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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जिंदगी से जुड़े 10 ऐसे राज, शायद ही किसी ने बताए हों

Wed, 31 Jan 2018 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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mahatma gandhi
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि पर हम आपको बता रहे हैं, उनकी निजी जिंदगी से जुड़े 10 ऐसे राज, जिनके बारे में शायद ही किसी ने बताया हो।
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मोहनदास करमचंद गांधी - फोटो : BBC
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दुनिया भर में एक महान शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है। वे अपने आदर्शों और अहिंसा के पक्के थे। उन्हें न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी विशेष मान-सम्मान दिया जाता है। इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि दुनिया के महान वैज्ञानिकों में शुमार आइंस्टीन ने कहा था कि कुछ सालों बाद लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि महात्मा गांधी जैसे शख्स दुनिया में थे।
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mahatma gandhi
गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। देश के कई कोने ऐसे हैं, जहां से उनकी यादें जुड़ी हैं। ऐसी ही एक जगह हरियाणा में भी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि महात्मा गांधी को पांच बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। गांधी जी को सम्मान देने के लिए एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स गोल चश्मा पहनते थे।

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mahatma gandhi
गांधी जी नकली दांत लगाते थे, जिसे वह अपने कपड़े में रखते थे। महात्मा गांधी हर रोज 18 किलोमीटर पैदल चलते थे। इस लिहाज से गांधी जी पुरी दुनिया के दो चक्कर लगा सकते हैं।
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महात्मा गांधी
अपनी मौत से एक दिन पहले महात्मा गांधी कांग्रेस पार्टी को भंग करने पर विचार कर रहे थे। महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा 8 किलोमीटर तक चली थी। गांधी जी के नाम से भारत में 53 मुख्य मार्ग हैं जबकि विदेशों में 48 सड़के हैं। गांधी जी के कपड़ों सहित उनकी कई वस्तुएं आज भी मदुरई के म्यूजियम सुरक्षित हैं। अपने पूरे जीवन में गांधी जी ने कभी कोई राजनीति पद नहीं लिया।
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mahatma gandhi
जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन किया उसी अंग्रेजी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टांप जारी किया था। गांधी जी ने बोएर युद्ध में बतौर सैनिक हिस्सा लिया था। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी को 15 हजार डॉलर मिलते थे जो आजके तकरीबन 10 लाख रुपए के बराबर है।
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mahatma gandhi
हरियाणा के अंतिम छोर पर बसे एक जिले पलवल से गांधी जी की बेहद खास याद जुड़ी है। स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए बनाए गए रोलेट एक्ट के खिलाफ गांधी जी रेलगाड़ी से जलियांवाला बाग अमृतसर गए थे। इस सफर के दौरान रास्ते में पलवल रेलवे स्टेशन पर ब्रिटिश सरकार ने 10 अप्रैल 1919 को बापू को पहली बार गिरफ्तार किया था। पलवल के इतिहास में ये अध्याय खास तौर से जुड़ गया।

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महात्मा गांधी
उसके बाद 2 अक्टूबर 1938 को नेता जी सुभाष चंद्र बोस पलवल आए, तो उन्होंने गांधी जी की याद में एक स्मारक का शिलान्यास किया। उस स्मारक को आज गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट के नाम से जाना जाता है। करीब 5 एकड़ में फैले इस आश्रम में उनके बचपन से लेकर अंतिम सफर तक की कई चीजें संजो कर रखी गई हैं। इसलिए ट्रस्ट को लोग मिनी राजघाट का दर्जा भी देते हैं।

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महात्‍मा गांधी - फोटो : amar ujala
गांधी सेवा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष देवी चरण मंगला बताते हैं कि पलवल का वह स्टेशन आज खस्ता हाल में है और सरकारी स्तर पर उपेक्षा का शिकार है। स्टेशन पर एक स्मारक बना है, जिसे दो अक्तूबर या 30 जनवरी को ही महत्व दिया जाता है।
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Mahatma Gandhi
ऑफिस में न्यूजपेपर की कटिंग लगी है, जो उस समय की है जब बापू को गिरफ्तार किया गया था। गांधी जी का नाम जुड़ा होने के बावजूद पलवल को वह एतिहासिक महत्व नहीं मिला, जिसका वह हकदार है। यदि सरकार व प्रशासन इस ओर गंभीर हो, तो पलवल का नाम और रोशन हो सकता है।
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