22 किलोमीटर दूर जाती और सड़क पर बैठकर मछलियां बेचती, तब जाकर बेटे का पेट भरती। उसी बेटे ने आज ऐसी खुशी दी कि मां की आंखें छलक पड़ी, भावुक करेगी कहानी...
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
बात हो रही है, फीफा अंडर 17 वर्ल्ड कप में भारत के कप्तान अमरजीत सिंह क्याम की। उनकी मां अशांग्बी देवी बेटे की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। कहती हैं, दिन में कभी मछली बिक जाती तो 100 से अधिक जुट जाते। पूरी जिंदगी गरीबी में कटी, आज हमें अपने बेटे पर नाज है जिसके बलबूते पर हमारा परिवार पहली बार जहाज में बैठा। स्टेडियम में हमें अपनी आंखों के सामने बेटे को खेलते हुए देखने का मौका मिलेगा। यह बात एक सपने के सच होने के समान है।
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
खुशी जाहिर करते करते अशांग्बी का गला भर आया। आयोजकों ने वर्ल्ड कप में खेलने वाली भारतीय टीम के सदस्यों के परिवार वालों को खास तौर पर बुलाया गया है। इसी के तहत कप्तान अमरजीत के पिता, जोकि कारपेंटर का काम करते है, मां, बहन, भाई भी पहुंच गए है। कारिंदों को नहीं तालीम दी जाती उड़ानों की, वो खुद ही सीख लेते हैं बुलंदी आसमानों की। किसी शायर के इस नाजुक कलाम को मजबूत इरादों के साथ सच साबित करने के लिए तैयार है अमरजीत सिंह।
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
जिंदगी ने भले ही अमरजीत को हर कदम पर दिक्कतों में उलझाया हो, लेकिन उसके मजबूत पैरों से फुटबॉल को नहीं छुड़ा सकी। मां ने मछली बेचकर और पिता ने कारपेंटर के काम में पसीना बहाकर वो खिलाड़ी तैयार किया, जो भारत में पहली बार हो रहे फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली टीम की कप्तानी करेगा। इस युवा कप्तान अमरजीत सिंह से अमर उजाला ने खास बातचीत की।
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
मूलरूप से मणिपुर के रहने वाले अमरजीत सिंह क्याम ने गरीबी में फुटबॉल खेलने का सपना देखा। इनके पिता छोटे से गांव थॉबाल में किसानी में दिहाड़ी के साथ-साथ कारपेंटर का काम भी करते हैं। अमरजीत की मां घर से 22 किलोमीटर दूर इंफाल जाकर रोजाना मछली बेचती हैं। अमरजीत ने बताया कि पिता किसानी के साथ-साथ ऑफ सीजन में कारपेंटर का काम करते हैं। इसके बावजूद उन्होंने कभी मुझे अपने साथ काम में हाथ बंटाने को नहीं कहा।
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
पिता और मां ने फुटबॉल के प्रति मेरे लगाव को देखने हुए हर समय फुटबॉल खेलने को प्रेरित किया। चंडीगढ़ की अकादमी से शुरू हुए सफर के बारे में बताते हुए अमरजीत सिंह ने कहा कि मणिपुर से हमारे जानने वाले चंडीगढ़ में पढ़ाई करते थे। उन्होंने यहां की फुटबॉल अकादमी के बारे में बताया। इसके बाद यहां आया और ट्रायल दिए। इसमें चयनित होने के बाद अकादमी में प्रवेश मिल गया। यहीं से कोच हरजिंदर और संदीप से फुटबॉल की बारीकियां सीखीं और आज भारतीय टीम का कप्तान बन बैठा।
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कप्तान अमरजीत सिंह कियाम
बातचीत के दौरान खुद अमरजीत सिंह ने बताया कि काफी उत्साहित हूं। रातों को सपने में मैच की घूमता रहता है। टूर्नामेंट का पहला मैच अमेरिका जैसी टीम से जोकि बेहतरीन शेप में है, लेकिन भारतीय टीम के हौसले भी पूरी तरह से बुलंद हैं। तैयारियां भी बेहतर हुई हैं। हमें इस मैच को जीतने की उम्मीद हैं। मुझे खुशी है कि मेरे माता पिता पहली बार स्टेडियम में मुझे खेलते हुए देखेंगे। यह मेरे जिंदगी की स्पेशल घड़ी होगी।
पहली बार भारत में
भारत में पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी और आयोजन करने जा रहा हैं। फुटबॉल के महाकुंभ कहे जाने वाले इस टूर्नामेंट 6-28 अक्तूबर तक खेला जाएगा। इसमें विश्व के कई देशों की सर्वश्रेष्ठ टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसका उद्घाटन दिल्ली में होगा और देश के विभिन्न हिस्साें में इसके मुकाबले खेले जाने हैं। भारत को ए ग्रुप में रखा गया है। इस ग्रुप में भारत के साथ अमेरिका, कोलंबिया, गाना की टीमें हैं।