ली काबूर्जिए के साथ मिलकर चंडीगढ़ को डिजाइन किया था। मिला था पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट का दर्जा। देखिए, एमएन शर्मा की पूरा प्रोफाइल।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
दीवाली के दिन 30 अक्तूबर 2016 को 93 वर्षीय पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट मनमोहन नाथ शर्मा का देहांत हुआ। वे 93 साल के थे और पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। दिल की दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। सेक्टर 8 स्थित अपने घर में सीने में दर्द की शिकायत की बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां सवेरे 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
एम एन शर्मा इंडियन चीफ आर्किटेक्ट के तौर पर जाने जाते हैं। चंडीगढ़ के निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही। ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे के साथ उन्होंने भी कई साल चंडीगढ़ के निर्माण में काम किया है। शहर की कई इमारतों के डिजाइन तैयार किए, जिनमें सेक्टर-17 का प्लाजा भी शामिल है।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
रॉक गार्डन को बनाने में नेकचंद के अलावा एमएन शर्मा का भी अहम योगदान रहा। जिस समय पदमश्री नेकचंद रॉक गार्डन बना रहे थे, तब शर्मा ही प्रशासन के चीफ आर्किटेक्ट थे। नेकचंद ने रॉकगार्डन की रचना के बारे में सबसे पहले शर्मा को ही बताया था। शर्मा ने ही सबसे पहले रॉक गार्डन को मंजूरी दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने भी इसे मंजूर कर लिया था।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
4 अगस्त 1923 को पैदा हुए एमएन शर्मा ने जून 1950 में उन्होंने प्रोजेक्ट को ज्वॉइन किया और चंडीगढ़ का पहला मास्टर प्लान बनाने वाली टीम के साथ काम किया। 1951 में वे ली काबूर्जिए की टीम में बतौर आर्किटेक्ट शामिल हो गए। 1965 में पियरे जनरे की रिटायरमेंट के बाद उन्हें पहले आर्किटेक्ट का दर्जा दिया गया था। एमएन शर्मा के दो बेटे और दो बेटियां थीं।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
एमएन शर्मा को आर्किटेक्ट के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए कई नेशनल और इंटरनेशनल अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। 1973 में उन्हें द इंस्टी्टयूट ऑफ लाइफ (फ्रांस) का अवार्ड दिया गया था। अपने काम के प्रति उनकी समर्पण भावना देखते हुए अक्तूबर 2015 में उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
एमएन शर्मा ने हाल ही में एक किताब ‘मेकिंग ऑफ चंडीगढ़ : ली कार्बूजिए एंड आफ्टर’ लिखी। इसी साल उनके जन्मदिवस पर गवर्नमेंट आर्ट ऑडिटोरियम में गवर्नर प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी और गृहसचिव अनुराग अग्रवाल ने उसका विमोचन किया था। खराब स्वास्थ्य के कारण शर्मा इस विमोचन में हिस्सा नहीं ले पाए। अपने घर में ही उन्होंने इस किताब को लेकर बात की।
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पहले इंडियन चीफ आर्किटेक्ट एमएन शर्मा का देहांत
शर्मा की मित्र और किताब में आर्ट डिजाइन करने वाली योजना रावत ने बताया कि किताब को एमएन शर्मा ने साल 2011 में लिखने का फैसला किया था। लेकिन साल 2013 में खराब स्वास्थ्य की वजह से इसे पूरा नहीं कर पाए। इस बीच उन्होंने पेंटिंग बनाना भी शुरू किया था, जिसकी वजह से किताब लिखने में और देरी हो गई।
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योजना ने बताया कि किताब का पहला ड्राफ्ट बनने के बाद, शर्मा ने इसमें शहर के पहले एडवाइजर एमएस रंधावा से जुड़ी यादें लिखी। साथ ही कुछ और चैप्टर भी। पहले यह किताब सिर्फ ली कार्बूजिए पर ही लिखी जानी थी, लेकिन मेरे खास अनुरोध पर उन्होंने इसमें अपनी निजी जिंदगी और परिवार पर भी लिखा। इसमें 150 तस्वीरों को कंटेंट के साथ पेश किया गया है।
योजना बताती हैं कि किताब में शर्मा ने चंडीगढ़ के भविष्य पर लिखा। वे बोले, आज हमारे शहर की सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती आबादी है। जिसकी वजह से शहर की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। हमें भी कुछ देशों की तरह बढ़ती आबादी के लिए सख्त कानून या कदम उठाने चाहिए। मेरे शहरवासियों से भी यही कहना है, कि आप बड़ा सोचो। बड़ा सोचो और बड़ा काम करो। हम तो अपना काम कर गए, अब आपकी बारी है।