भूकंप जैसी आपदा के समय थोड़ी सतर्कता और हिम्मत दिखाएं, कुछ सावधानियां बरतें और खुद के साथ साथ दूसरों को भी बचाएं। जानिए क्या करें, क्या न करें।
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शुक्रवार को हरियाणा में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो इतनी तेज थे कि लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। बता दें कि भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसे किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकता। यहां तक कि वैज्ञानिक इसका पूर्वानुमान भी नहीं लगा सकते कि कब आएगा। ऐसे में भूकंप के समय बरती जाने वाली सावधानियों को हमेशा ध्यान में रखना होगा।
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ये बातें ध्यान रखें: भूकंप के समय अगर आप घर के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं। किसी मज़बूत टेबल या ऐसे किसी फर्नीचर के नीचे पनाह लें। अगर आसपास टेबल नहीं है तो हाथ से चेहरे और सिर को ढक लें। घर के किसी कोने में चले जाएं। कांच, खिड़की, बाहरी दरवाज़े और दीवार और झूमर आदि जैसी किसी भी गिरने वाली चीज़ से दूर रहें। अगर बिस्तर पर हैं तो लेटे रहें, तकिया से सिर ढक लें।
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भूकंप
- फोटो : News Letter
ये भी जानना जरूरी: आसपास ऐसा भारी फर्नीचर है, जिसके गिरने का ख़तरा है तो उससे दूर रहें। ऊंची इमारतों में रहने वाले भूकंप के समय लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें। लिफ्ट पेंडुलम की तरफ हिलकर दीवारों से टकरा सकती है। बिजली जाने से भी वो रुक सकती है और आप उसमें फंस सकते हैं। ऐसी सीढ़ी का भी इस्तेमाल न करें जो मज़बूत ना हो।
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- फोटो : amar ujala
जब तक झटके आ रहे हों घर के अंदर ही रहें, झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें। भूकंप के समय अगर आप घर के बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें। जब तक झटके खत्म न हो बाहर ही रहें। भूकंप के समय अगर आप किसी चलती गाड़ी में हैं तो जितनी जल्दी हो सके गाड़ी रोक लें और गाड़ी में बैठे रहें।
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भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर आ गए।
- फोटो : AmarUjala
भगवान न करें, अगर आप मलबे में दब गए हों तो माचिस न जलाएं, क्योंकि लीक हुई गैस आदि से आग का ख़तरा हो सकता है। मलबा हटाने के लिए हाथ पैर न चलाएं। मुंह को रुमाल या किसी कपड़े से ढंक लें। ज़ोर से आवाज़ लगाने से आपके में धूल जा सकती है। पाइप या दीवार पर थाप देकर बचावकर्मी का ध्यान खींच सकते हैं। कोई उपाय न हो तभी ज़ोर से आवाज़ लगाएं।
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भूकंप
भूकंप की तीव्रता का क्या होता है असर: 0 से 1.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है। 2 से 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है। 3 से 3.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर होता है। 4 से 4.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
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भूकंप
5 से 5.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर फर्नीचर हिल सकता है। 6 से 6.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है। 7 से 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं। 8 से 8.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।
9 और उससे ज्यादा रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी। भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा ताकतवर होता है।