आपके ईमेल से भी आपका बैंक खाता हैक हो सकता है। जब खाते ये छोटी रकम की निकासी होती है तो सावधान हो जाएं। देखिए, ये वार्निंग।
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हैकिंग
आप इसकी छानबीन बैंक से जरूर करें। हो सकता है कि यह हैकरों का ‘सलामी अटैक’ हो। बाद में वह खाते से बड़ी निकासी कर ‘सुनामी’ भी ला सकते हैं। बता दें कि बीते कुछ साल पहले ग्रेबिट नामक एक वायरस ने कई कंपनियों की हजारों फाइलें और डाटा चुरा लिया था। हालांकि यह एक उदाहरण मात्र है। ऐसे ही न जाने कितने तरीके से आपके सोशल मीडिया से लेकर बैंक अकाउंट और अन्य सूचनाओं पर हैकरों का हमला होता आ रहा है।
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हैकिंग
- फोटो : SOCIAL MEDIA
यूपी एसटीएफ के एएसपी, साइबर क्राइम डॉ. त्रिवेणी सिंह की मानें तो छोटी रकम की चोरी छिपे या धोखे से निकासी (सलामी अटैक) कर हैकर टेस्ट करते हैं। वह यह कंफर्म करते हैं कि अमुक खाते से वह जब चाहें रकम निकाल सकते हैं। इसके बाद वह भविष्य में किसी बड़े ट्रांजेक्शन को अंजाम देते हैं। यही वजह है कि छोटी से छोटी रकम की निकासी के बाद भी एक्सपर्ट उसकी छानबीन की सलाह देते हैं ताकि ग्राहक संतुष्ट हो जाए कि अमुक ट्रांजेक्शन सही मद में हुआ है।
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हैकिंग
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दरअसल, बीते दिनों लाखों डेबिट कार्डधारकों के डाटा लीक होने के बाद खुद बैंक भी उनको सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। वहीं बैंक खुद भी ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। हालांकि बैंक के सूत्रों के मुताबिक यह डाटा बैंक और ग्राहक के बीच की थर्ड पार्टी से लीक होने की संभावना जताई जा रही है। साइबर मामलों के जानकारों की मानें तो थर्ड पार्टी के साथ हाथ मिलाने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां ग्राहकों का डाटा सुरक्षित रहेगा।
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हैकिंग
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ऐसे होता है हमला-
वायरस हमला आपके ईमेल पर होता है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की फाइल अटैच होती है। वायरस इमेज, ग्रीटिंग कार्ड या ऑडियो और वीडियो फाइलों के जरिये भी कंप्यूटर में वायरस आता है। इसको डाउनलोड करते ही वायरस सक्रिय हो जाता है और सारी सूचनाएं हैकरों तक पहुंचाना शुरू कर देता है। साइबर अटैक के तहत डेबिट और क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर, सीवीवी कोड या सोशल नेटवर्किंग साइट की हैकिंग की जाती है। इसके अलावा सीधे मदरबोर्ड पर अटैक कर फीड डाटा चोरी किया जाता है।
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हैकिंग
इससे बचना चाहिए-
ईमेल पर आए लुभावने और भड़कीले विज्ञापन, आकर्षक उपहारों का ऑफर, इनामी योजनाओं के ऑफर से बचना चाहिए। चूंकि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला इसकी बारीकियों को नहीं जानता और आसानी से फंस जाता है। इसके अलावा एटीएम का पिन भी समय समय पर बदलते रहना चाहिए ताकि कार्ड क्लोनिंग की
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हालत में साइबर अपराधी उसका उपयोग न कर पाएं।
साइबर क्राइम में सजा- भारत में आइटी एक्ट के तहत कंप्यूटर की मदद से कोई भी अपराध साइबर क्राइम में आता है और इसमें सात साल तक की सजा का भी प्रावधान है।
ऑनलाइन फोरम पर डाटा की खरीद-बिक्री-
साइबर मामलों के जानकारों की मानें तो अब छोटे से हैकिंग के मामलों से आगे चलते हुए यह पूरा बाजार बन गया है। ऑनलाइन फोरम भी ऐसा ही एक बाजार है। यहां कई देशों से चोरी किए गए डाटा की खरीद बिक्री होती है। अपराधियों का ऑनलाइन जमावड़ा भी लगता है। कई बार डाटा खरीदने के लिए बोली भी लगाई जाती है। यही नहीं यह फोरम किसी भी देश के डाटा को उड़ाने के लिए ट्रेनिंग भी देती है। कुछ अन्य साइबर क्राइम साइबर स्टाकिंग, इमेल बांबिंग, डाटा डिडलिंग, मोर्फिंग, लॉजिक बम, ट्रोजन हॉर्स