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कुत्ता वफादार ही नहीं जानलेवा भी है, अगर काट ले तो ये तरीका बचाएगा जिंदगी

Mon, 24 Apr 2017 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पालतू कुत्ता
कुत्ता वफादार ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी होता है। अगर यह आपको काट ले तो तुंरत यह उपाय कर लें, वरना जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
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पालतू कुत्ता - फोटो : अमर उजाला
पालतू कुत्ता काटे या फिर खरोंच मारे, एंटी रैबीज के टीके लगवाने में लापरवाही न बरतें। पास के अस्पताल या एंटी रैबीज क्लीनिक जाएं और कम से कम तीन डोज लगवाएं। यानी पहले दिन, तीसरे और सातवें दिन। इससे पीड़ित रैबीज से बचे रहेंगे।
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पालतू कुत्ता
आमतौर पर लोगों में राय होती है कि पालतू कुत्ता है तो वैक्सीन लगवाने की क्या जरूरत। लेकिन इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इंजेक्शन जरूर लगवाएं। ये बात पीजीआई में आयोजित रैबीज की रोकथाम के लिए आयोजित सीएमई के दौरान डा. तरुणदीप ने बताया।

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पालतू कुत्ता - फोटो : अमर उजाला
रैबीज का वायरस काटने से लेकर अगले 70 सालों के बीच कभी एक्टिव हो सकता है। इसलिए इसे रोकने के लिए डोज जरूर लगवाने चाहिए। उन्होंने यह बताया कि रैबीज रोकने के लिए 70 प्रतिशत लावारिस कुत्तों में वैक्सीनेशन जरूरी है।

 
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पालतू कुत्ता - फोटो : अमर उजाला
एक आंकड़े के मुताबिक शहर में स्ट्रे डॉग की संख्या करीब 16 हजार है। इसमें से आधे ही कुत्तों को वैक्सीनेट किया गया है। डॉग बाइट रोकने के लिए स्ट्रेलाइजेशन का होना भी जरूरी है, लेकिन इसके लिए पूरे मैनेजमेंट को फालो करना होगा।
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पालतू कुत्ता
कुत्तों को स्ट्रेलाइजेशन जरूरी है। इससे उनके स्वभाव में बदलाव आता है और डॉग बाइट के केसों में भी कमी आएगी। चंडीगढ़ की दो एंटी रैबीज क्लीनिक में रोजाना 70 से डॉग बाइट के केस आ रहे हैं।
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पालतू कुत्ता
सेक्टर 19 में रोजाना 40-45 और सेक्टर 38 में 20-25 केस। हालांकि इसमें आधे केस पंजाब, हिमाचल और हरियाणा के होते हैं। दोनों ही क्लीनिक में सीरम, टिटनेस और एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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