंगे। तस्वीरों में पूरी कहानी। रिपोर्टः भारत भूषण मित्तल, बठिंडा
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ब्रेव डॉटर ऑफ इंडियाः खींचती है हल और जोतते हैं पिता, देखिए
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बठिंडा के बुर्ज कहान सिंह वाला के किसान रूप सिंह की बेटी सतवीर के जज्बे को देखकर एकबारगी फिल्म ‘मदर इंडिया’ में नरगिस का रोल जेहन में ताजा हो जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि हल खींचतीं नरगिस को खेती में दोनों बेटे मदद करते हैं, जबकि सतवीर को उसके पिता। सतवीर अपनी दो छोटी बहनों को पढ़ाने और घर का खर्च चलाने के लिए गले में हल बांधकर खींचती है और पिता खेत जोतते हैं। जबकि सतवीर की छोटी बहन जश्नदीप साइकिल से दूध बेचने जाती है।
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एक पंजाबी शायर ने लिखा है ‘पुत्तर बटवाएं जमीन, धी बटवाएं दुख’। इसी को चरितार्थ कर रही हैं रूप सिंह की बेटियां। मुफलिसी ने रूप सिंह की बेटियों को परिवार चलाने का नया जज्बा दिया। रूप सिंह की बेटी सतवीर कौर का जज्बा दिल को छू जाता है।
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रूप सिंह ने बताया कि उनकी पांच बेटियां हैं। इनमें से दो की शादी हो चुकी है और बाकी तीनों पढ़ाई के साथ-साथ उनका खेतीबाड़ी में भी साथ देती हैं। उसने बताया कि वह हर साल 14 कनाल जमीन को ठेके पर लेकर किराए के संसाधनों से खेती करते है। वह जमीन में बोई फसल को पानी भी 50 रुपये प्रति घंटा लेकर देता है। फिर भी उसको चिंता रहती है कि पता नहीं फसल अच्छी भी होगी या नहीं।
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रूप सिंह बताते हैं कि खेतीबाड़ी में हाथ बंटाने वाली उनकी बेटी सतवीर उसको हर समय हौसला देती है। रूप सिंह का कहना है कि भगवान ने उसे तीनों बेटियों के रूप में बेटे दिए हैं। अगर उनके बेटे होते तो शायद वे उसका उतना साथ न देते जितना उनकी तीनों बेटियां दे रही हैं।
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सतवीर कौर ने बताया कि जब वह गांव से खेत की ओर जाती है तो गांव के लोग उस पर गर्व महसूस करते हैं। सभी अपनी बेटियों को भी उस जैसा बनने के लिए प्रेरित करते हैं। सतवीर कौर ने जिला प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते कहा कि पहले प्रशासन ने उसकी बुजुर्ग माता की पेंशन लगा दी थी, अब यह कहकर काट दी है कि उसकी आयु पेंशन योग्य नहीं है। सतवीर का कहना है कि वह पढ़ लिखकर अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन करेगी।
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सतवीर कौर ने बताया कि गरीबी और पिता के बुजुर्ग होने से उसने पढ़ाई के साथ-साथ खेती करनी भी शुरू कर दी है। सतवीर बारहवीं पास है और आगे की पढ़ाई प्राइवेट करने के साथ अपनी दोनों छोटी बहनों को भी पढ़ाती है। शाम को वह पशुओं को हरा चारा डाल उनका दूध निकालती है। छोटी बहन जश्नदीप कौर गांव में लोगों के घर दूध बेचने साइकिल पर जाती है।