जीएसटी लागू होने में ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं, इससे जुड़ी वे 9 बातें जो आपको जरूर पता होनी चाहिएं। वरना नुकसान होगा। साभारः www.ichowk.in
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GST BILL
जीएसटी बिल लोकसभा में पास हो गया है। एक जुलाई से इसके लागू होने की खबर है। बता दें कि जीएसटी के लागू होते ही देश में लगने वाले 18 टैक्स खत्म कर दिए जाएंगे और एक यूनिवर्सल टैक्स लगना शुरू हो जाएगा। ये एक तरह से महंगाई को बढ़ाएगा। इससे कई फायदे होंगे, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं, जिनके बारे में हम आपको बता रहे हैं।
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जीएसटी
वर्तमान में आप सेवाओं पर 14.5 प्रतिशत टैक्स देते हैं। जैसे 1000 रुपए के मोबाइल बिल पर आप 145 रुपए सर्विस टैक्स देते हैं। जीएसटी आने के बाद यह 18 प्रतिशत हो जाएगा यानी कि आपको 145 की बजाए 180 रुपए चुकाने होंगे। इस तरह से देखा जाए तो रेस्टोरेंट में खाना, हवाई टिकट, बीमा प्रीमियम आदि कई सेवाएं महंगी हो जाएंगी।
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gst
एविएशन कंपनियों पर जीएसटी का गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल घरेलू यात्राओं का रेट कम है, लेकिन जीएसटी लगने के बाद जैसे ही हवाई यात्राएं महंगी होंगी ट्रैफिक भी कम होगा। ऐसे में नई-नई विमानन कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। फिलहाल ये टैक्स सिर्फ 6-9% लगता है (क्लास के हिसाब से), लेकिन जीएसटी के बाद ये 15% के ऊपर हो जाएगा।
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जीएसटी
दुनिया भर में सबसे कम बीमा भारत में (कुल भारतीय आबादी का 5%) होता है और जीएसटी लागू करने से बीमा कंपनियों को अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि टैक्स सीधा बीमा कंपनियों के पास जाएगा। अधिकतर इंडायरेक्ट टैक्स अब जीएसटी के तहत आने लगेंगे। जीएसटी के लागू होने से नए घर खरीदने की कीमत 8% तक बढ़ जाएगी और घर खरीदने वाले में 12% की कमी आएगी।
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जीएसटी बिल
बैंकिंग और फाइनेंशियल क्षेत्र में प्रभावी टैक्स दर 14% है, जो सिर्फ ट्रांजैक्शन पर लगती है उसके इंट्रेस्ट पर नहीं। जीएसटी के तहत शुल्क आधारित लेनदेन की दर 18-20% तक बढ़ने की संभावना है। जीएसटी के लागू होने से लोन प्रोसेसिंग फीस, डेबिट / क्रेडिट कार्ड फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम आदि जैसे वित्तीय सेवाओं की लागत में बढ़त होगी।
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पेट्रोल
कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, डीजल, पेट्रोल और एटीएफ जैसे प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखे जाने की संभावना है, लेकिन दुगने इंडायरेक्ट टैक्स की वजह से लागत बढ़ने की संभावना है। जीएसटी लागू होने पर आईटी कंपनियों को भी नुकसान होगा। जीएसटी के बाद वर्कफोर्स से लेकर प्रोडक्शन की लागत तक सब बढ़ जाएगा।
जीएसटी के बाद एक टैक्सेशन सिस्टम के नाम पर 2 प्रकार का टैक्स लग सकता है। जैसे एक सेंट्रल टैक्स और एक स्टेट टैक्स। इसके नियमों के बारे में अभी भी कुछ साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। इन दो के अलावा एक इंटरस्टेट जीएसटी भी लागू हो सकता है। बता दें कि अलग-अलग नामों से 165 देशों में जीएसटी पहले ही लागू हो चुका है।