सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं तो ये खुशखबरी पढ़ें और तैयारी में जुट जाएं। सुनहरा मौका मिलने जा रहा है, देखिए कहीं मौका छूट न जाए।
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चंडीगढ़ में एडमिशन
- फोटो : amar ujala
दरअसल, हरियाणा सरकार ग्रुप डी के खाली चल रहे 33 हजार 889 पदों पर जल्दी भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी। हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी भर्ती व सेवा शर्तें विधेयक 2018 के विधानसभा में पारित होने से इस श्रेणी में बड़े पैमाने पर भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है। अभी तक इस श्रेणी के भर्ती संबंधी नियम व शर्तें हर विभाग में अलग-अलग थे, जिससे भर्ती प्रक्रिया को सिरे चढ़ाना आसान नहीं था।
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चंडीगढ़ में एडमिशन
- फोटो : अमर उजाला
स्वीपर अथावा चौकीदार या स्वीपर कम चौकीदार को छोड़कर बाकि पदों के लिए अब शैक्षणिक योग्यता दसवीं कर दी गई है। साथ ही इंटरव्यू भी नहीं होगा। सरकार खिलाड़ियों को अधिक से अधिक नौकरी प्रदान करने के लिए डी श्रेणी की भर्तियों में दस प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण प्रदान करेगी। अभी तक यह तीन प्रतिशत था। इसके अलावा जिसके परिवार से सरकार नौकरी में कोई नहीं है, उसे पांच अतिरिक्त अंक, विमुख व टपरीवास जातियों को भी पांच अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।
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एक वर्ष के अनुभव के लिए आधा अंक की भी गणना की जाएगी और यह अधिकतम आठ अंक तक होगा। सीएम मनोहर लाल ने विधानसभा में कहा कि डी श्रेणी के कुल 63 हजार पद हैं, जिनमें से 33 हजार 889 खाली पड़े हैं। विधेयक पास होने के बाद जल्दी इन्हें भरने का काम शुरू कर देंगे। पिछली सरकार के 10 साल के कार्यकाल में भी चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती नहीं हुई थी। वर्ष 2008 में ग्रुप डी भर्ती चयन कमेटी का गठन किया गया, लेकिन वर्ष 2011 में उसे भंग कर दिया गया।
इसके बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिए कि वे सभी विभागों से ग्रुप डी की रिक्तियों का ब्यौरा मांगें और फरवरी, 2014 में 13653 पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए, जिनके लिए पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। दुर्भाग्यपूर्ण यह भर्ती प्रक्रिया पूरी न हो सकी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने भर्तियों में खेल बंद करने के लिए डी श्रेणी में इंटरव्यू खत्म किया है। कांग्रेस विधायक करण दलाल ने सीएम से मांग की है कि दिव्यांगों और बेसहारा महिलाओं को सरकार इस श्रेणी की नौकरी में अधिमान दे।