हर लड़की का सपना होगा ऐसा जीवनसाथी, जिसकी कहानी हम आपको सुनाने जा रहे हैं। ये शख्स खुद को भूलकर ‘जीवनसंगिनी’ के सपने पूरे करने में जुटा है, देखिए।
विज्ञापन
2 of 7
कबड्डी की ट्रनिंग लेते खिलाड़ी
खेल के मैदान पर अक्सर कोच अपने खिलाड़ियों को दांव-पेंच सिखाते नजर आते हैं, लेकिन एक ऐसा भी शख्स है जो खुद की शख्सियत भूलकर मैदान में अपनी जीवनसंगिनी को सुबह-शाम खेल के गुर सिखाता है। कभी वह कोच की भूमिका में नजर आता है तो अगले ही पल जीवनसंगिनी के साथ पार्टनर बनकर खेल की बारीकियों को समझाता है। यहां बात हो रही है एशियन गोल्ड मेडलिस्ट कबड्डी खिलाड़ी कविता के पति राजू सिवाच की।
विज्ञापन
3 of 7
कबड्डी की ट्रनिंग लेते खिलाड़ी
मूलरूप से जींद जिले के पड़ाना गांव की रहने वाले कबड्डी खिलाड़ी कविता आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वर्ष 2010 में कविता की शादी मॉडल टाउन में रहने वाले राजू सिवाच से हो गई। बकौल कविता, शादी के बाद भी उसने अपना खेल जारी रखा। उसके कोच नरेंद्र देशवाल उसे कबड्डी की प्रेक्ट्सि कराते थे। करीब पांच साल पहले उनकी राजस्थान में नौकरी लग गई। ऐसी स्थिति में कविता के सामने प्रेक्ट्सि को लेकर समस्या खड़ी हो गई कि आखिरी प्रेक्ट्सि कौन कराएगा।
4 of 7
कबड्डी की ट्रनिंग लेते खिलाड़ी
- फोटो : amarujala
कविता का कबड्डी के प्रति प्रेम देखकर राजू ने ही फैसला लिया कि वह अपना रोजगार छोड़ देगा और कविता को प्रेक्ट्सि कराएगा। उस वक्त वह ठेकेदारी का काम करता था। तब से लेकर अब तक राजू हर रोज सुबह-शाम कविता को कभी छोटूराम स्टेडियम तो कभी राजीव गांधी स्टेडियम में लेकर जाता है। करीब दो घंटे तक प्रेक्ट्सि के दौरान कभी वह खड़े होकर फिटनेस की ट्रेनिंग देता है तो कभी मैदान में कविता का पार्टनर बनकर कबड्डी के गुर सिखाता है।
विज्ञापन
5 of 7
कबड्डी की ट्रनिंग लेते खिलाड़ी
- फोटो : Mahesh Kumar
सबसे पहले उठकर दोनों कई किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं और फिर मैदान पर आकर प्रेक्ट्सि करते हैं। फिलहाल में कविता अक्तूबर-नवंबर में होने वाले नेशनल गेम और 2018 में होने वाले एशियाड की तैयारियों में जुटी हुई है। कविता ने वर्ष 2014 में कोरिया में हुए एशियाड में गोल्ड मेडल जीता है। इसके अलावा वर्ष 2012 में हुए महिला वर्ल्ड कप में भी गोल्ड मेडल झटका था।
विज्ञापन
6 of 7
कबड्डी की ट्रनिंग लेते खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
बकौल कविता, अभी तक वह पांच बार इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल और नेशनल लेवल पर भी 17 बार पॉजिशन बनाई है। इसके अलावा कई अन्य चैंपियनशिप में भी नाम रोशन किया है। कविता का कहना है कि वैसे तो पिछले पांच साल से वह अपने पति के साथ ही प्रेक्ट्सि कर रही है, लेकिन जब भी कोई चैंपियनशिप होती है तो वह करीब दो माह निड़ानी स्पोर्ट्स हॉस्टल में चली जाती है। वहां उसके कोच प्रेक्ट्सि कराते हैं जब जाकर चैंपियनशिप में भाग लेकर नाम रोशन करती है।
कविता ने बताया कि कभी चोट तो कभी डिलीवरी की वजह से चार बार ऑपरेशन हो चुका है। ऑपरेशन के बाद वजन 90 किलोग्राम तक बढ़ जाता था, लेकिन मैदान पर दिन-रात मेहनत करकर फिलहाल 65 किलोग्राम वजन है। वहीं राजू सिवाच का कहना है कि पत्नी को कबड्डी में अच्छे मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें अपना रोजगार छोड़ा है। कविता की उपलब्धि के बाद उन्हें इसका परिणाम भी मिल गया है। दोनों मिलकर करीब 70 एथलीट को भी ट्रेनिंग देते हैं। इसके लिए वह कोई फीस नहीं लेते।