बीएसएफ में भर्ती होना चाहता था, पर 14 साल की उम्र में उसने थाम ली बंदूक। जानिए तीन गोल्ड मेडल जीतने वाले नेशनल प्लेयर के खूंखार गैंगस्टर बनने की वजह।
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Vicky Gounder Sarawan Bodla
मुक्तसर के गांव सरावां बोदला का रहने वाला हरजिंदर सिंह भुल्लर उर्फ विक्की विक्की गौंडर डिस्कस थ्रो में नेशनल प्लेयर था। उसने नेशनल लेवल पर तीन गोल्ड और दो सिल्वर मेडल्स जीते थे। स्टेट लेवल पर भी खेल चुका था। उसके कोच उस पर गर्व करते थे। आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए विक्की ने स्पीड एंड फंड एकेडमी ज्वाइन कर ली थी। डिस्कस थ्रो में बेहतरीन प्रदर्शन पर विक्की को उस समय के डीआईजी महल सिंह भुल्लर ने भी सम्मानित किया था।
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Vicky Gounder Sarawan Bodla
लेकिन एक छोटे से झगड़े ने विक्की गौंडर की जिंदगी बदल दी और वह जुर्म के दलदल में ऐसा धंसा कि निकल ही नहीं पाया। गौंडर की जालंधर में दोस्ती सुक्खा काहलवां, प्रेमा लाहौरिया, दलजीत भाणा, लवली बाबा, गुरभाज सिंह बाजा और सुक्खा भाऊ से थी। जालंधर में स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रैक्टिस कर शाम को दोस्तों संग घूमने निकले गौंडर की जिंदगी में उस समय ट्विस्ट आ गया, जब कॉलेज के पास सरस्वती विहार में एक मामूली झगड़ा हुआ था और उसमें गौंडर का नाम पहली बार एफआईआर में आया।
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Vickey Gounder
गौंडर की उम्र उस समय 14 साल की थी। एफआईआर में नाम आने के बाद पुलिस ने जांच के नाम पर उसे काफी टॉर्चर किया गया। इसके कुछ समय बाद गैंगस्टर सुक्खा काहलवां ने विक्की के दोस्त बाबा सूरज की हत्या कर दी थी। इस दौरान बदले की भावना से विक्की ने काहलवां की हत्या कर दी थी। इस केस के बाद से विक्की सुर्खियों में आ गया। इस तरह बीएसएफ में भर्ती होने की चाह रखने वाला ये नेशनल खिलाड़ी हरजिंदर सिंह से विक्की गौंडर बन गया, जो जुर्म की दुनिया का बादशाह था।
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Gangsters Vicky Gounder, Prema Lahoriya shot dead
जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ा, सभी दोस्तों में किसी बात पर विवाद हो गया और विक्की गौंडर व सुक्खा काहलवां अलग-अलग हो गए। गौंडर व प्रेमा लाहौरिया एक तरफ हो गए, वहीं सुक्खां काहलवां और दलजीत भाना ने अपना अलग गुट बना लिया। फिर 15 सितंबर 2010 को जीटीबी नगर में सरजू नामक युवक की गोली मारकर हत्या कर आई ट्वंटी कार लूटी गई थी। देहात पुलिस ने इस केस में सुक्खा काहलवां को गिरफ्तार किया था।
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Gangsters Vicky Gounder, Prema Lahoriya shot dead
बताया जा रहा है कि गौंडर इस बात से गुस्से में था कि सुक्खा ने पुलिस हिरासत में उसका नाम क्यों लिया। इसके बाद से दोनों में संबंध बिगड़ गए थे और एक दूसरे को जान से मारने की योजना तैयार होने लगी। 7 मई 2012 को राज नगर में मोबाइल की दुकान चलाने वाले गौंडर और लाहौरिया के समर्थक प्रिंस की गोलियां मारकर हत्या की गई और खूनी खेल शुरू हो गया। प्रेमा लाहौरिया और गौंडर इससे काफी तिलमिला गए।
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आतंक का अंत
- फोटो : Amar Ujala
26 फरवरी 2014 को दोबारा सुक्खा काहलवां गैंग के दलजीत भाना और उसके साथियों ने प्रिंस के दोस्त दीपांश व सिमरन को गोलियां मारकर मार दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद फरार हो गए। अपने तीन साथियों की हत्या से प्रेमा काफी आक्रोशित हो गया। 21 जनवरी 2015 को उसने अपने साथियों विक्की गौंडर, नीटा दयोल, गुरप्रीत सिंह सेखों से मिलकर अमृतसर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर गोराया के पास उस समय सुक्खा काहलवां की गोलियां मारकर हत्या कर दी।
इस हत्या के बाद गैंगस्टरों ने बाकायदा भंगड़ा डाला और फरार हो गए। 23 दिसंबर 2015 को विक्की गौंडर को तरनतारन पुलिस ने उस समय दबोच लिया था, जब वह इलाके में कुलदीप सिंह को मिलने आया हुआ था। 27 नवंबर 2016 को पुलिस की वर्दी में आए प्रेमा लाहौरिया और उसके साथियों ने नाभा जेल से गैंगस्टर विक्की गौंडर, गुरप्रीत सेखों, नीता दयोल और विक्रमजीत को फरार करवा लिया। तब से गौंडर फरार ही चल रहा था और पुलिस तलाश में जुटी थी।