भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी है। ध्यान से पढ़ लें और अमल करें, वरना कानूनी पचड़े में फंसेंगे, आर्थिक नुकसान भी उठाएंगे।
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सेना में भर्ती
नेपाल में भारतीय सेना में फर्जी भर्ती का मामला सामने आया है। फर्जीवाड़ा करने के लिए शातिर बदमाश फौज के नकली आर्मी अफसर बनकर घूमते हैं। वे कभी खुद को इंडियन आर्मी का कर्नल बताते हैं, तो कभी सूबेदार मेजर। इसी तरह झांसा देकर ये एजेंट नेपाली युवाओं को भारतीय फौज में भर्ती कराने की एवज में उनसे लाखों रुपये ऐंठ रहे हैं। इन एजेंटों के तार उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा से जुड़े हैं।
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- फोटो : amarujala
आर्मी की विशेष विंग की रिपोर्ट के अनुसार, एक एजेंट ने तो कुछ नेपाली युवकों को आर्मी में भर्ती करवाने की एवज में उनसे लाखों रुपये लिए और फिर उन्हें अंबाला कैंटोनमेंट में बुलाया। इस एजेंट ने खुद को आर्मी का कर्नल बता रखा था। इतना ही नहीं वे यहां आर्मी के पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल सब एरिया हेडक्वार्टर में अपनी अच्छी जान-पहचान भी बताता था। जिसके दम पर वे युवकों को सेना में भर्ती करवाएगा।
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हैरत की बात तो यह कि फर्जी कर्नल बताने वाला यह एजेंट कुछेक नेपाली युवकों को लेकर अंबाला की एक सैन्य यूनिट में भी गया था। इन नेपाली युवाओं को भी हिमाचल के सुबाथू स्थित आर्मी के एक ट्रेंनिग सेंटर में भर्ती के कॉल लेटर और अंबाला में सेना के रिक्रूटमेंट आफिस का फर्जी रेफरेंस लैटर भी दिया गया था। जबकि इन युवकों को यहीं अंबाला में ही भारतीय फौज की वर्दी और किट भी उपलब्ध करवाई गई।
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नेपाली युवकों को एजेंटों ने जो कॉल लैटर उपलब्ध कराए गए, उन पर आर्मी के सुबाथू ट्रेनिंग सेंटर में तैनात बताये गए कर्नल एमएन शर्मा और कर्नल आरएन सिंह के हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल किया गया है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, सेना की जांच में दोनों ही अफसर न तो ट्रेंनिंग सेंटर में हैं और न ही सुबाथू ट्रेनिंग सेंटर से ऐसा कोई कॉल लैटर जारी किया गया।
नेपाली युवकों को भारतीय फौज में भर्ती कराने के इस खेल में एजेंट भरोसा जमाने के लिए एक फर्जी विटनेस फार्म भी नेपाली लोगों से भरवाते थे। जिसमें नेपाल के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की फोटो लगाई जाती थी और वह व्यक्ति यह सर्टिफाइड करता था कि जो नेपाली युवक भारतीय फौज में भर्ती होने जा रहा है, वह उसे अच्छी तरह से जनता है और उसकी पूरी जिम्मेदारी लेता है। ऐसा इसलिए किया जाता था कि नेपाली युवकों और उनके परिजनों को यह भरोसा हो जाये की इंडियन आर्मी में भर्ती का काम पूरी तरह उचित ठंग से हो रहा है। इस विटनेस फॉर्म पर भी कर्नल रैंक के अफसर की मुहर है।