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देखिए, बड़े घर की बहु-बेटियां धरने पर उतरीं, पर क्यों?

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हरियाणा में बड़े घर की बहु-बेटियां पिछले 4 दिन में सड़क पर धरना दे रही हैं। आखिर उन्हें ऐसा कदम क्यों उठाना पड़ा। तस्वीरों में देखिए, पूरा मामला।
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दरअसल, धरनाकारी गेस्ट टीचर्स हैं, जोकि नौकरी बचाने के लिए सरकार के खिलाफ करनाल में धरने पर बैठे हैं। चौथे दिन भी पूरे मामले को लेकर न तो पक्ष न ही विपक्ष की ओर से कोई नेता या अधिकारी गेस्ट टीचर्स से बातचीत के लिए पहुंचा।
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चार दिनों से चल रहे महापड़ाव के चलते करनाल में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों गेस्ट टीचर्स डेरा जमाए हुए हैं। ऐसे में प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों पर इसका असर पड़ सकता है।

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विवार को छोड़कर लगातार तीन दिनों से कोई भी अवकाश नहीं था। ध्यान रहे कि प्रदेशभर में अभी भी सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जहां पर केवल और केवल गेस्ट टीचर्स ही कार्यभार संभाल रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों के बच्चों पर इस महापड़ाव का असर पड़ना लगभग तय है।
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गेस्ट टीचर्स दिन-रात से वहीं जमे हैं। बच्चे उनके साथ है। धरने के दौरान अपनी बच्ची से मस्ती करती एक मां। भीषण गर्मी के दौरान एक और जहां घरों व कार्यालयों में पंखों से लेकर कूलर तक फेल हो चुके थे वहीं दूसरी और अतिथि अध्यापक तपती दोपहर में पूरे दिन सेक्टर 12 के ग्रांउड में बैठे रहे।
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इस दौरान पूरे दिन माताओं के साथ-साथ उन्हें छोटे बच्चे भी मौजूद थे। अपनी चिंता को छोड़कर माताएं अपने इन दुलारों की चिंता में दिखाई दी। कुछ ने उन्हें धूप से बचाने के लिए अपने आंचल की जगह दी तो कुछ ने उन्हें पेड़ की छांव में बैठने को बोला।
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इससे पहले, हजारों गेस्ट टीचर्स ने दूसरे दिन भी सड़कों पर उतरकर करीब एक घंटा 20 मिनट शांतिपूर्वक रोष मार्च निकाला। बोले गेस्ट टीचर, चार दिनों से जारी महापड़ाव को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से अभी तक नहीं की गई कोई पहल।

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हाईकोर्ट के सामने सरकार बार-बार बदल-बदलकर झूठे आंकड़े पेशकर गुमराह करने का प्रयास कर रही है। इसीलिए हमारा कोर्ट से अनुरोध है कि वह सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर जाकर कोई फैसला न सुनाए। हाईकोर्ट में सोमवार को प्रदेशभर के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत 4073 जेबीटी गेस्ट टीचर्स को हटाए जाने की मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के नए आदेशों पर टिप्पणी करते हुए गेस्ट टीचर्स संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र शास्त्री ने यह बात कही।

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राजेंद्र ने कहा कि उनके पास अभी हाईकोर्ट के आदेशों की कोई प्रति नहीं पहुंची है। सरप्लस टीचरों को हटाने के बारे में उन्होंने कहा कि हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे, साथ ही अदालत में हमारे वकील मजबूती के साथ तथ्य पेश करेंगे। यह लड़ाई केवल 4073 की नहीं है, सभी गेस्ट टीचरों की है। जहां तक सरप्लस की बात है, सच्चाई यह है कि प्रदेश के स्कूलों में आज भी शिक्षकों की कमी है, सरप्लस नहीं है, जानबूझकर ऐसे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं।
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प्रदेश प्रवक्ता राजेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेसी उनके बीच इसीलिए नहीं आ सकते, क्योंकि उन्होंने उन्हें 10 साल तक गुमराह करके रखा और भाजपा सरकार के मंत्री से लेकर विधायकों की हिम्मत उनके पास आने की नहीं है, चूंकि सब मिलकर उन्हें बाहर निकालने की योजना बना रहे हैं। राजेश ने कहा कि यदि कोर्ट को सजा सुनानी है तो सरकार को सुनाए जिन्होंने अपने चुनावी एजेंडे में उन्हें एक कलम से नियमित करने की बात कही थी।
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