केरल में बाढ़, तबाही, मजबूर जिंदगियों और बर्बादी के मंजर की कहानी सुनिए इंजीनियरिंग के इस छात्र की जुबानी। आंखें छलक उठेंगी और कदम उठ जाएंगे मदद के लिए हाथ बढ़ाने को।
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केरल में बाढ़
कमर भर पानी में दो किलोमीटर अपने साथियों के हाथ पकड़कर पैदल चलकर बोट स्टेशन पर पहुंचे। वहां एक घंटे के इंतजार के बाद बोट मिली। बोट पर चढ़ने के लिए भी अफरा-तफरी मची रही। किसी तरह बोट में जगह मिली और 17 किलोमीटर पानी के रास्ते बोट से अल्लप्पी पहुंचे। यह बात केरल के कूटानाड से चंडीगढ़ अपने रिश्तेदार के घर पहुंचे पटना निवासी विनीत नंदन ने अमर उजाला को बताई। विनीत नंदन कोचीन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग कूटानाड जिला अल्लप्पी में पढा़ई करते हैं। वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग के थर्ड सेमेस्टर के छात्र हैं।
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Kerala Flood
विनीत नंदन बताते हैं कि अल्लप्पी से एर्नाकुलम पहुंचे तो वहां से पटना या बिहार जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं थी। हालात बिगड़ते जा रहे था। घर वाले परेशान हो रहे थे। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। कहां जाएं। उनके दोस्तों में से ही एक लड़की अभिलाषा ने अपने मोबाइल पर देखा तो पता चला कि तिरुवनंतपुरम से दिल्ली के लिए राजधानी जा रही है। फिर वे सभी तिरुवनंतपुरम के लिए रवाना हो गए। वे वहां से राजधानी पकड़कर दिल्ली आ गए। अब दिल्ली से पटना जाने के लिए कोई ट्रेन में टिकट न होने के कारण वे अपने रिश्तेदार के घर चंडीगढ़ आ गए। अब वे दो दिनों के बाद पटना अपने परिजनों से मिलेंगे।
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Kerala Flood
सांप और अन्य जीव भी जान बचाने में लगे थे
विनीत नंदन बताते हैं कि बाढ़ का ऐसा मंजर था कि आदमी क्या बाढ़ में भयंकर सांप भी अपनी जान बचाने में लगे थे। पैदल चलते हुए सांप भी दिखा। एक समय लगा कि कहीं सांप डंस न ले, लेकिन वह भी पास से गुजर गया। पहले 14/15 ज़ुलाई की रात में बारिश शुरू हुई। तीन दिनों तक लगातार बारिश से बाढ़ के हालत बन गए। उस वक्त कॉलेज की टीम ने आसपास के लोगों को दवाइयां बांटने और किसे क्या परेशानी या बीमारी है, उसका सर्वे भी किया। तीन दिनों की बारिश में हॉस्टल में घुटने तक पानी भर गया था। उस वक्त एर्नाकुलम अपने दोस्त के घर आ गया था। वे 24 जुलाई को दोबारा कूटानाड पहुंचे। हॉस्टल से करीब एक किलोमीटर कॉलेज है। कॉलेज में 30 जुलाई को पहला क्लास लगा। सब कुछ सामान्य हो गया।
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दोबारा 14 अगस्त को बारिश...
विनीत नंदन का कहना है कि दोबारा 14 अगस्त की रात इतनी बारिश हुई कि जुलाई के तीन दिनों की बारिश से भी अधिक हुई। हॉस्टल में पानी भर गया। हॉस्टल में बढ़ता पानी देखकर चेची (बड़ी दीदी) ने कहा कि पानी बढ़ रहा है, खतरा हो सकता है। अपने अपने घर जाओ। कॉलेज के प्रिंसिपल सुनील कुमार एन ने भी अपने-अपने घर जाने को कह दिया था। फिर 15 अगस्त को हॉस्टल छोड़कर चल दिए थे। अब हालात सामान्य होने पर फिर पढ़ाई के लिए कूटानाड जाएंगे। विनीत नंदन का कहना है कि केरल सरकार के मंत्री और विधायक, अधिकारी सभी काम में लगे हैं। लोगों को बचाने में। ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वे मंत्री हैं। सभी लोगों में घुल मिलकर काम कर रहे हैं।
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