देश के लिए शहादत देने वाले बीएसएफ जवान और जांबाज बेटे रॉकी को परिवार वालों ने नम आंखों से कैसे दी आखिरी विदाई देखिए कैमरे की नजर से
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शहीद बेटे का अंतिम संस्कार, नम आंखों से परिवार ने दी विदाई
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उधमपुर में आतंकियों से लड़ते भारत मां के लिए प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज रॉकी का तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देख पूरा रामगढ़ माजरा ही गमगीन नहीं था बल्की आसमां भी रो उठा था।
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शुक्रवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे जब रॉकी अंतिम यात्रा पर रवाना हुआ तो लोगों की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन उनका माथा गर्व से ऊंचा था। आसमां से बरसते पानी के बीच शव यात्रा जैसे-जैसे गांव की गलियों से गुजरी शहीद के दर्शन करने के लिए लोग छतों पर उमड़ आए।
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हर एक की जुबां पर रॉकी अमर रहे की जयघोष थी। गांव की धर्मशाला में रॉकी के शव का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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सिविल अस्पताल यमुनानगर से सुबह छह बजे बीएसएफ के जवान अपने रॉकी के पार्थिव शरीर को लेकर रामगढ़ माजरा रवाना हुए। रॉकी के घर पर शव पहुंचने के बाद वहां कोहराम मच गया।
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करीब नौ बजे सैनिक सम्मान के साथ शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव की धर्मशाला ले जाया गया। यहां मौजूद विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल, राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज, बीएसएफ के डीआईजी केके गुलिया सहित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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बीएसएफ के जवानों ने शस्त्र उल्टे कर और हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। रॉकी के भाई ने उसकी चिता को अग्नि दी। घर से शवयात्रा निकलने से लेकर अंतिम संस्कार तक पूरा वातावरण शहीद रॉकी अमर रहे, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से गूंजता रहा।
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आसपास के कई गांवों के लोग शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। गांव के श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता काफी समय से खराब पड़ा है। प्रशासन ने इस रास्ते को बनवाने का काम शुरू करवाया, लेकिन बारिश के कारण सुबह तक सड़क नहीं बन पाई। इस कारण गांव की धर्मशाला में अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया।
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शहीद रॉकी के साथी अमरपाल और विक्की ने बताया कि रॉकी ड्यूटी के दौरान अपने दोस्तों को फेसबुक पर कमेंट भेजता रहता था। कुछ दिन पहले ही उसने कमेंट किया था कि ‘मैं यहां ऐके-47 के सहारे जीता हूं।’
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विक्की ने बताया कि रॉकी ने बताया था कि कुछ दिन पहले वह अमरनाथ यात्रा के रूट पर तैनात था। उस दौरान भी आतंकवादियों के साथ गोलाबारी हुई थी, लेकिन इसमें कोई घायल नहीं हुआ था।
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उल्लेखनीय है कि उधमपुर में बीएसएफ के काफिले पर किए आतंकी हमले में जवान रॉकी ने शरीर पर गोलियां खाने के बाद भी दिलेरी दिखाते हुए एक आतंकी को मार गिराया और बस में बैठे अपने साथियों की जान बचा ली।