शहीद-ए-आजम भगत सिंह के 112वें जन्म दिवस पर तस्वीरों में देखिए वो गुप्त ठिकाना, जहां वे अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ छिपा करते थे।
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भगत सिंह का गुप्ता ठिकाना
- फोटो : अमर उजाला
फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (मोहल्ला शहागंज) में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के ठिकाने को विरासत घोषित करने संबंधी नोटिफकेशन भी पंजाब टूरिज्म एंड कल्चर अफेयर डिपार्टमेंट की ओर से जारी कर दिया गया है। दिसंबर 2014 में विभाग ने नोटिफिकेशन जारी करके आपत्तियां मांगी थी, लेकिन किसी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी। लेकिन नोटिफिकेशन जारी किए चार साल गुजरने के बाद भी अभी तक फिरोजपुर स्थित तूड़ी बाजार में बने क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने को यादगार नहीं बनाया गया।
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सरदार भगत सिंह
गुप्त ठिकाना कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट फिरोजपुर शहर के अधीन है, पुरातत्व विभाग ने ट्रस्ट के चेयरमैन रजिंदर पाल धवन पुत्र बदरी दास धवन वासी मुहल्ला लाहौरियां वाला फिरोजपुर शहर के साथ एक एग्रीमेंट किया था, रजिंदर पाल का अब निधन हो चुका है। पुरातत्व विभाग ने रजिंदर पाल से क्या एग्रीमेंट किया है, इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है। उधर, शनिवार को नौजवान भारत सभा तथा पंजाब स्टूडेंट यूनियन फिरोजपुर तूड़ी बाजार स्थित क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने को शहीदों की यादगारें रखकर लाइब्रेरी और अजायब घर में तबदील करने को लेकर फाजिल्का के प्रताप बाग में रैली करने जा रही है।
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Bhagat Singh
इस गुप्त ठिकाने में कौन-कौन क्रांतिकारी आते थे, क्या करते थे, अंग्रेजों के खिलाफ किस प्रकार की रणनीति, किन वजहों से गुप्त ठिकाना बनाया, इन तथ्यों की खोज लेखक राकेश कुमार ने की थी। इस संबंधी उन्होंने दो पुस्तकें प्रकाशित की हैं जो इस समय बाजार में उपलब्ध हैं। इस गुप्त ठिकाने संबंधी उन्होंने जिला प्रशासन को कई ऐतिहासिक जानकारी मुहैया करवाई थीं जो पंजाब सरकार तक पहुंचाई गईं थी। राकेश कुमार ने बताया कि अंग्रेजों से भारत आजाद करवाने को क्रांतिकारियों ने रणनीति बनाने के लिए फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार (मुहल्ला शहागंज) में गुप्त ठिकाना बनाया था, जिसे अब यहां की समाजसेवी संस्थाओं व लोग शहीदों के इस ठिकाने को नेशनल हेरीटेज बनाने की मांग उठा रहे हैं।
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भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों ने गुप्त ठिकाना यहां दस अगस्त 1928 को बनाया था, अंग्रेजों को पता लगने के बाद इसे चार फरवरी 1929 को छोड़ दिया था। यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया था। अंग्रेजों से भारत को आजाद करवाने के लिए यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यहां पर भगत सिंह के अलावा चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डा. गया प्रसाद, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था। क्रांतिकारी पंजाब से विभिन्न ठिकानों जैसे दिल्ली, कानपुर, लखनऊ व आगरा इत्यादि जाने-आने के लिए फिरोजपुर में बनाए गुप्त ठिकाने पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे।
बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डॉ. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट की दुकान खुलवाई गई थी। वे इस केमिस्ट की दुकान पर पार्टी की आर्थिक सहायता के लिए धनराशि एकत्रित करते थे। अंग्रेजों से बच कर निकलने के लिए इसी गुप्त ठिकाने में शहीद भगत सिंह के केश व दाढ़ी काटी गई थी। लेखक ने बताया कि नौजवान भारत सभा तथा पंजाब स्टूडेंट यूनियन भी उक्त गुप्त ठिकाने को यादगार में तबदील कर आम लोगों के लिए खोलने और लाइब्रेरी बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। नौजवान भारत सभा व पंजाब स्टूडेंट यूनियन ने पंजाब सरकार से मांग की है कि उक्त गुप्त ठिकाने को जल्द यादगार बनाकर इसे आम लोगों के लिए खोला जाए। उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर 2015 को पंजाब सरकार के पुरात्तव विभाग ने उक्त गुप्त ठिकाने को यादगार बनाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था लेकिन अभी तक यादगार नहीं बनाया गया है।