एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी बिल में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे। यकीं नहीं तो यह खबर पढ़ लीजिए।
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जीएसटी लागू होने के बाद अब बड़े उद्यमियों, कारोबारियों से लेकर छोटे दुकानदारों में अनावश्यक इंस्पेक्टरी राज का खौफ तो खत्म होगा। साथ ही टैक्स चोरी के बाद यदि उद्यमियों, कारोबारियों व दुकानदारों ने ‘सीनाजोरी’ दिखाई और इंस्पेक्शन टीम को सहयोग न किया तो उनकी औद्योगिक इकाई को सील कर दिया जाएगा।
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- फोटो : SELF
उधर, जीएसटी में टैक्स अफसरों व इंस्पेक्टरों द्वारा कभी भी मनमर्जी से किसी भी इंडस्ट्री व दुकान में जाकर ‘धौंस’ जमाने और उसकी एवज में वसूली करने पर भी बंदिशें लग जाएंगी। क्योंकि किसी भी औद्योगिक इकाई में निरीक्षण के लिए अब जीएटी के अंतर्गत गठित आला अफसर की विशेष अथॉरिटी से लिखित अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।
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इस अनुमति के बाद ही संबंधित अफसर व इंस्पेक्टर किसी औद्योगिक इकाइयों में इंस्पेक्शन के लिए जाएगा। उन्हें अथारिटी को बताना होगा कि जिस यूनिट में वे इंस्पेक्शन केलिए जा रहा है, उसके खिलाफ क्या शिकायत उसके पास आई है? इंस्पेक्शन के बाद अथारिटी को ये भी बताना होगा कि निरीक्षण में संबंधित औद्योगिक इकाई में क्या-क्या खामियां मिलीं और वहां क्या कार्रवाई अमल में लाई गई?
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इस निरीक्षण के दौरान यदि टैक्स अफसर व निरीक्षक ने कोई मनमानी की तो उद्यमी, कारोबारी व दुकानदार हॉयर अथारिटी को शिकायत भी दे सकता है। जिसपर कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय शुल्क (आडिट) आयुक्त केक्षेत्रीय कार्यालय ने इस संबंध में भी दिशा-निर्देश हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ सरकारों को भेज दी है।
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विभाग के सीनियर अफसर ने बताया कि जीएसटी पर भ्रष्टाचार से इस चोट से कारोबारियों, उद्यमियों व ट्रेडस को बड़ा फायदा होगा। उनकेअनुसार अभी कर चोरी के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती रहती थी, लेकिन जीएसटी में ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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इन नियमों से कम होगा भ्रष्टाचार
रजिस्ट्रेशन के लिए उचित दस्तावेज स्कैन कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड होंगे, कोई आब्जेक्शन नहीं हुआ तो तीन दिन में ऑनलाइन ही प्राप्त होगा रजिस्ट्रेशन। रिफंड मामलों में भी महीनों धक्के नहीं खाने पड़ेंगे, ऑनलाइन आवेदन होगा और एक हफ्ते में रिफंड खाते में पहुंचेगा। अथारिटी से अनुमति मिलने के बाद टीम किसी भी टैक्सेबल व्यक्ति की औद्योगिक इकाई को खंगाल सकेगी।
ये प्रावधान भी खत्म कर देंगे भ्रष्टाचार
प्राथमिक जांच में यदि औद्योगिक इकाई के खिलाफ टैक्स चोरी का प्रमाण मिलेगा, तभी वहां आगे सर्च आपरेशन छेड़ा जाएगा। जीएसटी में 21 तरह के अपराधों की श्रेणियां बनाई गई है, जिसके तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। विभिन्न श्रेणियों में सजा में एक साल से पांच साल की कैद व जुर्माने का प्रावधान है।