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GST: दुकानदार इन तरीकों से लोगों के साथ फ्रॉड कर रहे हैं, संभल कर रहें

Mon, 17 Jul 2017 09:15 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जीएसटी लागू होने के बाद दुकानदार अपने फायदे के लिए लोगों को ठग रहे हैं और इसके लिए वे तरह तरह के तरीके अपना रहे है। जानिए और सावधानी बरतें।
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दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद सस्ते होने वाले समान की लिस्ट में अब तक ज्यादातर सामान उन्हीं दामों पर बेचे जा रहे हैं जितने पहले। दालें, दूध, टूथपेस्ट जैसे आइटम के दामों में अब तक कोई परिवर्तन नहीं है। आम पब्लिक ज्यादा सामान परचून की दुकानों से खरीदती है और वहां दामों में कोई अंतर नहीं है। मसलन दालों के दाम पहले भी 70 रुपये किलो थे और अब भी दाल की कीमतें 70 रुपये है। 
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वहीं दूध भी पहले की कीमत पर मिल रहा है। वहीं टूथपेस्ट में कोलगेट ने रेट्स में परिवर्तन कर दिया है। चंडीगढ़ के एक परचून व्यापारी राम सिंह के अनुसार जीएसटी का सही प्रभाव दो माह बाद नई एमआरपी लिस्ट के बाद ही मालूम होगा। ज्यादातर लोग राशन परचून की दुकानों से ही खरीदते हैं। ऐसे में एक दो रुपये का अंतर भी होता है तो उसका असर नहीं दिखाई देता है। 

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gst - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-24 के एक परचून विक्रेता ने कहा कि आटा की कीमत पहले तीन सौ रुपये थी और अभी भी इसकी कीमत उतनी ही है। मसलन, जिनके रेट्स सस्ते होते जा रहे हैं उनको दुकानदार भी सस्ता कर रहे हैं। दुकानदार पवन ने बताया कि वह जीएसटी के लागू होने के बाद ई बाइक्स नहीं सेल कर पा रहे हैं। इसका कारण है कि ई बाइक्स का एचएसएन कोड अब तक कंपनी से नहीं आया है। ऐसी स्थिति में क्या रेट होगा वह खुद कैसे तय कर लें।
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जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों के उस गिरोह में काफी बेचैनी है, जो बिना रजिस्टर्ड कैश पर अपना ज्यादातर काम कर टैक्स की भारी चोरी करते थे। इनमें गैर रजिस्टर्ड कारोबारी शामिल हैं। अब ऐसे ही कारोबारियों की ओर से फर्जीवाड़े की आशंका बन गई है, जिसे लेकर जीएसटी आयुक्तालय ने अलर्ट किया है।
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ग्राहकों से आह्वान किया गया है कि वे माल की खरीद-फरोख्त के दौरान जीएसटी पर आधारित जनरेट किए गए बिल पर जीएसटी नंबर की तस्दीक जरूर कर लें। विभाग के एक सीनियर अफसर ने बताया कि इस तरह टैक्स चोरी करने वाले कारोबारी अब फर्जी जीएसटी नंबर वाले इनवॉइस (बिल) जनरेट कर फर्जीवाड़ा कर सकते हैं, जिससे सरकार, कई उद्यमियों व ग्राहकों को भी चपत लगेगी। 
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जान लीजिए कि आपके साथ वे कारोबारी फर्जीवाड़ा करेंगे, जो पहले कैश या कच्चे बिल पर काम कर टैक्स चोरी करते थे और अब बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के काम करेंगे। विभाग के आला अफसर ने बताया कि ऐसे कारोबारी खुद को जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं करवाएंगे, लेकिन अपने उद्यमी व अन्य ग्राहकों को जीएसटी नंबर का फर्जी इॅनवाइस दे सकते हैं। 
 

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क्योंकि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जिसमें फर्जी टिन नंबर के साथ कारोबारी काम कर टैक्स चोरी करते थे। इसमें भी ऐसे गैर रजिस्टर्ड कारोबारी फर्जीवाड़ा कर ग्राहकों से तो जीएसटी वसूलेंगे, लेकिन सरकार को जमा नहीं करवाएंगे। इसमें सरकार के साथ-साथ ग्राहकों को भी चपत लगेगी। उधर, इस फर्जीवाड़े से उन उद्यमियों को भी नुकसान होगा, जो गैर रजिस्टर्ड कारोबारियों के साथ बिजनेस करेंगे।
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क्योंकि यदि गैर रजिस्टर्ड कारोबारी ने फर्जी इनवाइस पर काम किया, तो क्रेडिट लेते वक्त यह फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा और इस सूरत में उन कारोबारियों को जीएसटी पे करना पड़ेगा, जो गैर रजिस्टर्ड कारोबारियों से बिजनेस करेंगे। उधर, विभाग के अफसर ने ग्राहकों से आह्वान किया है कि वे जीएसटी के अंतर्गत इनवाइस नंबर की जांच जीएसटी पोर्टल पर जाकर आसानी से कर सकते हैं ताकि इस फर्जीवाड़े से वे भी बच सकें।
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