अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी की ऐसी परफॉर्मेंस देखने को मिली कि सभी वाहवाही कर उठे। आप भी देखिए तस्वीरों में एक झलक।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने द्रोपदी नृत्य में महाभारत के जीवंत दर्शन कराने के साथ पर्यटकों को गीता के उपदेशों को अपने जीवन में धारण देने का संदेश दिया। इस द्रोपदी नृत्य ने धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के पूरे वातावरण को भगवान श्री कृष्ण के रंग में रंगने का काम किया।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव 2016 में पुरुषोत्तमपुरा बाग ब्रह्मसरोवर पर प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने सांस्कृतिक संध्या में द्रोपदी नृत्य की प्रस्तुती दी। इस सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ शनिवार रात मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, सांसद रत्न लाल कटारिया, राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, विधायक सुभाष सुधा, विधायक डॉ. पवन सैनी, उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
इस दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। महोत्सव में हेमा मालिनी के द्रोपदी नृत्य को देखने के लिए हजारों पर्यटक पुरुषोत्तमपुरा बाग में पहुंचे। इस सांस्कृतिक संध्या का कुरुक्षेत्रवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
लाखों हजारों लोगों का इंतजार उस समय खत्म हुआ जब प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने द्रोपदी नृत्य की प्रस्तुती को शुरू किया। अभिनेत्री ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ परंपरागत वेश-भूषा में द्रोपदी नृत्य को शुरू किया।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
इस नृत्य में हेमा मालिनी और उनके साथी कलाकारों ने महाभारत के अहम क्षणों के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को प्रस्तुत किया और धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के वातावरण को भगवान श्री कृष्ण के रंग में रंग दिया।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
इस नृत्य में द्रोपदी चीरहरण के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश को भी पर्यटकों के समक्ष रखने का काम किया। इस प्रस्तुति को हजारों लोगों ने तालियां बजाकर खूब सराहा और पर्यटकों ने इस प्रस्तुति का आनंद लिया।
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दक्षिण भारत में फिल्म पांडव वनवासम् से 1961 में कैरियर की शुरुआत कर मथुरा सीट से सांसद बनने तक हेमा मालिनी ने कई बुलंदियों को छुआ है। 68 की उम्र के बाद भी उनके हुनर का जादू आज भी बरकरार है।
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ये उनकी अदा, अंदाज और असर का ही नतीजा है कि अभी तक बॉलीवुड में उनके बाद दूसरी ड्रीम गर्ल का खिताब किसी को नहीं मिल सका। कुरुक्षेत्र पहुंचीं हेमा मालिनी से अमर उजाला ने खास बातचीत की।
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गीता जयंती महोत्सव में ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की प्रस्तुति
नॉर्थ जोन कल्चर सेंटर भारत सरकार के बुलावे पर हेमा मालिनी कुरुक्षेत्र में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर द्रौपदी नृत्य की प्रस्तुति करने के लिए पहुंची थीं।
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यह संयोग ही था कि उनका यह नृत्य कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर स्थित महाभारत कालीन द्रौपदी कूप के ठीक सामने मंच पर हुआ। बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि मैं नारी वेदना को समझती हूं। द्रौपदी नृत्य में यही सार है। इसमें द्रौपदी के रूप में आधुनिक नारियों के संघर्ष, चुनौतियों और दर्द को उजागर करता है।
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उम्र के इस पड़ाव में तमाम व्यस्तताओं के चलते देख फिल्मों में अभिनय,नृत्य और राजनीति के अलावा सामाजिक कार्यों का सामंजस्य बनाने में निपुण हेमा मालिनी ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में दिए कर्म के संदेश में विश्वास रखती हैं।