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लड़की हो या लड़का, ये लक्षण नजर आएं तो शर्म न करें, वरना जिंदगी बरबाद

Thu, 30 Nov 2017 05:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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health
लड़का हो या लड़की, अगर आपको ये लक्षण नजर आएं तो बिल्कुल भी शर्म न करें, वरना जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। खबर पढ़ें और संभल जाएं।
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योग और स्वास्थ्य
पीजीआई चंडीगढ़ में एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें ओवरी और टेस्टिस से जुड़ी बीमारियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस दौरान डॉ. रमा वालिया ने कहा कि यदि आठ साल की उम्र से पहले किसी लड़की के पीरियड आ जाए या नौ साल के लड़के के दाढ़ी मूंछ आ जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अनदेखी की तो हाइट छोटी रह जाएगी।
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योग और स्वास्थ्य
डॉ. रमा वालिया ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो आमतौर पर बच्चों को पेरेंट्स 14 साल की उम्र के बाद लाते हैं, इस उम्र में कुछ नहीं कर सकते। जबकि थोड़ी उम्र में ही दवाइयों की मदद से इसे ठीक किया जा सकता है। इसी तरह से किसी युवती में पीरियड देरी से आ रहे हैं या कुछ और समस्या जैसे कि चेहरे पर बाल का आना। इन्हें भी दवाओं की माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

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योग और स्वास्थ्य
एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अनिल भंसाली ने कहा कि दस से 15 प्रतिशत बीमारियां इससे जुड़ी होती हैं। तीनों ही बीमारियों के बारे में लोगों को पता नहीं है। इससे बीमारी कम होने के बजाए बढ़ती हैं और आगे चलकर महिलाओं और पुरुषों दोनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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हेल्दी फूड
ये बीमारी है तो इलाज भी है
पीसीओडी(पालीसिस्टिक ओवरी डिजीज), पीसीओडी बीमारी खासतौर पर यंग लड़कियों में आती है। इसमें पीरियड अनियंत्रित हो जाते हैं। चेहरे पर बाल आते हैं। ये बीमारी मोटापे से जुड़ी होती है। ओवेरी में फीमेल हार्मोन के बजाए मेल हार्मोन बनने लगते हैं।
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योग और स्वास्थ्य
कुछ महिलाओं का मानना होता है कि उनके पीरियड सही से नहीं आ रहे हैं, इसलिए उनका वजन बढ़ रहा है, जबकि होता है उल्टा। वजन होने के कारण उनके पीरियड नहीं आते। यदि इसे ठीक नहीं किया गया तो भविष्य में डायबिटीज होने की संभावना रहती है और मां बनना भी मुश्किल होता है। इसकी पहचान होते ही सीधे एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट में पहुंचे और इलाज करवाएं।
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doctor
डीएसडी (डिस्आर्डर आफ सेक्स डेवलपमेंट), इस बीमारी में पता नहीं चल पाता कि बच्चे का सेक्स क्या है। मतलब जन्म लेने वाला बच्चा लड़का है या लड़की। कई लोग बच्चों की इस बीमारी को छिपा लेते हैं और इलाज नहीं करवाते, जबकि इसका इलाज उपलब्ध है। ऐसे मरीजों का पहले सेक्स पहचानते हैं और फिर देखते हैं कि किस हार्मोन की वजह से उन्हें ये समस्या आई है। दवाओं और सर्जरी की मदद से ऐसे मरीजों का इलाज करते हैं।

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योग और स्वास्थ्य
पुरुषों में दाढ़ी न आना
इसका इलाज भी एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट करता है। डॉ. अनिल भंसाली कहते हैं कि कुछ मरीजों में हार्मोन की कमी से दाढ़ी नहीं आती है और उनके बच्चे भी नहीं होते हैं। ऐसे करीब 300 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। लोग सोचते हैं कि इनका इलाज नहीं है, जबकि इन सबका इलाज उपलब्ध है।
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हेल्दी फूड
प्लास्टिक से हार्मोन बिगड़ जाते हैं
एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के डॉ. आशु रस्तोगी कहते हैं कि प्लास्टिक की वजह से भी हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है। प्लास्टिक की प्लेट में चाय या काफी पीना या फिर खाना खाने से भी हार्मोन बिगड़ता है। दरअसल प्लास्टिक में बिस्फिनॉल ए और पैथालेट्स जैसे केमिकल होते हैं, जो हार्मोन को बनाना बंद कर देते हैं। एंडोक्राइन डिसरप्टर कहते हैं। इस वजह से थायराइड, डायबिटीज और पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी भी प्रभावित होती है।
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