आजादी के पहले यह विचार था- खादी फॉर नेशन और आजादी के बाद विचार बदला और बन गया खादी फॉर फैशन। देखिए कैसे पीएम के एक आइडिए ने खाकी की किस्मत बदल दी...
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पहले खादी फॉर नेशन, अब खादी फॉर फैशन
खादी के बढ़ते वर्चस्व ने अब इसे आम आदमी की खादी बना दिया है। ऐसी खादी जिसने सभी को मोह लिया है। हो भी क्यों न, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात से निकलने वाली खादी की ब्रांडिंग अब न सिर्फ देश में हो रही है बल्कि इसकी खपत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सौ करोड़ से ऊपर पहुंच गई है।
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पहले खादी फॉर नेशन, अब खादी फॉर फैशन
हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के तीन सौ से ज्यादा स्टोर्स में अब खादी की मांग बढ़ने लगी है। काटन खादी, पॉली खादी, वूलेन खादी और सिल्क खादी का जलवा बरकरार है। अब खादी हो गई है ‘खादी मार्क’। खादी की दशा बदलने में पीएम मोदी का बड़ा योगदान है। खादी आश्रम के स्टोर्स को अब ज्यादा आकर्षक बनाया गया है। एक खादी आश्रम के अधिकारी ने बताया कि अब काफी यूथ ऐसे हैं जो कि खादी के नए डिजाइनर वस्त्र आने की प्रतीक्षा करते हैं।
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पहले खादी फॉर नेशन, अब खादी फॉर फैशन
डिजाइनर्स भी जुड़े हैं अब
खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन के पंजाब और हरियाणा के डायरेक्टर वीके नागर ने बताया कि खादी का प्रचार प्रसार युवाओं के बीच होने का एक बड़ा कारण है प्लानिंग। इसके अंतर्गत डिजाइनर्स को जोड़ा गया है जो कि खादी के डिजाइनर वस्त्र तैयार करते हैं। जिससे युवाओं के बीच खादी प्रसिद्ध हो रही है। इसके साथ ही खादी के प्रचार प्रसार के लिए प्रदर्शनी और मार्केटिंग रणनीति में भी बदलाव आया है।
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हरियाणा में ज्यादा है खादी
खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन के पंजाब और हरियाणा के डायरेक्टर वीके नागर ने बताया कि हरियाणा में खादी के दो सौ से ज्यादा स्टोर्स हैं वहीं पंजाब में नब्बे स्टोर्स हैं। हरियाणा में खादी का कल्चर एकदम अलग है और पंजाब में अलग। हरियाणा में खादी की सेल पंजाब और चंडीगढ़ से ज्यादा है। वैसे, चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में खादी के सिर्फ कुर्ते ही नहीं, बल्कि जैकेट, कोट और नमदा का क्रेज काफी है।
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क्यों पहनें खादी
1-वातानुकूलित वस्त्र है
2-नेचुरल तैयार वस्त्र है
3-हरेक मौैसम के अनुकूल
4-त्वचा के लिए अनुकूल
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अब आधुनिक चरखा
अब खादी को बढ़ावा देने के लिए कारीगरों का मेहनताना भी बढ़ाया गया है। पहले जहां 4.50 प्रति हैंग दिया जाता था, फिर 5.50 प्रति हैंग और अब 7.00 रुपये प्रति हैंग मेहनताना किया गया है। इसके साथ ही कारीगरों का उत्पादन बढ़ाने के लिए उनको 8 स्पैंडल चरखा दिया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खादी इंडस्ट्री लगाने के लिए छोटा लोन भी आसानी से प्रदान किया जा रहा है। इतना ही नहीं, खादी को बढ़ावा देने के लिए खादी का प्रोडक्शन जेल के कैदियों के माध्यम से भी शुरू करवाया गया है।
खादी का कुर्ता
साधारण कुर्ता : 500-700 रुपये
डिजाइनर कुर्ता : 1000 रुपये
खादी का पजामा : 500 रुपये-600 रुपये
डिजाइनर पजामा : 700 रुपये
काटन बास्केट : 650 से 1000 रुपये
साड़ी : 3000 रुपये से 12000 तक
बेडशीट : 900 से 1200 रुपये तक
वूलेन जैकेट : 1500 रुपये
योगा किट : 1200 रुपये